प्रमोद हिरडकर के जन्म दिन पर अनोखा उपक्रम

  • जरूरतमंद विद्यार्थियों को पुस्तकें वितरित  

पवनी (सं). यहां के खैरी (दिवान) में रहने वाले प्रमोद हिरडकर ने जिले के जरूरतमंद विद्यार्थियों को पुस्तकों का नि.शुल्क वितरण किया गया. स्पर्धा के वर्तमान युग में स्पर्धा परीक्षाओं में शिक्षा को बहुत स्थान प्राप्त है.   

महाविद्यालय में शिक्षा पूरा करने के बाद विद्यार्थियों को एक बड़ा समूह अधिकारी होने का सपना देखता रहता है. उसे गता रहता है कि हमें पढ़ाई करनी चाहिए, अधिकारी बनना चाहिए, सेना में जाना चाहिए, पुलिस विभाग में जाना चाहिए तथा अपने परिवार के, गांव का नाम रौशन हो, लेकिन वैसा नहीं होता.  

हर विद्यार्थी पालक उसे स्पर्धा परीक्षा की पढ़ाई करने की दृष्टि से शिक्षा पूरा होने के बाद भी समय देते हैं, क्योंकि उनकी आर्थिक स्थिती ठीक-ठाक रहती है. समाज के एक बड़े वर्ग में हर दिन का जीने के लिए संघर्ष करना पड़ता  है, लेकिन जीवन संघर्ष के बीच बच्चों की पढ़ाई, उनकी कापी, पुस्तकों का खर्च ज्यादाकर माता-पिता के लिए संभव नहीं रहता, ऐसे में अगर कोई पुस्तकों का खर्च उठाने की जिम्मेदारी ले ले तो मध्यमवर्गीय तथा गरीब परिवारों के लिए वह बहुत बड़ा सहारा हो जाता है, इसी बात को ध्यान में रखते हुए कुछ सामाजिक संस्थाओं,कुछ सामाजिक कार्यकर्ता मदद के हाथ बढ़ाते हैं, ऐसे ही एक समाजिक कार्यकर्ता हैं, प्रमोद हिरडकर.

प्रमोद हिरडकर ने व्यवसाय से एक भोजनालय के मालिक हैं, उनका आसगांव में एक भोजनालय है. प्रमोद हिरडकर को शिक्षा क्षेत्र तथा स्पर्धा परीक्षा की तैयारी करने के लिए वाले  विद्यार्थियो को परीक्षा में आर्थिक परेशानी का सामना न करना पडे, इस बात को ध्यान में रखकर   उन्होंने अपने जन्मदिन पर किसी भी तरह का जश्न न मनाकर उन्होंने जरूरतमंद विद्यार्थियों की मदद करने का संकल्प लिया. समाजासेवक प्रमोद हिरडकर ने  भंडारा जिले के पवनी, भंडारा, लाखनी, लाखांदुर इन चार तहसीलों के गांव- कस्बों में जरूरतमंद तथा मेहतनती  विद्यार्थियों को चेतन पडोले,, मनीष गभणे,सोहिल शेख, अखिल मुंडले इन विद्यार्थियों का गुप्त पद्धति से खोज बीन शुरू की.   इन विजद्यार्थियों की सूची करने उनको  पढ़ाई के लिए जरूरी पुस्तकों की सूची तैयार तथा पिछले सप्ताह से गांव-गांव में जाकर विद्यार्थियों को गुप्त तरीके से  पुस्तकों का वितरण किया तथा कुछ गांव में जाकर विद्यार्थियों को स्वयं द्वारा बनाए गए वाचनालय में पुस्तकों का वितरण किया।