प्लास्टिक रॉ मैटेरियल कीमतों में भारी वृद्धि

  • संकट में आती प्लास्टिक प्रोसेसिंग इंडस्ट्री
  • 20% से 140% तक की भारी वृद्धि
  • 50,000 से अधिक यूनिट

मुंबई. कोरोना महामारी की त्रासदी झेलने के बाद अब प्लास्टिक प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के समक्ष नया संकट खड़ा हो गया है. रॉ मैटेरियल कीमतों में अप्रत्याशित रूप से 20% से 140% तक की भारी वृद्धि के कारण देश की 50,000 से अधिक प्लास्टिक प्रोसेसिंग यूनिट वित्तीय संकट में आती जा रही है.

देश भर की 10 अग्रणी प्लास्टिक संस्थाओं ने बड़ी प्लास्टिक रॉ मैटेरियल कंपनियों पर कार्टेल बनाकर मुनाफाखोरी किए जाने का आरोप लगाया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उद्योग को संकट से बचाने की गुहार लगाई है. साथ ही उद्योग के लिए रेग्युलेटरी अथॉरिटी गठित करने की मांग की गई है.

पेट्रोकेमिकल्स कंपनियों पर मुनाफाखोरी का आरोप

ऑल इंडिया प्लास्टिक मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (AIPMA) सहित देश की 10 उद्योग संस्थाओं द्वारा प्रधानमंत्री को सयुंक्त रूप से लिखे गए पत्र में कहा गया है कि देश की बड़ी पेट्रोकेमिकल्स कंपनियां कार्टेल बनाकर पिछले कुछ महिनों से लगातार कीमतें बढ़ाकर मुनाफाखोरी कर रही है. जबकि मांग उतनी नहीं है. प्लास्टिक उद्योग में इस गलत चलन से प्लास्टिक मैन्युफैक्चरिंग एवं प्रोसेसिंग इंडस्ट्री पर काफी बुरा असर पड़ रहा है और यह इंडस्ट्री संकट में आती जा रही है. लिहाजा सरकार को तुरंत कदम उठाकर मुनाफाखोरी पर अंकुश लगाना चाहिए. संस्थाओं ने सरकार से एंटी-डम्पिंग ड्यूटी नहीं लगाने, BIS की अनिवार्यता खत्म करने, कच्चे माल पर इम्पोर्ट ड्यूटी घटाने और देश से कच्चे माल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है, ताकि प्लास्टिक उद्योग का अस्तित्व बचा रहे और वह चीन जैसे कड़े प्रतिस्पर्धी से टक्कर लेने में सक्षम साबित हो.

इन संस्थाओं ने लिखा पीएम को पत्र

बड़ी कंपनियों की मुनाफाखोरी के खिलाफ पीएम को जिन संस्थाओं ने मिलकर पत्र लिखा है, उस पर दी ऑल इंडिया प्लास्टिक मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष चंद्रकांत तुराखिया, ऑर्गनाइजेशन ऑफ प्लास्टिक प्रोसेसर्स ऑफ इंडिया के अध्यक्ष महेंद्र संघवी, महाराष्ट्र प्लास्टिक्स मैन्युफ़ैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रवि जश्नानी, इंडियन प्लास्टिक्स फेडरेशन के अध्यक्ष रमेश रतेरिया, गुजरात स्टेट प्लास्टिक्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष शैलेश पटेल, कर्नाटक स्टेट प्लास्टिक्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय कुमार, केरल प्लास्टिक्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बालाकृष्णा भटकाकुंजे, तेलंगाना एंड आंध्र प्लास्टिक्स मैन्युफ़ैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विमलेश गुप्ता, कैनरा प्लास्टिक्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन एंड ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बी. ए. नजीर ने हस्ताक्षर किए हैं.

रेग्युलेटरी अथॉरिटी गठित करे सरकार

“प्लास्टिक रॉ मैटेरियल्स बनाने वाली बड़ी पेट्रोकेमिकल्स कंपनियां पिछले कुछ महिनों से लगातार कीमतें बढ़ा रही हैं. जबकि मांग उतनी नहीं हैं, लेकिन वे आपूर्ति घटा कर मूल्य वृद्धि कर रही हैं और मुनाफाखोरी में लिप्त हैं. पोलीप्रॉपीलीन, PVC, ABS, PC, PET जैसे कच्चे माल की कीमतों में 20% से लेकर 140% तक की भारी वृद्धि हुई है. दुर्भाग्यवश पीएसयू कंपनियों ने भी निजी कंपनियों से हाथ मिला लिया है. रॉ मैटेरियल कीमतों में भारी वृद्धि के कारण महाराष्ट्र सहित देश भर की छोटी प्लास्टिक प्रोसेसिंग कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ती जा रही है और वे भारी नुकसान में आ रही हैं. इस संबंध में केंद्र सरकार को तुरंत कदम उठाने के साथ रेग्युलेटरी अथॉरिटी गठित करने पर भी विचार करना चाहिए.” -चंद्रकांत तुराखिया, अध्यक्ष, AIPMA

90% लघु एवं मझौली इकाइयां

“कच्चे माल के उत्पादक बड़े पैमाने पर कच्चे माल का निर्यात कर पोलीमर रॉ मैटेरियल की बाजार में कृत्रिम कमी पैदा कर रहे हैं. पिछले 5 महीनों में पेट्रोकेमिकल कंपनियों द्वारा कच्चे माल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि की गयी है. इस कारण भारत में हजारों प्लास्टिक प्रोसेसिंग यूनिट्स के अस्तित्व पर संकट आ खड़ा हुआ है. देश के प्लास्टिक उद्योग में 50,000 से अधिक यूनिट का समावेश है, जिनमें 90% लघु एवं मझौली इकाइयां यानी MSME’s. हैं. यह सेक्टर प्रत्यक्ष तौर पर 50 लाख लोगों को रोज़गार मुहैया कराता है और देश की जीडीपी में इसका योगदान 3 लाख करोड़ रुपए है. इनके संकट में आने पर लाखों लोगों के रोजगार भी संकट में आ सकते हैं.” -अरविंद मेहता, अध्यक्ष, गवर्निंग काउंसिल, AIPMA