समयानुसार बीमा पॉलिसी की समीक्षा आवश्यक : गांधी

मुंबई. इंडियाफर्स्‍ट लाइफ इंश्‍योरेंस कंपनी लिमिटेड के डिप्टी सीईओ ऋषभ गांधी ने कहा है कि दुनिया अभूतपूर्व दौर से गुजर रही है. अपने सपनों एवं महत्‍वाकांक्षाओं को हासिल करने हेतु कड़ी मेहनत का महत्‍व दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है. जीवन की अप्रत्‍याशित स्थितियों में अपने प्रियजनों के लिए सुरक्षित भविष्‍य सुनिश्चित करने की भी जिम्‍मेवारी आपके ऊपर ही होती है. अपने होने या न होने दोनों ही स्थितियों में बच्‍चों की उच्‍च शिक्षा, उनके शादी-विवाह आदि जैसी जिम्‍मेवारियों को सफलतापूर्वक पूरा किया जाना भी बेहद जरूरी होता है. ऐसे में आपके जीवन की सर्वोत्‍तम सुरक्षा का साधन जीवन बीमा है.

बदल रही हैं वित्तीय जरूरतें  

अधिकांश वित्‍तीय सलाहकार जीवन बीमा पॉलिसियों के वार्षिक पुनर्मूल्‍यांकन या समीक्षा की सलाह देते हैं, क्‍योंकि जीवन में अक्‍सर बदलाव आते रहते हैं. आइए इस बारे में विचार करें. आप 10 वर्ष पहले कोई जीवन बीमा पॉलिसी ले चुके हैं. क्‍या वह पॉलिसी आपकी वर्तमान आवश्‍यकताओं की पूर्ति के लिए भी उपयुक्‍त है? शायद नहीं. यह बिल्‍कुल वैसा ही है जैसे कि हमें जीवन के अलग-अलग चरणों में अलग डॉक्‍टरों की आवश्‍यकता होती है, कभी पीडियाट्रिशियन, कभी जनरल फिजिशियन या फिर किसी विशेष स्थिति में स्‍पेशलिस्‍ट डॉक्‍टर. इसी तरह, जीवन के अलग-अलग चरणों में भिन्‍न-भिन्‍न तरह की सुरक्षा की आवश्‍यकताएं होती हैं.

ऐसे कई कारण हैं. जिनके चलते जीवन बीमा पॉलिसी की समीक्षा ज़रूरी हो जाती है. सबसे पहले कारणों में से एक है, आपकी वित्‍तीय स्थिति में होने वाले महत्‍वपूर्ण बदलाव. आपका करियर आगे बढ़ने के साथ, आप अपने रहन-सहन के स्‍तर को बेहतर बनाते हैं. आपके परिवार की वित्‍तीय आवश्‍यकताएं भी बढ़ती हैं. परिसंपत्तियां बढ़ती हैं, लेकिन साथ ही जिम्‍मेवारियां भी बढ़ती जाती हैं; ऐसे में अच्‍छी-खासी और नियमित आमदनी का जरिया सुनिश्चित करना बेहद महत्‍वपूर्ण हो जाता है, क्‍योंकि जिंदगी में कभी भी कोई आपातस्थिति पैदा हो सकती है. 25 वर्ष की उम्र में ली गई बीमा पॉलिसी 40 वर्ष के उम्र की आपकी वित्‍तीय आवश्‍यकताओं की पूर्ति के लिए उपयुक्‍त नहीं होगी.

परिवार के लिए हो पर्याप्‍त बीमा कवर

ऋषभ गांधी ने कहा कि दूसरा महत्‍वपूर्ण कारण है, परिवार के सभी सदस्‍यों के जीवन की यथास्थिति को बनाये रखना. यदि आप पर्याप्‍त बीमा कवर लेते हैं, तो आपके आश्रितों को मुश्किल स्थितियों में भी जीवनशैली से समझौता नहीं करना पड़ेगा. स्‍वास्‍थ्‍य स्थितियों में बदलाव आने और आपका परिवार बढ़ने के साथ, आपकी जिम्‍मेवारियां भी बढ़ती हैं और इसलिए, यह आवश्‍यक है कि आपके न होने की स्थिति में भी आपकी बीमा सुरक्षा पर्याप्‍त हो.

नए बीमा उत्पादों पर भी विचार करें

एक अन्‍य महत्‍वपूर्ण कारक जिसे सबसे अधिक नजरंदाज कर दिया जाता है, वो है लगातार नए-नए बीमा उत्‍पादों का आना. बीमा प्रदाता अन्‍य उत्‍पाद व सेवा कंपनियों के साथ मिलकर अपने उत्‍पादों में लगातार नयापन लाते रहते हैं. बीमा साधनों को बेहतर बनाने के लिए लगातार नये-नये समावेशन, बहिष्‍करण व लाभ शामिल किये जाते रहते हैं. इसलिए, अपनी पॉलिसी के बेहतर संस्‍करण पर नजर रखने में ही बुद्धिमानी है, ताकि आपको पता रहे कि बाद में दावा निपटारा में कोई समस्‍या न हो.

घर बैठे करें अपनी पॉलिसियों की समीक्षा

ऋषभ गांधी ने कहा कि जीवन की किसी भी स्‍वस्‍थ आदत की तरह ही, विश्‍वसनीय समीक्षा विधि अपनाकर आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि आपका कोई भी कदम गलत न पड़े या फिर त्रुटि-सुधार कर सकते हैं. यही बात जीवन बीमा के संदर्भ में भी लागू होती है. गहन डिजिटलीकरण और कस्‍टमाइजेशन के आ जाने के बाद से, आप आराम से घर बैठे अपनी बीमा पॉलिसियों की समीक्षा कर सकते हैं. घर बैठे इंश्‍योरेंस एक हकीकत है. जैसा कि अक्‍सर देखने को मिलता है कि लोग एक ही बार के निर्णय में बीमा ले लेते हैं, लेकिन अन्‍य निवेश की तरह ही, बीमा के बारे में भी समय देकर ध्‍यानपूर्वक इसकी समीक्षा जरूरी होती है, ताकि आप और आपका परिवार हमेशा ही सर्वोत्‍तम तरीके से सुरक्षित रहे. जब जीवन में अनिश्चितताओं की तुलना में निश्चितताएं अधिक हों तो जीवन सही मायने में सफल व खुशहाल होता है.