Hallmarking To Ensure Pure Gold For Customers

  • बिना हॉलमार्क वाली पुरानी ज्वैलरी कभी भी बेच सकेंगे ग्राहक

मुंबई. करीब तीन साल इंतजार के बाद अंतत: केंद्र सरकार ने देश में 2 ग्राम से अधिक वजन वाले सभी सोने के आभूषणों (Gold Jewellery) और कलाकृतियों (Articles) पर बिक्री से पहले हॉलमार्किंग (Hallmarking) करना अनिवार्य कर दिया है। हॉलमार्क गोल्ड की शुद्धता (Purity) का प्रमाणपत्र (Certificate) है। 

शुरू में इस निर्णय को 16 जून से 256 जिलों में लागू किया गया है। अन्य जिलों में हॉलामार्क केंद्र (Hallmark Centre) खुलने के बाद वहां भी चरणबद्ध तरीके से अनिवार्य हो जाएगा। मुंबई, पुणे, रायगढ़, नाशिक, पुणे, नागपुर सहित महाराष्ट्र के 22 जिलों में तो अनिवार्य हो गया है। 31 अगस्त 2021 तक इस मामले में कोई जुर्माना नहीं लगेगा। हॉलमार्किंग व्यवस्था के पीछे सरकार की मंशा ग्राहकों को शुद्ध सोना उपलब्ध कराने के साथ सभी छोटे-बड़े ज्वैलर्स को टैक्स (Tax) दायरे में लाना है।

BIS में पंजीकरण नि:शुल्क, प्रति नग शुल्क 35 रुपए

हॉलमार्किंग अनिवार्य होने से सभी ज्वैलर्स को भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) में पंजीकरण कराना पड़ेगा। देश में करीब 5 लाख ज्वैलर्स हैं, जिनमें से अभी तक करीब 40% ही BIS में रजिस्टर्ड हैं। पहले पंजीकरण के लिए 10,000 रुपए फीस थी, लेकिन अब सरकार ने छोटे ज्वैलर्स को प्रेरित करने के लिए पंजीकरण नि:शुल्क कर दिया है। कोई रिन्यूअल फीस भी नहीं लगेगी। हॉलमार्किंग के लिए 2 ग्राम से अधिक वाले प्रत्येक आभूषण पर सिर्फ 35 रुपए फिक्स शुल्क (Charge) लगेगा, लेकिन ज्वैलर्स के लिए निर्माण लागत करीब 10% बढ़ जाएगी।

ग्राहकों से बिना हॉलमार्क वाला सोना खरीद सकेंगे ज्वैलर्स

सरकार ने केवल 14, 18 और 22 कैरेट (Carat) सोने के आभूषणों पर हालमार्किंग करना अनिवार्य किया है। 20, 23 और 24 कैरेट वाले स्वर्ण आभूषणों पर भी हॉलमार्किंग अनिवार्य नहीं होगी। इसके अलावा कुंदन, पोल्की तथा जड़ाऊ आभूषणों तथा गोल्ड वाच, गोल्ड फाउंटेन पेन पर भी हॉलमार्किंग जरूरी नहीं की गयी है। ज्वैलर्स ग्राहकों से बिना हॉलमार्क वाला सोना या ज्वैलरी खरीदना जारी रख सकते हैं, लेकिन पुराने आभूषणों को पिघलाने और नए आभूषण बनाने के बाद हॉलमार्क करना जरूरी होगा और देश में जिस किसी के पास बिना हॉलमार्क वाली ज्वैलरी या सोना रखा है, उसे चिंतित होने की जरूरत नहीं है, वह जब चाहे अपना पुराना सोना ज्वैलर को बेच सकता है।

अब बिना बिल के बेचना मुश्किल

हॉलमार्किंग अनिवार्य होने से अब किसी भी ज्वैलर के लिए बिना बिल के माल (ज्वैलरी) बेचना मुश्किल होगा, क्योंकि हर खरीद और बिक्री की एंट्री के साथ हॉलमार्किंग की एंट्री भी होगी। हर मैन्युफैक्चर‍र (Manufacturer) और होलसेलर (Wholesaler) अपना लोगो लगा कर रिटेलर (Retailer) को माल देगा, तो उसे बिल के बिना रिटेलर बेच नही पाएगा। हॉलमार्किंग का पूरा रिकॉर्ड यूआईडी के साथ हॉलमार्किंग एजेंसी के पास उपलब्ध होगा, जिससे हर माल की ट्रैकिंग आसान होगी। हर माल के यूआईडी नंबर से यह पता चल जाएगा कि माल किसने बनाया है और किसने किसको बेचा है। इसलिए सभी को बिल के साथ ही टैक्स भरते हुए कारोबार करना होगा।

सरकार का यह निर्णय ऐतिहासिक है। यह भारत में नए स्वर्ण युग की शुरूआत है। सोने पर अनिवार्य हॉलमार्किंग से लोग धोखाधड़ी से बच पाएंगे और उन्हें शुद्धता के लिहाज से उतना सोना मिलेगा, जिसके लिए उन्होंने भुगतान किया है। साथ ही हर ज्वैलर्स पर ग्राहकों का विश्वास बढ़ेगा। अब ग्राहक चिंतामुक्त होकर शुद्ध सोने के आभूषण खरीदेंगे। मिलावट का डर नहीं रहेगा। इससे देश में गोल्ड ज्वैलरी की मांग में भी तेजी आएगी और छोटे-बड़े सभी ज्वैलर्स को अपना व्यवसाय बढ़ाने का अवसर मिलेगा। कारीगरों के लिए भी रोजगार बढ़ेंगे। जहां तक लोगों के पास रखे बिना हॉलमार्क वाली पुरानी ज्वैलरी कभी भी बेच सकेंगे ग्राहक।

-संजय शाह, अध्यक्ष, ज्वैलमेकर्स वेलफेयर एसोसिएशन

सरकार का हॉलमार्किंग अनिवार्य करने का फैसला ज्वैलर्स और ग्राहक, दोनों के हित में है। प्रमाण (हालमार्क) के साथ खरा सोना बेचे जाने पर हर ज्वैलर्स पर ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा। इससे गोल्ड ज्वैलरी व्यवसाय में तेजी आएगी। पहले लोग मिलावट के डर से गोल्ड बिस्कुट या गिन्नी खरीदने पर जोर देते थे, लेकिन अब अपने प्रियजनों और निवेश के लिए ज्वैलरी खरीदना अधिक पसंद करेंगे। हमारा सरकार से आग्रह है कि ग्राहकों के हित में कुंदन, पोल्की तथा जड़ाऊ तथा 20, 23 और 24 कैरेट वाली गोल्ड ज्वैलरी पर भी हॉलमार्किंग अनिवार्य की जाए। साथ ही एचयूआईडी कोड को भी लागू नहीं किया जाए।

-कुमार जैन, मुंबई अध्यक्ष, इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन