खुले में शौच मुक्त व्यवहार, बीमारी से दूर परिवार

आज यानी 19 नवंबर को विश्व शौचालय दिवस है। इस दिन लोगों को टॉयलेट की ज़रूरत को लेकर जागरूक किया जाता है। यह एक वार्षिक कार्यक्रम है। यह दिवस स्वच्छता के महत्त्व और सभी के लिए सुरक्षित और स्वच्छ शौचालयों की पहुंच की सिफ़ारिश करता है। संरा के अनुसार दुनिया की तकरीबन ढाई अरब आबादी को आज भी ठीक से शौचायल उपलब्ध नहीं है और वे लोग गंदगी में ही शौचालय जाने के लिए मजबूर हैं।

इतिहास

शौचालय दिवस की शुरुआत 2001 में विश्व शौचालय संगठन द्वारा किया गया था। विश्व शौचालय संगठन के निर्माता जैक सिम और सिंगापुर के रेस्ट्रूम एसोसिएशन को शौचालय की ज़रूरत महसूस हुई और इस मुद्दे पर एक अंतरराष्ट्रीय दिन होना चाहिए और इसलिए वे विश्व शौचालय दिवस बनाने के विचार के साथ आगे बढ़े ताकि यह दुनिया भर के लोगों के लिए स्वच्छता के मुद्दों की याद दिलाता रहे।

वहीं विश्व शौचालय दिवस की स्थापना के बाद दुनिया भर में इसको लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए कई समूह, सरकार और व्यवसायों ने अपनी महत्वपूर्ण निभाई है। इस दिन ने कई पाबंदियों को भी तोड़ा है जो शौचालय के विषय पर चर्चा करने और सुरक्षित और बेहतर समाधान बनाने के लिए हैं।

क्यों मनाया जाता है?

विश्व शौचालय दिवस पर कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इस दिन स्वच्छता मुद्दों के प्रति जनता को जागरूक किया जाता है और मुद्दों को हल करने का प्रयास करता है। हालांकि पर्याप्त स्वच्छता तक पहुंच को मानव अधिकार के रूप में घोषित किया गया है लेकिन दुनिया में हर तीन लोगों में से एक के पास शौचालय को लेकर कोई भी स्पष्ट दृष्टिकोण नहीं है। इसके अलावा लोगों को यह भी बताया जाता है कि अशुद्ध शौचालय होने की वजह से कई बीमारियां भी होती है। जैसे टाइफाइड, हैजा, डायरिया और हेपेटाइटिस जैसी कई बीमारियां शामिल हैं।  

विश्व शौचालय दिवस का उद्देश्य सभी व्यक्ति को अपनी प्राथमिक जरूरतों का ख्याल रखने के लिए सुरक्षा के डर के बिना अनुमति देना है।जैक सिम, विश्व शौचालय संगठन के संस्थापक के मुताबिक, “जिसके बारे में हम चर्चा नहीं कर सकते उसका हम सुधार नहीं कर सकते”। यह दिवस इस बात को सुनिश्चित करता है कि सभी की सुरक्षित शौचालय और स्वच्छता तक पहुंच होनी चाहिए। 

थीम 

इस वर्ष विश्व शौचालय दिवस 2020 में स्थायी स्वच्छता और जलवायु परिवर्तन पर केंद्रित है।

भारत

शौचालय में 60% से अधिक जनसंख्या के पास अभी भी स्वच्छता तक पहुंच की कमी है। यह एक महत्वपूर्ण दिन है क्योंकि यह देश में एक महत्वपूर्ण मुद्दा है खासकर बच्चों और महिलाओं के लिए। यह समारोह देश की राजधानी में मनाया जाता है खासकर दिल्ली में शौचालय संग्रहालय में। वर्ष 2014 में दुनिया में पहली बार दिल्ली में 18 से 20 नवंबर तक अंतरराष्ट्रीय टॉयलेट महोत्सव के रूप में एक लंबा और अद्वितीय तीन दिन का जश्न मनाया गया था। इस दिन भारत में सामाजिक सेवा संगठन भी सुलभ इंटरनेशनल शौचालय के मुद्दे पर लोगों जागरूक करने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित करता है।