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चिखली. समूचा देश बलात्कार जैसी घटनाओं की वजह से सदमे में हैं. कई बड़ी घटनाओं की सुनवाई कोर्ट में चल रही है, जिस पर पूरे देश की नजर लगी हुई है. उसी तरह चिखली शहर में 26 अप्रैल 2019 के दिन एक 9 वर्षीय

चिखली. समूचा देश बलात्कार जैसी घटनाओं की वजह से सदमे में हैं. कई बड़ी घटनाओं की सुनवाई कोर्ट में चल रही है, जिस पर पूरे देश की नजर लगी हुई है. उसी तरह चिखली शहर में 26 अप्रैल 2019 के दिन एक 9 वर्षीय मासूम के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म मामले में लोगों की निगाहें कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई है, किंतु फैसला जल्द न आने की वजह से लोगों में खासी नाराजगी भी दिखाई दे रही है. आम जन का कहना है कि, ऐसे गंभीर मामलों में जिस तरह पुलिस को मर्यादित साठ दिन के भीतर अपनी जांच पूरी कर चार्जशीट देना होती है उसी तरह ऐसे गंभीर मामलों की सुनवाई के लिए भी एक निर्धारित समय होना चाहिए. न्याय व्यवस्था किसी को सजा देते समय निष्पक्ष जांच कर ही अपना फैसला सुनाती है, मगर ऐसी घृणास्पद घटनाओं को अंजाम देने के लिए सरकार ने निर्धारित समय में फैसला सुनाने का प्रावधान करना अधिक आवश्यक हो गया है.

शहर में हुए इस सामुहिक दुष्कर्म प्रकरण में मुख्य दो युवकों पर आरोप लगे हुए है.

जल्द हो सुनवाई: पालवे

सेवा संकल्प प्रकल्प की संस्थापिका आरती पालवे ने कहा कि चिखली में हुए मासूम के बलात्कार के संदर्भ में न्याय यह जल्द गति से व पारदर्शकता से होना चाहिए.

फांसी की सजा दो: व्यास

चिखली के राजेन्द्र व्यास ने कहा कि न्यायालय द्वारा इस प्रकरण में अमानवीय कृत्य करनेवाले आरोपियों को न्यायालय द्वारा फांसी की सजा दी जाए.

दुष्कर्म की घटना निंदनीय: बडगे

एड. नीता बडगे ने कहा कि चिखली शहर में घटित दुष्कर्म की घटना निंदनीय है. सभी ने इसे गंभीरता से लिया है. न्यायिक प्रक्रिया धीमी गति से चल रही है. इस मामले को जलद गति न्यायालय में चलाकर दोषियों को शीघ्र सजा मिलनी चाहिए.