Village
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पालांदूर (सं). भंडारा जिले के लाखनी तहसील की चर्चित ग्रामपंचायतों में से पालांदूर ग्रामपंचायत के चुनाव के काल में हिवरे बाजार,पाटोदा इन ग्रामपंचायतों जैसी स्वच्छ, सुंदर तथा वैभवशाली ग्राम बनाने का आश्वासन देने वाले ग्रामपंचायत सदस्य तथा सरपंच को अब ग्रामपंचायत के कार्यकाल में एक-दो वर्ष रहते समय जनता की दिए गए आश्वासनों की ओर जरा सा भी ध्यान नहीं है.

ग्रामपंचायत के चुनाव के समय निर्वाचित हुए सरपंच गांव विकास का विकास केरेंगे, ऐसी अपेक्षा गांव के लोगों थी, लेकिन उनकी अपेक्षाएं पूरी नहीं हुई. युवा सरपंच को चुनने की वजह से गांव के लोगों की मूलभूत समस्याओं का समाधान होगा, ऐसी अपेक्षा गांव की जनता को थी, लेकिन गांव विकास तथा समस्याओं के बारे में ग्रामपंचायत के 13 सदस्यों के साथ-साथ युवा सरपंच हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं. चुनाव आते ही सार्वजनिक सुख- सुविधाएं देने के नाम पर चिल्लाने वाले कहां गए, ऐसी सवाल पालांदूर के नागरिक उठाने लगे हैं.

स्वच्छता पर हर वर्ष लाखों रुपए खर्च करने वाली ग्रामपंचायत स्वच्छता के बारे में ठोस भूमिका नहीं ले रही, जिस वजह से जगह-जगह गंदगी दिखायी देती है. 2012-13 इस वित्त वर्ष में संजयनगर में व्यायामशाला का निर्माण किया गया, इस व्यायामशाला में व्यायाम करने के लिए जरूरी सामग्रियां ही नहीं हैं.

सुभाष मित्र मंडल के नाम स पहचाने जाने वाली टोली का मैदान अपनी दुर्दशा पर रो रहा है. घर-घर का कचरा एकत्र करने के लिए ग्रामपंचायत के पास कचरा गाडी भी नहीं है. गांव में स्थित अंगणवाडी के सामने गोबर ही गोबर दिखायी देता है, इतना ही नहीं यहां आसपास घा, भी बहुत बढ़ गई है.

बाजार तथा बस स्थानक परिसर में सरकारी जगह पर कुछ व्यापारियों ने अतिक्रमण करके ग्राम पंचायत पदाधिकाऱियों की मर्जी को संभालते हुए पक्के निर्माण कार्य किए हुए दिखाई देते हैं. गांव के पथदीप रात के समय तीन दिन बंद रहते हैं, लेकिन वार्ड के सदस्यों का इस ओर ध्यान नहीं हैं. 1.25 करोड़ की जलापूर्ति योजना का क्या हुआ, ऐसा सवाल यहां के लोगों की ओर से उठाया जा रहा है.

इस योजना का पानी गांव की जनता को नहीं मिल रहा है, इस बारे में कोई भी ग्रा. पं. सदस्य कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं. गांव का मुख्य रस्ता डांबरीकरण की प्रतीक्षा में है. स्थानीय जनप्रतिनिधि के उदासीन रहने की वजह से पानी की समस्या, रस्तों की समस्या, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं कैसे प्राप्त होंगी, ऐसा सवाल पालांदूरवासी नागरिक उठा रहे हैं.