ग्रंथालय कर्मियों व आंगनवाड़ी सेविकाओं ने किया आंदोलन

बुलढाना.सार्वजनिक ग्रंथालयों में काम करने वाले कर्मचारी तथा आंगनवाड़ी सेविकाओं सहित विभिन्न क्षेत्र में काम करने वाले असंगठित कामगारों ने जिलाधकारी कार्यालय पर धरना प्रदर्शन किया. तत्पश्चात

बुलढाना. सार्वजनिक ग्रंथालयों में काम करने वाले कर्मचारी तथा आंगनवाड़ी सेविकाओं सहित विभिन्न क्षेत्र में काम करने वाले असंगठित कामगारों ने जिलाधकारी कार्यालय पर धरना प्रदर्शन किया. तत्पश्चात जिला प्रशासन को मांगों का ज्ञापन सौंपा गया.

सार्वजनिक ग्रंथालय कर्मचारी तथा सेंटर आफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स के बैनर तले काम करने वाली आंगनवाड़ी कर्मचारी और आशा वर्कर बड़ी संख्या में जिलाधिकारी कार्यालय पर पहुंचे. जिलाधिकारी कार्यालय के गेट पर जोरदार नारेबाजी कर सभी आंदोलनकर्ताओं ने धरना दिया. तत्पश्चात निवासी उपजिलाधिकारी ललितकुमार वराडे को ज्ञापन सौंपा गया.

प्रलम्बित है विभिन्न मांगें
ज्ञापन में कहा गया है कि, 1967 में राज्य में सार्वजनिक ग्रंथालय कानून पारित किया गया था. तभी से पूरे राज्य में आज हजारों ग्रंथालय कर्मी काम कर रहे हैं. लेकिन इतने वर्षों के बाद भी ग्रंथालय कर्मचारियों की मांगों पर आज तक सरकारों ने संज्ञान नहीं लिया. ग्रंथालय कर्मियों की मांगों पर गौर करने के लिए आज तक वि•भिन्न तरह की समितियां बनाई गई, लेकिन इनकी सिफारिशों पर आज तक अमल नहीं किया गया. आज भी राज्य के हजारो ग्रंथालय कर्मचारी काफी कम मानधन पर काम कर रहे हैं. सरकार व्दारा ग्रंथालयों का अनुदान बढ़ाया नहीं जा रहा है. ग्रंथालय कर्मियों को छह-छह माह तक वेतन भी नहीं मिलता. महिला कर्मियों को प्रसूति का अवकाश नहीं दिया जाता. ग्रंथालय कर्मियों को किसी भी प्रकार की सामाजिक सुरक्षा नहीं है. साथ ही बीमा, भविष्य निर्वाह निधि की सुविधा कर्मचारियों को नहीं दी जाती. इन सभी मांगों को पूरा करने के लिए यह आंदोलन किया गया.

आंदोलन में ग्रंथालय कर्मचारी संगठन के राज्य अध्यक्ष पंजाबराव गायकवाड, नेमीनाथ सातपुते, गणेश तायडे, जिलाध्यक्ष सुनील वायाल, जिला सचिव निशिकांत ढवले, लक्ष्मण तुपकर, जगन्नाथ जाधव, सरेश कायंदे, सचिन बल्लाल समेत बड़ी संख्या में ग्रंथालय कर्मचारी शामिल हुए.

सीटू के कामगारों का आंदोलन
सेंटर आफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (सीटू) के तहत काम करने वाले असंगठित कामगारों ने भी जिलाधिकारी कार्यालय पर धरना प्रदर्शन किया. तत्पश्चात जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया. ज्ञापन में कहा गया है कि केंद्र व राज्य सरकार कामगारविरोधी नीतियों पर काम कर रही है, जिससे निजीकरण और ठेकाकरण को बढ़ावा मिल रहा है. आंदोलन में आंगनवाड़ी कर्मचारी संगठन, आशा वर्कर्स तथा गुटप्रवर्तक संगठन के पदाधिकारी शामिल हुए.