एक पारी में 10 विकेट लेने वाले इस भारतीय खिलाड़ी पर लगा था घिनौना आरोप, निकाले जाने के बाद भाई ने ली जगह

क्रिकेट एक ‘जैंटलमैंस’ खेल माना जाता है। जिसकी लगभग पूरी दुनिया दीवानी है। यह गेम ऐसा है जिसकी तरफ सब लोग बड़ी आसानी से आकर्षित हो जाते हैं। वहीं अगर सबसे बेहतरीन स्पिनर की बात होती है तो शेन वॉर्न (Shane Warne) का नाम सबसे पहले लिया जाता है। लेकिन उन्हें श्रीलंकाई दिग्गज मुथैया मुरलीधरन (Muttiah Muralitharan) कड़ी टक्कर देते हैं। फिर भी शेन की पोज़िशन कोई नहीं ले पाता है। 

ऐसे में अगर कोई कहे कि उनसे भी बेहतर लेग स्पिनर कोई और था, तो सबको हैरानी ज़रूर होगी और उसके बारे में जानने की उत्सुकता बढ़ जाएगी। जिस लेग स्पिनर की बात हम कर रहे हैं वह एक भारतीय हैं। जिन्होंने अपनी एक पारी में 10 विकेट लेकर सबको शॉक में डाल दिया था। उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम के लिए अपनी कलाई का जादू दिखाया था, उनका नाम है सुभाष गुप्ते (Subhash Gupte)। 

शेन वॉर्न से भी शानदार थे गुप्ते-
वर्ष 2006 में वेस्टइंडीज के महान ऑलराउंडर गैरी सोबर्स ने कहा था कि, वह हमेशा वॉर्न के मुकाबले सुभाष गुप्ते को बेहतर लेग स्पिनर मानते हैं। गुप्ते को लेकर सोबर्स ने कहा था कि भले ही वॉर्न गेंद को ज़्यादा टर्न करा सकते हैं। साथ ही शानदार तरीके से अटैक भी करते हैं, जो एक लेग स्पिनर में होना भी चाहिए। लेकिन फिर भी उनकी नज़र में सुभाष गुप्ते हमेशा उनसे बेहतर लेग स्पिनर रहेंगे।

हर मैच में मचाते थे तहलका-

साल 1951 में 22 साल की उम्र में इंग्लैंड के खिलाफ भारत के लिए डेब्यू करने वाले सुभाष गुप्ते ने अपनी एक अच्छी-खासी जगह बना ली थी। वह एक बेहतरीन स्पिनर कहे जाने लगे थे। अपने डेब्यू के महज एक साल बाद ही गुप्ते ने वेस्टइंडीज दौरे पर ऐसा कारनामा किया था, जिससे सब बेहद खुश हुए थे। 

उस दौरे पर सुभाष ने टेस्ट मैच से लेकर अभ्यास मैच, साथ ही अन्य मैचों में 50 विकेट लिए थे। जिनमें से 27 विकेट तो गुप्ते ने 5 टेस्ट मैचों में ही ले लिए थे। इस प्रदर्शन के बाद से गुप्ते की खास पहचान बन गई थी। गुप्ते ने अपना करियर साल 1951 में शुरू किया था और 10 साल तक भारतीय टीम के लिए क्रिकेट खेले थे। 

सुभाष गुप्ते ने अपने 10 साल के करियर में 36 टेस्ट मैच खेले। इसमें गुप्ते ने 29.5 की औसत से 149 विकेट हासिल किए। इसके अलावा 115 फर्स्ट क्लास मैचों में ये रिकॉर्ड और भी शानदार हो जाता है। इसमें उन्होंने सिर्फ 23.71 की औसत से 530 विकेट ले डाले थे। वहीं चाहे कोई भी टीम हो जैसे पाकिस्तान हो या न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया हो या इंग्लैंड। कोई भी टीम गुप्ते के समाने टिक नहीं पाती थी, सब बैट्समैन बेबस नज़र आते थे। अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में गुप्ते ने इन्हीं 5 टीमों के खिलाफ क्रिकेट खेला और सबके खिलाफ बेहतरीन प्रदर्शन किया।

एक मैच में लिए थे 10 विकेट-

सुभाष गुप्ते एक ऐसे गेंदबाज़ थे जो बखूबी विकेट लेना जानते थे। उन्होंने एक फर्स्ट क्लास मैच की एक पारी में सभी 10 विकेट हासिल किए थे। वर्ष 1954-55 में गुप्ते ने बॉम्बे की तरह से खेलते हुए यह अजूबा कर दिखाया था। तब उन्होंने पाकिस्तान कम्बाइन्ड सर्विसेज एंड बहावलपुर इलेवन के खिलाफ 78 रन देकर 10 विकेट झटक लिए थे। वह यहीं नहीं रुके उन्होंने 4 साल बाद एक बार फिर यही करिश्मा टेस्ट मैच में भी दोहराने वाले थे। वह वेस्टइंडीज के खिलाफ 1958 को एक टेस्ट में 9 विकेट ले चुके थे। गुप्ते 10वां विकेट भी हासिल कर सकते थे, लेकिन विकेटकीपर ने लांस गिब्स का कैच टपका दिया था। 

एक झूठे आरोप ने खत्म कर दिया करियर-
साल 1961 में 32 साल की उम्र में सुभाष गुप्ते का अंतरराष्ट्रीय करियर खत्म हो गया था। इसका कारण एक बेहद ही शर्मनाक आरोप था, जिसने उनका पूरा करियर खत्म कर दिया था। भारत और इंग्लैंड के बीच दिल्ली में टेस्ट मैच के दौरान भारतीय टीम जिस होटल में ठहरी थी, उसमें गुप्ते के साथ टीम के ही साथी एजी कृपाल सिंह (AG Kripal Singh) उनके रूममेट थे। इस दौरान होटल की महिला रिसेप्शनिस्ट ने भारतीय टीम के मैनेजर से शिकायत की, कि कृपाल सिंह ने उन्हें अपने कमरे में बुलाकर छेड़खानी करने की कोशिश की है। इसके बाद गुप्ते पर भी यह आरोप लगा था, जोकि बिलकुल गलत था, लेकिन उनकी किसी ने एक न सुनी। 

उन पर लगे इस आरोप के बाद, उनकी और कृपाल की BCCI अध्यक्ष एमए चिदंबरम के सामने पेशी हुई। जिसके बाद गुप्ते ने साफ कहा था कि उन्होंने किसी भी तरह का कोई भी गलत काम नहीं किया है। लेकिन बोर्ड अध्यक्ष ने उनसे उल्टा सवाल किया कि उन्होंने कृपाल को क्यों नहीं रोका? इसका जवाब देते हुए गुप्ते ने कहा कि कृपाल इतना बड़ा है कि वह उसे नहीं रोक सकते थे। दिल्ली में खेले गए उस टेस्ट के बाद गुप्ते को फिर कभी भी भारतीय टीम में जगह नहीं मिली। जिसके बाद उनका क्रिकेट करियर खत्म हो गया और वह भारत को छोड़ त्रिनिदाद में बस गए। 

टीम में भाई ने ही ली जगह, लेकिन वो बात नहीं आई नज़र-
सुभाष गुप्ते को जब टीम से निकल दिया गया तो भारत को एक लेग स्पिनर की ज़रूरत थी। टीम की इस ज़रूरत को पूरा किया गुप्ते के बालू गुप्ते (Baloo Gupte) ने। बालू गुप्ते भी एक लेग स्पिनर ही थे। सुभाष के हटने के बाद बालू को टीम में उनकी जगह मिल गई। सुभाष का भाई होते हुए भी बालू की कलाई में वह बात नहीं थी जो सुभाष में थी। यही कारण रहा कि वह सिर्फ 3 टेस्ट मैच खेल पाए, जिसमें उन्हें सिर्फ 3 विकेट मिले। 

इन सबके बाद 31 मई, 2002 में भारत के शानदार खिलाड़ी सुभाष गुप्ते का त्रिनिदाद में निधन हो गया था।