भारत के बंटवारे को पूरे हुए 74 साल, टीस अब भी बरकरार

    -वैष्णवी वंजारी 

    आज ही के दिन 3 जून को भारत का बंटवारा हुआ था। यह दिन भारत के इतिहास तथा भूगोल को बदलने वाला महत्वपूर्ण दिन था। वर्ष 1947 में ब्रिटिश राज में भारत के अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने देश के बंटवारे का ऐलान किया था। आज बंटवारे के इस घटना को 74 साल हो गए हैं। देश की इस घटना को ‘3 जून योजना’ या ‘माउंटबेटन योजना’ के तौर पर जाना जाता है। 

    जाने क्यों हुआ था बंटवारा 

    देश में दंगे हो रहे थे, उसी वक्त सत्ता में रही कांग्रेस सरकार से हालात काबू के बाहर हो गए थे, क्योंकि कानून एवं व्यवस्था का मामला प्रांतों के पास था। लिहाजा, राजनीतिक और सांप्रदायिक गतिरोध को खत्म करने के लिए ‘तीन जून योजना’ आई जिसमें भारत के विभाजन और भारत तथा पाकिस्तान को सत्ता के हस्तांतरण का विवरण था।

    क्या थी बंटवारे की प्रक्रिया 

    भारत विभाजन के ढांचे को ‘3 जून प्लान’ या ‘माउंटबेटन योजना’  का नाम दिया गया। भारत और पाकिस्तान के बीच की सीमा रेखा लंदन  के वकील सर सिरिल रैडक्लिफ ने तय की। हिन्दू बहुमत वाले इलाके भारत में और मुस्लिम बहुमत वाले इलाके पाकिस्तान में शामिल किए गए।18 जुलाई 1947 को ब्रिटिश संसद ने भारतीय स्वतंत्रता नियम  पारित किया जिसमें विभाजन की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया गया। इस समय ब्रिटिश भारत में बहुत से राज्य थे जिनके राजाओं के साथ ब्रिटिश सरकार ने तरह-तरह के समझौते कर रखे थे। 

    इन 565 राज्यों को आजादी दी गई कि वे चुनें कि वे भारत या पाकिस्तान किस में शामिल होना चाहेंगे। अधिकतर राज्यों ने बहुमत धर्म के आधार पर देश चुना। जिन राज्यों के शासकों ने बहुमत धर्म के अनुकूल देश चुना उनके एकीकरण में काफी विवाद हुआ। भारत के विभाजन के बाद  पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र  में नए सदस्य के रूप में शामिल किया गया और भारत ने ब्रिटिश भारत की कुर्सी संभाली।