Pindkapar Colony, Rehabilitation, Bhandara

भंडारा. विदर्भ के सबसे विशाल बांध परियोजना गोसीखुर्द का दीदार करने के लिए इन दिनों सैलानियों की भीड़ बांध पर है. हर कोई सेल्फी ले रहा होता है. जलाशय की भव्यता को देखकर दांतों तले उंगलिया दबा बैठता है. किंतु हकीकत यह है इस प्रकल्प व जलाशय की भव्यता में प्रकल्पबाधितों के आंखों से निकले आंसूओं को सैलाब भी है. सरकारी नीति व नियत के शिकार प्रकल्प बाधित आज भी दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं.

भंडारा जिला मुख्यालय से सिर्फ 4 किमी दूरी पर स्थित पिंडकेपारवासी दोहरी मार झेल रहे हैं. वैकल्पिक कालोनी पूरी तरह नहीं बन पायी हैं. उन्हें मजबूरन बाधित गांव में रहना पड़ रहा है. हर साल बाढ़ का सामना करना पड़ रहा है. सरकारी नीति से परेशान पिंडकेपारवासी अब संगठित होकर संघर्ष की तैयारी कर रहे हैं.

मुआवजे का इंतजार

पिंडकेपार गांव प्रकल्प बाधित की श्रेणी में आता है. दशकों बाद भी ग्रामीणों को मुआवज़े का इंतजार है. जब गोसीखुद बांध अपनी पूर्ण क्षमता पर रहेगा. पिंडकेपार गांव जलमग्न होगा. सरकार ने प्रकल्पबाधितों को राष्ट्रीय महामार्ग पर पिंडकेपार पुर्नवास कालोनी की योजना बनाई व घर के लिए पट्टे दिए. सरकार ने ग्रामीणों को इस नई कालोनी में जाकर रहने के लिए कहा है, किंतु जहां तक जन सुविधाओं की बात है, उनकी पूर्ति नहीं हुई है. ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार ने जिस कंपनी को कालोनी में सुविधा निर्माण करने का ठेका दिया है. उसने काम पूरा नहीं किया. जिससे पुनर्वास कालोनी में जाकर रहना आसान नहीं है.  

बाढ़ की विभीषिका ने किया हलाकान

पुनर्वास कालोनी में जन सुविधाओं को निर्माण नहीं होने की वजह से लोगों ने अपने घर नहीं बनाए. वहीं दूसरी ओर अगस्त महीने के अंत में आए प्रलंयकारी बाढ़ में उनके पिंडकेपार गांव को वैनगंगा के अपने प्रलंयकारी बाढ़ का सामना करना पड़ा. पिंडकेपार पुनर्वास कालोनी में सुविधा निर्माण करने के संबंध में कई बार निवेदन सौंपा गया. आदर्श युवा मंच  अध्यक्ष संस्थापक पवन मस्के के नेतृत्व में लुकेश जोध, संजू मते, सौरभ बाभरे, रणजीत सेलोकर, मोनार्च शेंडे, सौरभ साखरकर, पारस वैद्य, अक्षय सारवे, अनिकेत बेघेले, आयूष भोंडे युवा पीढ़ी ने अब संघर्ष करने की ठान ली है. अब जनाक्रोश आंदोलन किया जाएगा. जब तक समाधान नहीं निकलेगा, आंदोलन खत्म नहीं होगा.