Sihora Dhaan, Paddy

भंडारा/लाखांदुर. धान खरीदी के काम का सुचारू रूप से चलाने के लिए व्यवस्था बनायी गयी. लेकिन जिनके हाथों में व्यवस्था का प्रबंधन दिया गया. उनमें संवेदनशीलता नहीं होने की वजह से काम का तरीका ही बदल दिया गया. इस पूरी व्यवस्था में बेचारा किसान पूरी तरह से पिसा जा रहा है. वक्त बर्बाद हो रहा है. जेब में आमदनी आने के पहले की जेब काटी जा रही है. जिले में ही कहीं पर तुलाई में गड़बड़ी की जा रही है तो कहीं पर धान की तुलाई नहीं हुई है. खुले आसमान के निचे तिरपाल ओढ कर धान की बोरियां अपनी बारी का इंतजार कर रही है.

लाखांदुर तहसील में 14 धान खरीदी केंद्र मंज़ूर है. नियम के अनुसार केंद्र पर धान तुलाई के लिए इलेक्ट्रानिक वजन कांटे का इस्तेमाल होना चाहिए. इस संबंध में सरकारी आदेश है. लेकिन किसानों का आरोप है कि मांदेड स्थित धान खरीदी केंद्र में साधे वजन कांटे का इस्तेमाल हो रहा है.

अनिवार्य है इले. वजन कांटे

उल्लेखनीय है कि धान खरीदते समय तुलाई के दौरान भोलेभाले किसानों के साथ ठगी की वारदातें होती थी. इसके पश्चात सरकार ने इलेक्ट्रानिक काटें से तुलाई करने का निर्णय लेते हुए इस संबंध में निर्देश जारी किया.  

किसानों ने बताया कि लाखांदुर तहसील के मांदेड केंद्रों पर साधे काटे से ही धान खरीदी हो रही है. किसानों के अनुसार इस सदोष पद्धती में प्रति बोरी 4 से 5 किलो की गडबडी होती है. नांदेड के अलावा दूसरे केंद्रो पर भी साधे कांटे से तुलाई होने की शिकायत किसानों ने की है.

सिहोरा परिसर में भीग रहा है धान

तुमसर तहसील में धान खरीदी केंद्र को हाल बद से बदतर है. यहां पर सुचारू रूप से धान खरीदी शुरू नहीं हो पायी है. किसान नेता कलाम शेख ने बताया कि सिहोरा के अलावा चुल्हाड, वाहनी, हरदोली, पिपरी, चुन्नी, करकापुर में धान खरीदी केंद्र पर किसानों द्वारा धान लाए 15 दिन से 1 महीने का समय बित चुका है, लेकिन अब तक कांटा नहीं हुआ है.

हमाल के अभाव में तुलाई नहीं

कलाम शेख ने बताया कि जब उन्होने जिला मार्केटिंग अधिकारी खरसे से बात की. लेकिन समाधानकारी जवाब नहीं मिला. धान खरीदी केंद्र संचालकों का दलील है कि हमाल नहीं मिलने की वजह से धान खरीदी शुरू नहीं हुई है.

नुकसान के लिए कौन जिम्मेदार

रिबीन काटकर फोटो खिंचाए. पर धान खरीदी शुरू नहीं हुई है. केंद्र शुरू नहीं होने की वजह से अब तक टोकन भी नहीं बंटे है. किसानों को धान खुले आकाश के निचे पडा हुआ है. बारीश में अगर धान खराब हो जाता है और सरकार धान नहीं खरीदती. ऐसे में किसानों को होनेवाले नुकसान को जिम्मेदार कौन होगा.

1400 रु. में व्यापारियों के पास

धान खरीदी व्यवस्था के ढेरों दोषों का परिणाम है कि किसान धान खरीदी केंद्र में जाने की बजाए व्यापारी को बेचने में अपनी भलाई समझता है. व्यापारियों द्वारा 1350 रु. से 1400 रु. में नकद देकर धान ख़रीदा जा रहा है. इसमें किसानों को तुरंत नकद तो मिल रही है. लेकिन 1100 रु. का नुकसान किसानों को उठाना पड रहा है.