GST पोर्टल पर पुराने डेटा गायब!

  • अक्टूबर 2018 का ब्योरा नहीं
  • व्यापारियों में भारी आक्रोश

मुंबई. देश में जब से एक समान वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली जीएसटी लागू की गई है, तब से यह व्यापारियों के लिए जटिल बनी हुई है. हालांकि अब व्यापारी जब इसको समझने लगे हैं तो इसके पोर्टल से डेटा ही गायब होने लगे हैं.

 यह व्यापारियों और लघु उद्यमियों के लिए नयी समस्या पैदा हो गई है. जीएसटी पोर्टल पर अक्टूबर 2018 का ब्योरा ही नहीं दिख रहा है. यह उनके लिए नए रिटर्न भरने में बड़ी समस्या है, जिन्होंने पुराने रिकार्ड डाउनलोड करके नहीं रखे है. जबकि इस नई समस्या पर विभाग के अधिकारी पल्ला झाड़ रहे हैं.      

रिटर्न भरने में आ रही भारी समस्या 

व्यापारियों का कहना है कि जीएसटी पोर्टल पर बिना किसी पूर्व जानकारी के डेटा हटाए जा रहे हैं. यह बिलकुल गलत है. इससे हमें रिटर्न भरने में भारी समस्या आ रही है. हर व्यापारी पुराने रिकार्ड मैच करके ही रिटर्न भरता है. जिन व्यापारियों ने सभी पुराने मासिक रिकार्ड पोर्टल से डाउनलोड करके रखे हैं, उन्हें तो दिक्कत नहीं होगी. परंतु जिन व्यापारियों ने डेटा डाउनलोड नहीं करके रखे हैं, उनके लिए इस कोरोना काल में बड़ी दिक्कत पैदा हो गई है. अब वे पुराने रिकार्ड कैसे मैच करेंगे?

जीएसटी नेटवर्क की मनमानी

व्यापारियों के शीर्ष संगठन कॉन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के महानगर अध्यक्ष शंकर ठक्कर ने कहा कि बिना किसी पूर्व जानकारी के पुराने डेटा हटाना बिलकुल गलत है. यदि डेटा हटाने भी हैं तो उसकी अग्रिम जानकारी पोर्टल पर रजिस्टर्ड सभी कारोबारियों को दी जानी चाहिए. जीएसटी पोर्टल का संचालन करने वाला संगठन जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) इस तरह मनमानी करेगा तो फिर जीएसटी का औचित्य क्या रहेगा? अंतिम तिथि के समय पोर्टल हैंग होने की समस्या तो अक्सर झेलनी पड़ती है. क्या अब यह नया झंझट भी झेलना पड़ेगा?

बढ़ाई जाए GSTR-9 की अंतिम तिथि

ठक्कर  ने कहा कि दिन-प्रतिदिन नियम बदलने और पोर्टल की दुष्वारियों ने जीएसटी को अबूझ पहेली जैसा बना दिया है. यही हाल रहा तो लोग जीएसटी से बाहर आने लगेंगे. जब पोर्टल पर डेटा शून्य दिखा रहा है, ऐसे में व्यापारी अपना रिटर्न कैसे भर सकता है और अंतिम तिथि के बाद भरने पर पेनाल्टी भी देनी पड़ेगी. जबकि इसमें उसकी कोई गलती भी नहीं है.‘कैट’ ने ट्वीट और ईमेल के माध्यम से इस समस्या की ओर विभाग और जीएसटीएन का ध्यान आकर्षित किया है और GSTR-9 की अंतिम तिथि को भी बढ़ाकर  31 दिसम्बर 2020 करने की मांग की है.

हेल्पलाइन पर कोई ‘हेल्प’ नहीं

खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के महामंत्री तरुण जैन ने कहा कि जीएसटी का पोर्टल एक मजाक बन रहा है. कभी कोई डेटा तो कभी कोई डेटा पोर्टल से गायब हो जाता है. स्थानीय अधिकारियों से कहो तो वे यह कह कर पल्ला झाड़ लेते हैं कि ‘यह पोर्टल की त्रुटि है’, इसमें हम कुछ नहीं कर सकते, आप हेल्पलाइन पर बात करिए और हेल्पलाइन पर कोई ‘हेल्प’ नहीं मिलती है. अभी कुछ दिन पूर्व पोर्टल पर से जुलाई 2017 का डेटा गायब हो गया था. जिससे वे व्यापारी काफी परेशान हो गए थे, जिन्होंने उसको डाउनलोड नहीं किया था. अब पता चला है कि ऐसे कई व्यापारी हैं, जिनके पोर्टल पर अक्टूबर 2018 माह की बिक्री का आंकड़े शून्य दिखा रहे हैं. जबकि व्यापारियों के दवारा बिक्री के आंकड़ों का रिटर्न GSTR-1 जमा करते समय सभी आंकड़ों को भरा गया था और जिसका पीडीएफ डाउनलोड किया था, जिसमे भी सभी आंकड़ें दिख रहे हैं.