इक्विटी में निवेश करते समय घाटे से कैसे बचे : अमित ग्रोवर

  • जानिए नुकसान से बचने के 8 तरीके
  • निवेश यात्रा में विपरीत सोच की नीति

मुंबई. डीएसपी इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के एवीपी (लर्निंग एंड डेवलपमेंट) अमित ग्रोवर कहते हैं कि शेयर बाजार में धन कमाने और वेल्थ क्रिएशन के बहुत सारे तरीके हैं, जो कि तमाम विशेषज्ञ अक्सर निवेशकों को बताते रहते हैं, लेकिन मैं इसके विपरीत बात कर रहा हूं. वह यह है कि इक्विटी बाजारों में निवेश करते समय पैसे गंवाने के कुछ ही तरीके हैं. यह बात महत्वपूर्ण इसलिए है कि जब आपको बाजार में पैसे गंवाने के तरीकों (जोखिम) का ज्ञान हो जाएगा, तब बाजार में कहां-कहां जोखिम हो सकता है, उसका भी पूरा ज्ञान हो जाएगा. तब आप अधिक सतर्क और सोच-समझकर निवेश निर्णय लेने में भी सक्षम हो जाएंगे. उस समय आपके निवेश निर्णय ज्यादा सटीक और फलदायी सिद्ध होंगे. तभी आप इक्विटी बाजार से पैसे कमाने सफल हो पाएंगे. 20वीं शताब्दी के महान निवेश विशेषज्ञों में से एक चार्ली मुंगेर ने कहा था, ‘मैं जानना चाहता हूं कि मैं कहां मरने वाला हूं, इसलिए मैं वहां कभी नहीं जाऊंगा’.

जोखिम से बचाव करते हुए निवेश करना

चार्ली मुंगेर की सोच जर्मन गणितज्ञ कार्ल गुस्ताव जैकब जैकोबी से प्रेरित थी, जिन्होंने एक सरल जर्मन रणनीति का पालन करके कठिन समस्याओं को हल किया, ‘उल्टा, हमेशा उल्टा’. कभी-कभी कई कठिन समस्याओं को सही समाधान निकालने के लिए ‍विपरीत सोचना पड़ता है, ऐसी प्रक्रिया का उपयोग मुंगेर अक्सर करते थे. इसे उल्टा कहा जाता है. अर्थात समस्या की जड़ तक पहुंचने के लिए अंत से शुरू करना और पीछे की ओर काम करना. इसे विपरीत सोच भी कह सकते हैं. अब हम अपनी निवेश यात्रा में उल्टा सोचने वाली इस नीति को कैसे लागू कर सकते हैं? जब हम निवेश करते हैं तो पहले यही पूछा जाता है कि आप क्या बचाव करना चाहते हैं? तब आपका जवाब यही होता है कि मैं अपनी मेहनत की कमाई खोने से बचाना यानी जोखिम से बचाव करते हुए निवेश करना चाहता हूं. मेरे पास उस नकदी के लिए बड़ी योजनाएं हैं. तो पैसे खोने के क्या तरीके हैं? हमें क्या करने से बचना चाहिए? बहुत सरल है.

1. पैसे खोने का प्रथम तरीका:बाजार में समय ना देना

यानी आप सोचेंगे कि मेरा शेयर बहुत जल्द दोगुना-तिगुना हो जाए, लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं होता है. समय ही सब कुछ है, इसलिए निवेश करते समय बाजार में जल्दबाजी कभी नहीं करनी चाहिए. क्योंकि बाजार आप की सोच के अनुसार नहीं चलता है. इसलिए रिटर्न पाने के लिए लंबा इंतजार भी करना पड़ता है.  पेरेटो एक इटालियन अर्थशास्त्री थे. अपने शोध में, वे ‘80/20’ के सिद्धांत को अधिकांश परिणामों को समझाने के लिए सार्वभौमिक रूप से उपयोग करते थे. उदाहरण के लिए, आमतौर पर हर कंपनी के 20% उत्पाद 80% बिक्री का प्रतिनिधित्व करते हैं. 20% कर्मचारी आमतौर पर 80% परिणामों या मुनाफे के लिए जिम्मेदार होते हैं. हमारे कार्यों का 20% आम तौर पर हमारी सफलताओं का 80% होता है. पेरेटो का सिद्धांत निवेश और स्टॉक मार्केट रिटर्न के साथ भी काम करता है. शेयर बाजार का 80% रिटर्न 20% समय के दौरान आता है, लेकिन यह 20% समय सही कब होगा, यह व्यावहारिक रूप से सच हो पाना असंभव होता है. लिहाजा आपको बाजार में लाभ प्राप्त करने के लिए धैर्य रखना ही चाहिए और दीर्घकालिक यानी लांग टर्म निवेशक होना चाहिए. केवल भाग्य के भरोसे ही निवेश करना उचित नहीं कहा जा सकता है. 

2. पैसा खोने का दूसरा तरीका: विविधकृत नहीं होना

-आपकी टोकरी में कितने अंडे हैं?

एक अच्छा बल्लेबाज जानता है कि वह हर गेंद पर छक्का नहीं मार सकता. कुछ गेंद खाली भी जाती हैं. इसलिए वह कुछ छक्कों, चौकों, दो रन, एक-एक रन के संयोजन से ही शतक बनाता है. निवेश करना भी कुछ अलग नहीं है. बाजार में निवेश पर ‍अच्छा रिटर्न प्राप्त कर वेल्थ बनाने के लिए भी एक अच्छे बल्लेबाज की जैसी नीति अपनानी पड़ती है. पिछले 40 वर्षों में शेयर बाजार में जहां कई सफलता की कहानियां हैं. अनेक कंपनियों ने अपने उद्योग क्षेत्रों में अग्रणी खिलाड़ी बनने के लिए 100 गुना भी वृद्धि की है. वहीं कई विफलता की कहानियां भी हैं. कई कंपनियां दिवालिया हो गई हैं, लेकिन केस स्टडी में विफलताओं के बारे में बहुत ही कम लिखा जाता है. इस कारण छोटे निवेशक जोखिमों से अनजान रहते हैं.   

ज्यादातर निवेशकों को उन कंपनियों से जुड़ी कहानियों से मोह हो जाता है, जो 100 गुना रिटर्न देने का वादा करती हैं और इस कारण ऐसे निवेशक कुछ शेयरों के केंद्रित पोर्टफोलियो में ही निवेश करते हैं. लेकिन यही जोखिम भरा निवेश होता है. इसलिए पोर्टफोलियो विविध और संतुलित होना चाहिए. एक विविध पोर्टफोलियो में आम तौर पर उच्च दीर्घकालिक रिटर्न प्राप्त होता है और जोखिम  भी कम होता है.

3. पैसा खोने का तीसरा तरीका: पर्याप्त शोध के बिना निवेश करना

-गहन शोध और उसकी समझ जरूरी

हम देखते हैं कि अधिकांश लोग विदेश यात्रा की योजना बनाने या नए टीवी को सर्वोत्तम मूल्य पर खरीदने से पहले कई महीनों तक शोध करते हैं, जानकारी जुटाते हैं. लेकिन जब शेयर मार्केट में निवेश करना हो तो बिना किसी विस्तृत शोध (रिसर्च) के केवल ‘टीप’ पर ही जल्दबाजी में निवेश कर डालते हैं.

जबकि इक्विटी में निवेश करने से पहले भी व्यापक रिसर्च बहुत जरूरी है. तभी आपका निवेश सही और लाभकारी होगा. किसी भी कंपनी में निवेश से पहले उस कंपनी की हर पहलु से वि‍श्लेषण करने की समझ भी होनी चाहिए. जैसे कि कंपनी के बिजनेस, प्रबंधन और वित्तीय वक्तव्यों, व्यापक माइक्रो-इकोनॉमी, सेक्टर और इक्विटी कैपिटल, ट्रैक रिकार्ड, ग्रोथ संभावनाएं आदि. इक्विटी निवेश में किस्मत भी भूमिका निभाती है. लेकिन किस्मत के भरोसे निवेश में भारी जोखिम संभ‍व हैं, क्योंकि किस्मत हमेशा साथ नहीं देती है. और भाग्यशाली नतीजे निवेशक में अति आत्मविश्वास पैदा कर देते हैं. किस्मत उस समय तो साथ दे सकती है, जब बाजार में जोरदार तेजी का दौर चलता रहता है, लेकिन मंदी में अति आत्मविश्वास भारी नुकसान का कारण बन जाता है. इसलिए इक्विटी में सीधे निवेश से पहले व्यापक रिसर्च और उसकी समझ भी होना जरूरी है.

4. पैसे खोने का चौथा तरीका: क्षमता से अधिक निवेश करना

-जोखिम भरा व्यापार

इक्विटी मार्केट हमेशा से अनिश्चिताओं वाला बाजार रहा है और हमेशा रहेगा. यहां कब बाजार तेजी से अचानक मंदी में तब्दील हो जाए, कुछ नहीं कहा जा सकता. यहां अचानक किसी भी स्टॉक या इंडेक्स में 15 से 20% गिरावट (करेक्शन) तो आम बात है. और मंदी के ऐसे दौर भी आए हैं. जब इक्विटी बाजार में 50% से अधिक गिरावट आई है. (उदाहरण के लिए, 1990 के दशक की शुरुआत में हर्षद मेहता के समय, 2001-2002 में केतन पारेख के समय और 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान). आमतौर पर अधिकांश निवेश पोर्टफोलियो सामान्य बाजार परिस्थितियों को देखते हुए बनाए जाते हैं. लेकिन सबसे खराब समय (घोर मंदी) को झेलने के लिए जोखिम प्रबंधन अति आवश्यक है. एक मुस्तैद सैनिक सबसे खराब स्थिति से निपटने के लिए हमेशा सजग और तैयार  रहता है. जहाजों को भी समुद्र में यात्रा के समय सबसे खराब स्थिति से निपटने के लिए डिजाइन किया जाता है. इसलिए निवेशक को भी कठिन समय के लिए हमेशा पूरी तरह तैयार रहना चाहिए और सबसे खराब बाजार यानी घोर मंदी से निपटने और उसमें अपना निवेश सुरक्षित के लिए पुख्ता योजना बनानी चाहिए. सबसे खराब स्थिति को ध्यान में रखते हुए पोर्टफोलियो डिजाइन करना कमजोरी का संकेत नहीं है, बल्कि बुद्धिमानी है.

5. पैसा खोने का पांचवां तरीका: जोखिम की परवाह किए बिना लालच में फंसना

-जांच-परख कर करें निवेश

आपने देखा होगा कि चूहे को पकड़ने के लिए जाल कैसे बिछाया जाता है. उसे पिंजरे में फंसाने के लिए रोटी का लालच दिया जाता है. उसी तरह निवेशकों को फंसाने के लिए कुछ बदनीयत वाले गलत प्रमोटर पोंजी और लुभावनी स्कीमों में ज्यादा रिटर्न का लालच दिखाते हैं. जिनमें अक्सर भोले-भाले निवेशक बिना सोचे-समझे निवेश कर फंस भी जाते हैं और अपनी पूंजी गंवा बैठते हैं.  रिटर्न दिखता है, लेकिन जोखिम दिखता नहीं है, वह अदृश्य होता है. सिर्फ यह सोचना कि पिछले 4 आईपीओ ने ओपनिंग डे पर सकारात्मक 15-20%  से ज्यादा का रिटर्न दिया है, इसलिए अब पांचवां भी 15%  रिटर्न तो देगा ही. यह सोच बिलकुल गलत है और यही घाटे का कारण बन जाती है. अल्पकालिक परिणामों के आधार पर निवेश अक्सर कठिन समय होने पर भावनात्मक, हानिकारक व्यवहार पैदा कर सकता है. इसलिए हर पहलु से जांच परख और प्रक्रियाओं पर आधारित निवेश ही फलदायी होता है और चिंता मुक्त रखता है.

 6. पैसा खोने का छठा तरीका: शॉर्ट टर्म सोच के साथ निवेश करना

-समय ही निवेशक का सबसे अच्छा दोस्त

आइए 1979 से 2019 तक सेंसेक्स की 40 साल की यात्रा का आकलन करें.

  • यदि आप 1 साल की अवधि के लिए निवेश करते हैं. तो लगभग पैसा खोने की संभावना 33% होती है.
  • यदि आप 5 साल की अवधि के लिए निवेश करते हैं तो पैसा खोने की संभावना लगभग 8% होती है.
  • यदि आप 10 साल का होराइजन के साथ निवेश करते हैं पैसा खोने की संभावना सिर्फ 3% ही होती है. 
  • यदि आप 15 साल के लिए निवेश करते हैं तो पैसा खोने की संभावना 0% यानी बिलकुल नहीं होती है.

यह अनुमान 40 साल के इतिहास पर आधारित सेंसेक्स के ऐतिहासिक रिटर्न पर आधारित है. दुनिया के सबसे धनी व्यक्तियों में से एक अमेजॉन के संस्थापक अध्यक्ष जेफ बेजोस ने एक बार महान निवेशक वॉरेन बफे से पूछा, ‘आपका निवेश स्टाइल बहुत सरल है. फिर हर कोई सिर्फ आपकी नकल क्यों नहीं करता है?’ इस पर वारेन बफेट ने जवाब दिया, ‘क्योंकि कोई भी धीमी गति से अमीर नहीं बनना चाहता है’.

7. पैसे खोने का सातवां तरीका: मूल्यांकन की परवाह ना करना.

-मूल्य वह है, जो आप भुगतान करते हैं और वैल्यू वह है, जो आपको प्राप्त होता है.

बाजार हमेशा उत्साह और निराशावाद के बीच घूमता रहता है. जबकि इनका जमीनी हकीकत से बहुत कम वास्ता होता है. बाजार में निवेशकों को भ्रमित करने के लिए इधर-उधर की कहानियां और गपशप, टिप आदि खूब चलाई जाती हैं. और अक्सर निवेशक शेयर कीमत का मूल्यांकन देखे बिना केवल सुनी-सुनाई बातों पर ‘टिप’ के भरोसे शेयर खरीद लेता है. और वह शेयर तो कुछ दिन बाद गिरकर अपने वास्तविक मूल्य पर वापस आ जता है. इस तरह निवेशक ऊंचे मूल्यों पर फंस जाते हैं. जबकि निवेशक को सदैव यह ध्यान में रखना चाहिए कि भविष्य में रिटर्न कितना मिल सकता है, यह हमेशा इस फैक्टर पर निर्भर करता है कि आप किस भाव पर यानी किस मूल्यांकन पर निवेश कर रहे हैं.

8. पैसा खोने का आठवां तरीका: पर्याप्त समझ के बिना निवेश करना

-पेशेवरों पर भरोसा करें

मार्केट में बहुत से निवेशक अक्सर नुकसान उठाते हैं और कमा नहीं पाते हैं. इसका सबसे बड़ा कारण बिना पर्याप्त निवेश ज्ञान के जल्दबाजी में कहीं भी निवेश कर देना है. जबकि निवेश एक विशेष कार्य है. जिसके लिए फाइनेंस, अकाउंटिंग और वैल्यूएशन (मूल्यांकन) की ठोस समझ की आवश्यकता होनी चाहिए.. साथ ही प्रबंधन का अच्छा ज्ञान, डोमेन/सेक्टर ज्ञान और बाजार में उतार-चढ़ाव का प्रबंधन करने के लिए एक शांत आचरण और बहुत अधिक धैर्य भी अत्यावश्यक है. निवेश एक पूर्णकालिक काम है, जिसमें बहुत अधिक विशेषज्ञता, समय और ऊर्जा की आवश्यकता होती है.

इसलिए इक्विटी म्युचुअल फंड उन निवेशकों के लिए एक बेहतर विकल्प है, जिनके पास शेयरों में निवेश करने के लिए समय, ऊर्जा या ज्ञान नहीं है. म्युचुअल फंड का प्रबंधन पेशेवर फंड मैनेजरों द्वारा किया जाता है, साथ ही उनके पास विश्लेषकों की बड़ी टीम भी होती है. जिससे म्युचुअल फंडों में निवेश करने पर एक निवेशक को कम लागत पर विविधीकरण का लाभ भी मिलता है.