भारतीय सशस्त्र बलों से पराजित होकर पाक सेनाओं ने टेके थे घुटने

3 दिसंबर, 1971 को शुरू हुआ एक युद्ध (War) 13 दिनों तक चला था। जो 16 दिसंबर को आधिकारिक (Officially) रूप से खत्म हुआ था। उस दिन को ‘विजय दिवस’ (Victory Day) कहा जाता है। क्यूंकि इस युद्ध में पाकिस्तान (Pakistan) ने भारतीय सशस्त्र बलों (Indian Armed Forces) के सामने अपने घुटने तक दिए थे। पाकिस्तानी सेना (Pakistan’s army) के प्रमुख जनरल ‘एए खान नियाज़ी’ (A.A Khan Niyazi) ने 93,000 सैनिकों के साथ भारतीय सेना और बांग्लादेश (Bangladesh) के मुक्ति बहानी के सामने हार मान आत्मसमर्पण कर दिया था। इसलिए यह दिन विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। राष्ट्र 16 दिसंबर को सैनिकों को श्रद्धांजलि (Tribute) देता है, जिन्होंने अपने देश की रक्षा करते हुए अपने जीवन का बलिदान दिया था।

प्रधानमंत्री ने की भारतीय सेना की प्रशंसा-

साल 2019 में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ट्वीट में कहा था, “मैं विजय दिवस पर भारतीय सैनिकों की वीरता, साहस और वीरता को सलाम करता हूं। 1971 में इस दिन हमारे सशस्त्र बलों द्वारा जो इतिहास बनाया गया था, वह हमेशा सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा।”

क्या हुआ था वर्ष 1971 में? 

  • साल 1971 से पहले, बांग्लादेश पाकिस्तान का ही एक हिस्सा था, जिसे ‘पूर्वी पाकिस्तान’ कहा जाता था।
  • कई रिपोर्ट्स में ऐसा दावा किया जा रहा था कि पाकिस्तानी सेना ‘पूर्वी पाकिस्तान’ के लोगों को पीट रही थी, उनका शोषण कर रही थी, यहाँ तक कि वहां की महिलाओं का बलात्कार और हत्या भी कर रही थी।
  • भारत ने ‘पूर्वी पाकिस्तान’ में पाकिस्तान के उत्पीड़न के खिलाफ बांग्लादेश का समर्थन किया।
  • ‘पूर्वी पाकिस्तान’ में पाकिस्तान के सैन्य शासक जनरल अयूब खान के खिलाफ भारी असंतोष था।
  • जिसके बाद 3 दिसंबर, 1971 को भारत सरकार ने भारतीय सेना को ‘पूर्वी पाकिस्तान’ के लोगों को बचाने के लिए पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध की घोषणा करने का आदेश दिया।
  • यह युद्ध फील्ड मार्शल मानेकशॉ के नेतृत्व में लड़ा गया था। इस युद्ध के दौरान भारत के 1400 से अधिक सैनिक शहीद हुए थे।
  • अंत में 16 दिसंबर 1971 को, लगभग 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने ढाका में भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण किया।