बैंकिंग फ्रॉड का नया तरीका, ग्राहक सावधान

  • बिना OTP पेटीएम के जरिए 11 ट्रांजेक्शन 
  • पेटीएम बनता धोखाधड़ी का आसान माध्यम 

मुंबई. बैंक ग्राहकों से ऑनलाइन धोखाधड़ी करने वाले धोखेबाज नए-नए तरीके इजाद कर रहे हैं और इस नए तरीके में भी चाइनीज निवेश वाला पेटीएम एप ही फिर से धोखेबाजी का माध्यम बना है. यह धोखाधड़ी निजी क्षेत्र के यस बैंक के एक ग्राहक के साथ हुई है, जिसमें ग्राहक के सैलरी खाते से किसी शातिर अपराधी ने पेटीएम एप के जरिए बड़ी सफाई से एक नहीं, बल्कि पूरे 11 ट्रांजेक्शन कर 42,360 रुपए उड़ा लिए. 

गौरतलब है कि इससे पहले भी पेटीएम एप के जरिए अलग-अलग बैंकों के कई ग्राहकों के साथ पैसे ट्रांसफर कर धोखाधड़ी करने की घटनाएं हो चुकी हैं. क्या चाइनीज निवेश वाला पेटीएम एप धोखेबाजों का पंसदीदा एप बन रहा है?    

बैंक अज्ञात धोखेबाज का पता लगाने में विफल

इस धोखाधड़ी में बैंक के ग्राहक को ना तो एक भी OTP मैसेज आया. और ना ही ग्राहक ने कभी पेटीएम एप डाउनलोड उसका उपयोग किया. यही नहीं ग्राहक ने कभी इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल भी नहीं किया है. फिर भी उसके खाते से ऑनलाइन फ्रॉड हो गया. इस तरह यह बैंकिंग धोखाधड़ी का बिल्कुल नया मामला है. इस धोखाधड़ी की जानकारी भी पहले यस बैंक की फ्रॉड निगरानी टीम को ही हुई, ग्राहक को इस फ्रॉड की सूचना बैंक ने ही दी. तब ग्राहक को पता चला, लेकिन अब बैंक अज्ञात धोखेबाज का पता लगाने में विफल हो गया है तो यस बैंक उल्टे ग्राहक पर ही लापरवाही का दोष लगा कर मामले से पल्ला झाड़ रहा है. 

क्या है पूरा मामला? 

मुंबई की एक निजी कम्पनी में कार्यरत एक वरिष्ठ अधिकारी शहाब शेख को 16 जुलाई को देर रात 3 बजे अचानक यस बैंक से फोन आता है. फोन करने वाला बैंक कर्मी कहता है कि क्या आपने पेटीएम के जरिए बैंक खाते से 3 बार पैसा ट्रांसफर किया है? यह सुनकर शहाब शेख की नींद उड़ जाती है, वे घबराए हुए कहते हैं कि नहीं. मेरा न तो पेटीएम अकाउंट है और ना ही मेरे पास इंटरनेट बैंकिंग सुविधा है. तो फिर बैंक खाते से पेटीएम में पैसा ट्रांसफर कैसे हो सकता है? और मुझे तो कोई मैसेज भी नहीं आया है. इस पर बैंक कर्मी जवाब देता है कि लगता है आपके साथ फ्रॉड हुआ है. इसलिए हम तुरंत आपका डेबिट कार्ड ब्लॉक कर रहे हैं. तब शेख ने कहा कि मेरे डेबिट कार्ड के साथ धोखेबाज का पेटीएम अकाउंट भी तो ब्लॉक कराओ, नहीं तो धोखेबाज पैसा निकाल लेगा. इस पर बैंक कर्मी ने कहा कि हम कार्रवाई कर रहे हैं, आप सुबह ब्रांच में आ जाइए.

बैंक की इंटरनेट सुरक्षा प्रणाली पर उठा सवाल

सुबह जब शेख ब्रांच पहुंचे और खाते को चैक किया तो पता चला कि यह फॉड तो पिछले 6 दिनों से हो रहा है और अब तक धोखेबाज 8 ट्रांजेक्शन और कर चुका है.  उनके खाते से 11 जुलाई से 16 जुलाई तक 11 बार पेटीएम के खाते में कुल 42,368 रुपए ट्रांसफर किए गए. 11 ट्रांजेक्शन और कोई मैसेज नहीं. अर्थात कुल 11 बार फ्रॉड ट्रांजेक्शन होने के बाद बैंक की निगरानी टीम को धोखाधड़ी का पता चला. इससे बैंक की इंटरनेट सुरक्षा प्रणाली पर भी सवाल खड़ा हो गया है. शेख ने तब तुरंत अपने खाते से बैलेंस लाखों रुपए अपने दूसरे बैंक में ट्रांसफर किए.

मामले को रफा-दफा करने की कोशिश

शेख ने जब बैंक मैनेजर के समक्ष शिकायत की तो मैनेजर ने उन्हें आश्वासन दिया कि हमारी टीम जांच कर रही है. आप चिंता ना करें. आपका पैसा वापस मिल जाएगा. लेकिन दो महिने बाद हो गए आज तक शेख को पैसे वापस नहीं मिले हैं. अब बैंक यह कह कर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश कर रहा कि शेख ने ही किसी को अपना ओटीपी, डेबिट कार्ड नंबर और पिन शेयर किया होगा. क्या उच्च शिक्षित शेख ऐसी बेवकूफी कर खुद धोखेबाज को आमंत्रित कर अपना नुकसान कराएंगे? नहीं.

शहाब शेख ने ‘नवभारत’ को बताया कि मैंने पुलिस में भी शिकायत दर्ज कराई थी. तब पुलिस ने बैंक अधिकारी से पूछा कि यदि ग्राहक को आपने हर ट्रांजेक्शन पर ओटीपी भेजी थी तो उसका सबूत दिजिए, लेकिन बैंक अधिकारी मैसेज भेजने का कोई सबूत देने में विफल हैं. और अभी तक बैंक ने मामले की कोई जानकारी पुलिस को नहीं दी है.

बैंक ने ग्राहक पर ही मढ़ा दोष

इस मामले में यस बैंक के एमडी एवं सीईओ प्रशांत कुमार ने कहा कि हम मामले की जांच पूरी कर चुके हैं. इसमें बैंक की कोई गलती नहीं. बैंक के ग्राहक ने ही डेबिट कार्ड की पूरी जानकारी किसी को दी है. इस पर शेख का कहना है कि यस बैंक पूरी तरह से झूठ बोल रहा है. उसकी सुरक्षा प्रणाली में खामी है और वह अपनी कमी छिपाने के लिए मुझ पर ही दोष मढ़ रहा है. इस घटना से मेरे ऑफिस के अन्य साथी कर्मचारी भी आंशकित हैं और उन्होंने बैंक में अपने सैलरी खातों से पैसे निकालना शुरू कर दिया है.