कब और क्यों मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस?

प्रत्येक वर्ष पूरे विश्व में 17 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस (International Day for the Eradication of Poverty) मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा 22 दिसम्बर 1992 को 17 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस मनाये जाने की घोषणा की गयी थी। इस दिवस पर विभिन्न राष्ट्रों द्वारा गरीबी उन्मूलन के लिए प्रयास, विकास एवं विभिन्न कार्य व योजनाओं को शुरू किया जाता है। वर्ष 2020 में अंतरराष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस की थीम है, ‘सभी के लिए पर्यावरण एवं सामाजिक न्याय।’

सन 1987 में पहली बार यह दिवस फ्रांस में मनाया गया जिसमें, लगभग एक लाख लोगों ने मानव अधिकारों (Human Rights) के लिए प्रदर्शन किया था। यह आंदोलन एटीडी फोर्थ वर्ल्ड के संस्थापक जोसफ व्रेंसिकी द्वारा आरंभ किया गया था। इसके अतिरिक्त गरीबी से लड़ाई सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों (एमडीजी) और नए सतत विकास लक्ष्यों के विकास के मूल में निहित हैं।

अंतरराष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस का उद्देश्य
इस दिन का उद्देश्य (Objective) विश्व समुदाय में गरीबी दूर करने के लिए किये जा रहे प्रयासों के संबंध में जागरूकता बढ़ाना है। इस दिवस पर विभिन्न राष्ट्रों द्वारा गरीबी उन्मूलन के प्रयास, विकास एवं विभिन्न कार्यों व योजनाओं को जारी किया जाता है।

भारत में गरीबी का मुख्य कारण
भारत देश में अधिक गरीबी का मुख्य कारण बढ़ती जनसंख्या, कमजोर कृषि, भ्रष्टाचार, रूढ़िवादी सोच, जातिवाद, अमीर गरीब में ऊंच-नीच, नौकरी की कमी, अशिक्षा, बीमारी इत्यादि है. भारत एक कृषि प्रधान देश है. इसकी एक बड़ी जनसंख्या कृषि पर निर्भर है. खराब कृषि संसाधन और बेरोजगारी के कारण से लोगों को भोजन की कमी से जूझना पड़ता है. यही वजह है कि महंगाई ने भी पंख फैला रखे हैं. साथ ही भारत में गरीबी का एक प्रमुख कारण बढ़ती जनसंख्या भी है.

भारत में गरीबी दर
केंद्र सरकार ने 2012 में बताया कि भारत में 21.9 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा से नीचे रहती है।

विश्व बैंक की 2011 रिपोर्ट में कहा गया कि भारत की 23.6 प्रतिशत जनसंख्या (लगभग 276 मिलियन) की प्रतिदिन क्रय शक्ति 1।25 डॉलर प्रतिदिन है।

इसके अतिरिक्त 2016 में जारी अंतरराष्ट्रीय भुखमरी सूचकांक में भारत को 97वां स्थान मिला है। इसमें विकासशील देशों के लिए औसत दर 21.3 रखी गयी थी जबकि भारत की यह दर 28.5 प्रतिशत थी।