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लाखांदूर. 1 दिन पहले निजी अस्पताल में इलाज कराकर घर लौटे युवा मरीज को स्वास्थ्य खराब होने के कारण अगले दिन ग्रामीण अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उपचार दौरान जब कोविड जांच की गई तो वह पॉजिटिव पाए जाने के साथ संबंधित युवक की मृत्यु हो गई. स्वास्थ्य प्रशासन ने परिवार को शव देने से इंकार करने के बावजूद भी परिजनों ने जबरदस्ती से शव को घर ले गए. लाखांदूर पुलिस को पता चला तो तहसीलदार व थानेदार मृतक के घर पहुंचे. 3 घंटे के बाद शव को प्रशासन के कब्जे में ले लिया. लाखांदूर तहसील के पाहुणगांव में घटी.

जानकारी के अनुसार पाहुणगांव निवासी 23 वर्षीय युवक को उसके परिवार की ओर से बीमार होने के कारण एक निजी चिकित्सक के पास ले जाया गया था. हालांकि अगले दिन उनकी हालत बिगड़ गई व उन्हें इलाज के लिए ग्रामीण अस्पताल में भर्ती कराया गया. यहां के चिकित्सा अधिकारियों ने भी तबीयत गंभीर रहने से कोविड का परीक्षण किया.

घटना की जानकारी लाखांदूर के थानेदार शिवा कदम व तहसीलदार प्रदीप शेवाले को मिलते ही वह तुरंत पुलिस प्रशासन के साथ मृतक के गांव पहुंचे. एवं शव को प्रशासन के कब्जें में देने की अपील की. हालांकि परिवार का विरोध कायम रहने का देख इस बारे में घटना की जानकारी जिला प्रशासन को देते हुए ज्यादा पुलिस बुलाई गई.

इस समय कानून व व्यवस्था बनाए रखते हुए, पुलिस प्रशासन 3 घंटे के बाद शवों को प्रशासन की हिरासत में ले जाने में सफल रहा. कार्य लाखांदूर के थानेदार शिवा कदम एवं तहसीलदार प्रदीप शेवाले के नेतृत्व में पुलिस उपनिरिक्षक संदीप ताराम, प्रमोद करसुंगे, पुलिस सिपाही राहुल गायधने, मुंडे, नितिन बोरकर, पुलिस नाईक दूर्योधन वकेकार, मनीष चव्हाण, संदीप रोकडे के अलावा अन्य पुलिस कर्मचारियों ने किया.