सीमेंट की कीमतों में भारी उछाल

  • PM से सीमेंट नियामक गठित करने की गुहार

मुंबई. सीमेंट कंपनियों ( Cement Companies) ने फिर मूल्य वृद्धि करते हुए मुनाफाखोरी शुरू कर दी है. कोविड संकट के कारण इस साल मांग 15 से 20 प्रतिशत कम है, इसके बावजूद बाजार में सीमेंट कीमतें (Cement Prices) बढ़ रही है. पिछले 2 महिनों में कंपनियों ने लागत बढ़ने का हवाला देते हुए कीमतों में 40 से 50 रुपए प्रति बैग की भारी वृद्धि की है. 

सीमेंट महंगी होने से जहां आम उपभोक्ता त्रस्त है, वहीं ठेकेदारों और बिल्डरों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है. क्योंकि उनकी परियोजनाओं की लागत बढ़ती जा रही है. ऐसे में बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (BAI) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीमेंट उद्योग में मुनाफाखोरी और गुटबाजी रोकने के लिए सीमेंट नियामक प्राधिकरण के गठन की मांग की है.

50 रुपए तक महंगी हुई सीमेंट

वितरकों का कहना है कि पहले कोविड संकट के कारण मांग ठप थी, लेकिन सिंतबर से निर्माण कार्य शुरू होने से जैसे ही मांग बढ़ने लगी, कंपनियों ने आपूर्ति घटाकर मूल्य वृद्धि शुरू कर दी. पिछले 2 महिनों में कंपनियों ने 40 से 50 रुपए की भारी वृद्धि की है. अब थोक में बड़े ब्रांडों की सीमेंट के दाम (जीएसटी सहित) 360 से 365 रुपए हो गए हैं, जो सितंबर में 310-315 रुपए प्रति बैग थे. इसी तरह छोटे ब्रांडों के सीमेंट के दाम 340 से 350 रुपए हो गए हैं. जबकि रिटेल में दाम 360-380 रुपए तक पहुंच गए हैं.

मुनाफाखोरी में लिप्त सीमेंट कंपनियां

कंस्ट्रक्शन सेक्टर के शीर्ष संगठन ‘बीएआई’ के अध्यक्ष मू. मोहन ने‌ कहा कि सीमेंट कंपनियां विगत कई वर्षों से कार्टेल यानी गुटबाजी करते हुए मुनाफाखोरी में लिप्त हैं. इस साल फिर कृत्रिम मूल्य वृद्धि की जा रही है. कोविड संकट के कारण इस साल निर्माण गतिविधियां प्रभावित होने से मांग कम है. इसके बावजूद सीमेंट की कीमतें बढ़ाई जा रही है. कम मांग होने पर भी कीमतें बढ़ना का मतलब कृत्रिम मूल्य वृद्धि है. इसलिए हमनें प्रधानमंत्री से गुहार लगाई है कि टेलिकॉम, बीमा और रियल एस्टेट उद्योग की तर्ज पर सरकार को सीमेंट उद्योग के लिए भी नियामक का गठन करना चाहिए. नियामक के गठन से सीमेंट उद्योग में अनैतिक ढंग से हो रहे व्यापार पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा भी हो सकेगी.

क्षमता से कम उत्पादन का आरोप

बीएआई ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि सीमेंट उत्पादक जानबूझकर अपनी पूरी उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं. जिससे बाज़ार में कृत्रिम तौर पर सीमेंट की कमी पैदा हो और इसके दामों को नियंत्रित किया जा सके. भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने तथ्यात्मक तौर पर पाया था कि सीमेंट कंपनियों ने आपस में ही गुट बना लिया है, जिसके ज़रिये सीमेंट की बिक्री की दरों को आसानी‌ से प्रभावित और नियंत्रित किया जाता है. इसीलिए आयोग ने सीमेंट कंपनियों पर 6307 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया था. लिहाजा सीमेंट के दामों को नियंत्रित करने, बाज़ार पर आधिपत्य स्थापित करने, क्षमता से कम इस्तेमाल तथा कृत्रिम रूप से सीमेंट की कमी पैदा करने की प्रवृत्तिओं पर रोक लगाने के लिए सरकार को संवैधानिक तौर पर नियामक प्राधिकरण का गठन करना चाहिए.

आर्थिक विकास पर बुरा प्रभाव सीमेंट उद्योग में अनैतिक तरीक़े से हो व्यापार से देश के आर्थिक विकास पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है और इससे आम आदमी के हितों के साथ-साथ निर्माण उद्योग के हितों को भी भारी नुकसान हो रहा है. सरकार को इस पर तुरंत कदम उठाना चाहिए.

-मू. मोहन, अध्यक्ष, BAI