धार्मिक स्थलों पर भक्तों का जनसैलाब

मोताला. मोताला तहसील में प्रसिद्ध तथा प्राचीन शिवालयों में दूर-दूर से भक्त दर्शन के लिए हाजरी लगाते हैं. शिवालय परिसर में फैला प्राकृतिक मंजर भक्तों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है. इसके चलते तहसील में

मोताला. मोताला तहसील में प्रसिद्ध तथा प्राचीन शिवालयों में दूर-दूर से भक्त दर्शन के लिए हाजरी लगाते हैं. शिवालय परिसर में फैला प्राकृतिक मंजर भक्तों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है. इसके चलते तहसील में स्थित प्राचीन शिवालयों में इन दिनों भक्तों का तांता नजर आ रहा है. मोताला तहसील मुख्यालय से 13 किलोमीटर दूरी पर राजुर घाट के निसर्ग परिसर में बुलढाणा-मलकापुर महामार्ग पर मोहेगांव से एक किलोमीटर दूरी पर जागृत प्राचीन रामेश्वर शिवमंदिर है. 1950 से 1955 इस काल में इस मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया. यह स्थान बहुत प्राचीन है और मंदिर का पुनर्निर्माण तेरहवीं शताब्दी में किया गया है. मंदिर में शिवलिंग 12 फीट नीचे है, जिसका दर्शन लिया जाता हैं. अजिंठा पर्वत से निकली दो नदियों के संगम पर यह मंदिर बसा है. मंदिर परिसर में पहाड़ियों की वादी होने से भक्तों को पर्यटन का आनंद भी मिल रहा है.

तहसील मुख्यालय से 9 किलोमीटर दूरी पर स्थित ग्राम रोहिणखेड़ के समीप ही नलगंगा नदी के तट पर प्राचीन कोलेश्वर महादेव मंदिर है. इस मंदिर को प्राचीन इतिहास के साथ ही एक जागृत देवस्थान के नाम से जाना जाता है. भव्य सभा मंडप मंदिर में महादेव की बड़ी पिंड के साथ ही मंदिर के आंगन में बड़ी मूर्ति है. श्रावण मास के चलते इस धार्मिक स्थल पर भक्तों का यहाँ दर्शन के लिए तांता नजर आता है. तहसील के ग्राम कोथली में विश्वगंगा नदी के किनारे महादेव मंदिर का श्रेष्ठ नमूना है. वास्तुशिल्पकार हेमांद्री पंडित द्वारा तेरहवें दशक में इस मंदिर का निर्माण किया गया है. श्रवण मास पर मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों का सैलाब नजर आता है. इस स्थल से कुछ ही दूरी पर ग्राम बोरखेड़ा में प्राकृतिक मंजर के बीच सद्गुरु मधुशंकर महाराज का मठ है. शिव मंदिर में एक हजार आठ शिवलिंगों की स्थापना की गई हैं. पूरे भारत में इस तरह के शिवलिंग इतनी बड़ी संख्या में मंदिरों में न होने की बात भक्तों द्वारा कही जाती है. महादेव मंदिर परिसर की पहाड़ियों की वादी एवं प्राकृतिक मंजर भी भक्तों का मन जीत लेती है. श्रावण महीने में भक्त इस मंदिर पर हाजरी लगते है. प्राकृतिक वातावरण की सैर करते हैं. परिसर की पहाड़ियों की वादी को अपने मोबाइल में कैद भी करते है. कोथली से मात्र 10 किलोमीटर के फासले पर श्रीक्षेत्र कमलनाथ में महादेव मंदिर है. पुराने काल में कमलनाथ नाम के सिध्द पुरुष संत इस स्थल पर आए थे. उसी समय मंदिर निर्माण किए जाने की जानकारी है. श्रावण माह में हर सोमवार को भक्त अपनी मनोकामना लेकर आते है.

दर्शन के साथ पर्यटन का आनंद

तहसील में कई धार्मिक स्थलों के परिसर में प्रकृति मंजर दिखाई देता है. इस तरह तहसीलभर में बहुत सारे शिव मंदिर प्रकृति के मंजर में समाए हुए हैं. इसी तरह पहाड़ियों की वादी में बसे मंदिर को देखकर भक्तों की आंखें निखर जाती है. श्रावण मास के चलते मंदिरों में भक्तों का जनसैलाब नजर आ रहा है. भक्त दर्शन के साथ ही पर्यटन का आनंद भी ले रहे हैं.