पिंगली वेंकैया, जिन्होंने दिया था भारत को तिरंगा

हमारे देश में तिरंगे का महत्व हर एक हिंदुस्तानी बखूबी जानता है. तिरंगा हमारी आन,बान,शान का प्रतीक है. इसका सम्मान करना हर एक भारतीय का धर्म और कर्तव्य है. भारतीय तिरंगे को पिंगली वेंकैया ड़िजाइन ने किया था, जिसका सुझाव राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने दिए था. वेंकैया का जन्म आज ही के दिन 2 अगस्त 1876, को वर्तमान आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम के निकट भटलापेनुमारु नामक स्थान पर हुआ था. वेंकैया को भूविज्ञान और कृषि क्षेत्र में बहुत रुचि थी. वह हीरे की खदानों के विशेषज्ञ भी थे. मात्र 19 वर्ष की आयु में ही पिंगली वेंकैया ब्रिटिश आर्मी से जुड़ गए और अफ्रीका में एंग्लो-बोएर जंग में उन्होंने हिस्सा लिया. इस दौरान वह महात्मा गांधी से मिले. जिसके बाद वेंकैया बापू के विचारधारा से काफी प्रभावित हुए और हमेशा के लिए भारत लौट आए, एवंम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में सहायक बने.

कैसे हुई राष्ट्रीय ध्वज की रचना?

सन 1916 में काकीनाड़ा में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस की मीटिंग में वेंकैया ने भारत का  राष्ट्रीय ध्वज होने की आवश्यकता का जोर दिया. उनका यह विचार गांधी जी को बहुत पसंद आया और उन्होंने वेंकैया को राष्ट्रीय ध्वज की डिज़ाइन तैयार करने का आग्रह किया. और सभी से उनका साथ देने का सुझाव दिया. जिसके बाद वेंकैया को एस.बी. बोमान जी और उमर सोमानी जी का साथ मिला और इन तीनों ने मिल कर नेशनल फ्लैग मिशन की स्थापना की.

 गांधी जी के सलाह के बाद भारतीय ध्वज के बीच में अशोक चक्र रखने की सलाह दी गई. जो कि संपूर्ण भारत को एक सूत्र में बांधने का संकेत दर्शता है.

भारतीय राष्ट्रीय ध्वज बनाने से पहले पिंगली वैंकया ने पांच सालों तक 30 अलग अलग देशों के राष्ट्रीय ध्वजों पर रिसर्च किया और फिर तिरंगे के लिए लाल और हरा रंग तय किया. जिसके बाद 1921 में विजयवाड़ा में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की मीटिंग में वैंकया महात्मा गांधी से मिले और उन्हें  लाल व हरे रंग से बनाया हुआ झंडा दिखाया. लेकिन उस समय इस झंडे को कांग्रेस की ओर से अधिकारिक तौर पर स्वीकृति नहीं मिली.

साल 1921 में पिंगाली ने एक बार फिर केसरिया और हरा झंडा सामने रखा था. जिसके बाद जालंधर के लाला हंसराज ने इसमें चर्खा जोड़ा और गांधीजी ने सफेद पट्टी जोड़ने का सुझाव दिया. भारतीय संविधान सभा की बैठक के दौरान 22 जुलाई 1947 को भारतीय राष्‍ट्रीय ध्‍वज तिरंगे को वर्तमान स्‍वरूप में अपनाया गया.

राष्ट्रीय ध्वज बनाने के बाद पिंगली वेंकैय्या को लोग  “झंडा वेंकैय्या”  के नाम से संबोधीत करने लगे. 4 जुलाई, 1963 को पिंगली वेंकैय्या का निधन हो गया.

-मृणाल पाठक