Water supply scheme

भंडारा. पेयजलापूर्ति व सिंचाई के मजबूत स्त्रोत की वजह से नदी किनारे सभ्यता का विकास हुआ. शहर भी इन्हीं खुश नसीब शहरों में से एक है, किंतु विडंबना देखिए कि वर्ष 1990 तक वैनगंगा का पानी के बगैर प्रक्रिया के भी शुद्ध एवं मिठा था. जबसे गोसीखुर्द बांध बना है, नाग नदी के बैकवाकटर से पानी ज़हरीला हो चुका है. बगैर ट्रीटमेंट पानी पिया नहीं जा सकता. शहरवासियों को शुद्ध जलापूर्ति का मुद्दा चुनावों में उछलता रहा है.

मौजूदा भाजपा के कार्यकाल में महत्वाकांक्षी वृद्धि गत जलापूर्ति योजना को मंजूरी मिली. काम भी शुरू हुआ, लेकिन काम की गति को देखकर कोई गुंजाइश नहीं है कि दिसंबर 2021 के पूर्व शहरवासियों को शुद्ध व निरंतर जलापूर्ति का लाभ मिले. अगले नप चुनाव में मात्र एक साल शेष है. जलापूर्ति योजना का वादा पूरा हुआ, लेकिन नागरिकों को पानी नहीं देने की नाकामी पर भाजपा को विरोधियों के तीखे सवालों का सामना करना पड सकता है.

जलापूर्ति कर्मचारी है परेशान

भंडारा शहर वैनगंगा नदी के किनारे बसा है. बावजूद भंडारा शहरवासियों को गला सूखा ही रहा है. गोसीखुर्द परियोजना के पूर्व गर्मी के महीनों में शहर को जलापूर्ति के लिए पेंच परियोजना से पानी खरीदना पड़ता था. नदी में रेत के बांध बनाने पड़ते थे. अब नदी लबालब है, लेकिन पानी प्रदूषित हो चुका है. अंग्रेजों की जमाने की पाइप-लाइन के लीकेज ठीक करने का काम पूरे साल चलते रहता है.

नागरिकों की आलोचना का सामना जलापूर्ति विभाग के पदाधिकारी, अधिकारी व कर्मचारियों को 365 दिन करना पड़ता है. पुरानी पाइप-लाइन का नक्शा कार्यालय में नहीं है. पुराने प्लंबरों को ढूंढ कर लाना पड़ता है कि “भई बताओ ! कनेक्शन कहां से दिया गया था !” दोषपूर्ण पाइप-लाइन को लेकर बेचारे कर्मचारी परेशान व बेहद दबाव में रहते है. जब पानी का बिल देने की बारी आती है, नागरिकों का सवाल रहता है कि “पानी ही नहीं लिया तो कैसे पैसे ?”

2020 तक मिलना था पानी

भंडारा शहर को शुद्ध जलापूर्ति योजना का सब्जबाग गत 3 दशकों से दिखाया जाता रहा. हर चुनाव में शुद्ध व 24 घंटे पानी देने का वादा किया जाता है, किंतु उसे मूर्तरूप देकर अमल में लाने का श्रेय भाजपा को जाता है. नगराध्यक्ष सुनील मेंढे व टीम के प्रयास व तत्कालीन मुख्यमंत्री फडणवीस ने वचन पूर्ति की व शहर को महत्वाकांक्षी जलापूर्ति योजना मिली. भंडारा शहर में जलापूर्ति संकट का स्थायी समाधान करने नई वृद्धि गत जलापूर्ति योजना का भूमिपूजन 22 फरवरी 2018 को भव्य समारोह में किया गया. सपना दिखाया गया कि साल 2020 तक काम पूरा होगा व शहरवासियों को शुद्ध पानी पिने के लिए मिलेगा.

जिस एजेंसी को काम सौंपा गया. वह काम के प्रति गंभीर नहीं रही. मार्च 2020 में कोरोना की वजह से एजेंसी को काम लटकाने का नया बहाना मिल गया. अब एजेंसी को कार्यपूर्ति के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है, लेकिन उम्मीद कम ही है कि अगले चुनाव के पूर्व काम पूरा हो सकेगा.

सत्ताधारियों का टेंशन बढ़ा

तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नप चुनाव पूर्व जनसभा में इस सबंध में खुला एलान भी किया था कि नप में सत्ता आती है, शहर को जलापूर्ति योजना जरूर मिलेगी. भाजपा ने यह वादा पूरा किया. पीठ थपथपाने का मौका मिला, लेकिन जैसे ही जलापूर्ति योजना में विलंब होता जा रहा है. सत्ताधारियों को टेंशन बढ़ रहा है कि चुनाव में शुद्ध जलापूर्ति का मुद्दा जरूर उठेगा. उस समय श्रेय लेने की बजाए सफाई देनी पड़ेगी कि शुद्ध पानी देने में देरी क्यों हुई. उधर जलापूर्ति योजना में हो रही देरी पर विरोधी नजर रखे हुए है. नई जलापूर्ति योजना में नई पाइप लाइन बिछाई जा रही है. इससे वर्तमान में 9 एमएलटी से क्षमता 25 एमएलटी होगी. जलापूर्ति के लिए ऊंचाई व तराई के हिसाब से 6 जोन में बांटा गया है. नई 4 टंकियां बनाई जा रही है. इसमें में हुतात्मा स्मारक परिसर में 5.90 लाख लीटर, भैय्याजी नगर में 7.50 लाख लीटर, एमएसईबी कालोनी में 4.5 लाख लीटर व पटवारी भवन परिसर में 12.20 लाख लीटर क्षमता की टंकी बनाई जाएगी.