पैदल चलने वाले मार्गों को दिया जाए ग्रामीण रास्तों का दर्जा

  • .वर्षा काल में बेहद खराब हो जाती है हालत
  • .किसानों को सहन करनी पड़ रही है भारी परेशानी

भंडारा (का). ग्रामीण रोजगार हमी योजना के तहत अकुशल काम के अंतर्गत गांव-गांव में पैदल रास्तों का निर्माण किया गया है. लेकिन बनाए गए पैदल रास्तों की हालत बहुत ज्यादा खराब होने के कारण उन पर चलना वैसा ही मुश्किल हो जाता है, लेकिन वर्षाकाल में इस रास्ते की हालत और भी ज्यादा खराब हो जाती है. वर्षा काल में किसानों की परेशानी में और अधिक बढ़ जाती है.

रोजगार गारंटी योजना के माध्यम से मुख्य रूप से खेतो- खलिहानों के अंदर के पैदल रास्तों, नाला सहजीकरण, तालाब की गंदगी निकालने, गहरीकरण आदि कार्य किए जाते हैं. लेकिन इन कार्यो का लाभ किसानों को सिर्फ फसल के सीजन तक ही मिल पाता है. वर्षाकाल में किसानों, खेत मजदूरों को पैदल रास्तों से जाते वक्त कीचड़ से होते हुए गुजरना पड़ता है. कई बार ये रास्ते इतने खराब हो जाते हैं कि एक कदम चलना भी मुश्किल हो जाता है. पिछले वर्ष 2019 में पचखेडी परिसर में कुछ पैदल मार्गों का मिट्टी भरने का काम पूरा कर लिया गया था, लेकिन पतखेडी से पलगांव इन पैदल रास्ते का काम अभी-भी पूरा नहीं हुआ है.

इस रास्ते पर मिट्टी डालने का काम भी नहीं हुआ है. वर्षाकाल में इन रास्तों से यातायात करते समय किसानों को परेशानी उठानी पड़ रही है. इस बारे में कई बार शिकायत करने के बावजूद इन रास्तों की स्थिति सुधारने के बारे में गंभीरता से सोचा भी नहीं गया है. जिन रास्तों पर मिट्टी डालने का काम पूरा किया जा चुका है, उन्हें ग्रामीण रास्ते का दर्जा देकर उनका मजबूतीकरण करने की मांग जोर पकड़ रही है, अब देखना यह है कि इस पर अमल कब किया जाता है.