महंगाई काबू करने भूटान की मदद ले रही भारत सरकार

नई दिल्ली: प्याज की कीमत को काबू में रखने के लिए भारत सरकार ने 23 अक्टूबर को प्याज पर स्टॉक लिमिट भी लगा दी है। होलसेलर्स के लिए यह लिमिट 25 मिट्रिक टन और रीटेलर्स के लिए 2 मिट्रिक टन है। देश में आलू प्याज की कीमतें आसमान छू रही हैं। जिस कारण केंद्र की बीजेपी सरकार (BJP Government) विपक्षी पार्टियों के निशाने पर है।

केंद्र सरकार आलू प्याज की कीमतों को कम करने के लिए भूटान का सहारा ले रही है। देश के रेल व वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि, आलू की घरेलू आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों को कंट्रोल में लाने के लिए भूटान से 30,000 टन आलू का आयात किया जा रहा है। वहीं 7,000 टन प्याज का आयात किया जा चुका है, दीवाली से पहले इसकी 25,000 टन खेप और आने की संभावना है। 

गोयल ने आगे कहा कि, हमने हाल ही में जो कदम उठाए उसके कारण पिछले एक सप्ताह से प्याज की कीमत स्थिर है। अभी औसत मूल्य 65 रुपये प्रति किलोग्राम पर बना हुआ है। हमने 14 सितंबर को ही प्याज के निर्यात पर बैन लगाने का फैसला किया था। 21 अक्टूबर से प्याज आयात के नियमों को भी आसान किया गया है।

सरकार ने इस स्थिति पर काबू पाने के लिए हाल ही में 23 अक्टूबर को प्याज पर स्टॉक लिमिट भी लगा दी है। होलसेलर्स के लिए यह लिमिट 25 मेट्रिक टन और रीटेलर्स के लिए 2 मिट्रिक टन है। प्याज के ग्रेडिंग और पैकिंग के लिए तीन दिन अलग से दिए जाएंगे। साथ ही किसान रेल के जरिये प्याज को देश के हर कोने तक पहुंचाया जा रहा है। सरकार ने प्याज के बीज के एक्सपोर्ट पर भी बैन लगा दिया है। 

बफर स्टॉक से भी राज्यों को प्याज़ दी गई है। सरकार की ओर से आलू के इम्पोर्ट ड्यूटी पर 10 लाख मीट्रिक टन पर 10% का कोटा तय किया गया है। सरकार ने इस कोटे को 31 जनवरी 2021 तक के लिए लागू किया है। फिलहाल आलू की औसत कीमत 42 रुपये के करीब है। आलू के आयात के नियम को आसान किया गया है।