7 लाख निवेशकों को बचाने आगे आई LIC

  • वेदांता का डी-लिस्ट ऑफर अंतत: विफल
  • 87 रुपए ऑफर मूल्य, 320 रुपए तक आई बोली

मुंबई. शेयर बाजार में अनेक कंपनियां ऐसी हैं, जो अपने निवेशकों को हमेशा अच्छा रिटर्न प्रदान करने की मंशा रखती है. जैसे टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो, त्रिवेणी इंजीनियरिंग, बलरामपुर चीनी इत्यादि. और इनके विपरीत कुछ ऐसी लालची कंपनियां हैं, जो अपने निवेशकों को नुकसान देकर केवल अपना फायदा करना चाहती हैं. करीब 12 अरब डॉलर के कारोबार वाली वेदांता लिमिटेड के प्रमोटरों ने भी केवल अपना फायदा देखा और 87 रुपए के एकदम न्यूनतम भाव पर 7 लाख से अधिक अल्पांश शेयरधारकों से सभी 169.74 करोड़ शेयर खरीद कर कंपनी को डी-लिस्ट कराना चाहा, परंतु निवेशकों के हित में एलआईसी के कड़े रूख से उसका यह प्रयास विफल हो गया है. अंतत: वेदांता को शनिवार शाम को अपना शेयर बाय बैक ऑफर रद्द करने की घोषणा करनी पड़ी. 

कौड़ियों के भाव शेयर खरीदने की मंशा पर फिरा पानी

जहां टाटा ग्रुप की शीर्ष कंपनी टीसीएस अपने सर्वोच्च शेयर भाव से भी 10 प्रतिशत प्रीमियम यानी 3,000 रुपए प्रति शेयर मूल्य पर 5.33 करोड़ शेयरों की पुनर्खरीद (बायबैक) कर रही हैं और निवेशकों को भरपूर फायदा दे रही हैं, वहीं उद्योगपति अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता ने 87 रुपए के न्यूनतम भाव पर पूरी 47.67% पब्लिक होल्डिंग खरीदने के लिए पुनर्खरीद पेशकश जारी की. लेकिन इतने कम भाव पर वेदांता के निवेशक अपने शेयर बेचने को तैयार नहीं हुआ. इसके डी-लिस्ट ऑफर में अधिकांश बोली 130 रुपए से लेकर 320 रुपए मूल्य पर आई. नतीजन वेदांता के प्रमोटरों के कौड़ियों के भाव पर शेयर खरीदने के मंसूबों पर पानी फिर गया है.

क्यों रद्द करनी पड़ी पुनर्खरीद पेशकश?

अरबपति अनिल अग्रवाल के नियंत्रण वाली वेदांता लिमिटेड देश की एक बड़ी कंपनी है, जो तेल-गैस, एल्युमिनियम, स्टील, कॉपर, जिंक, सिल्वर और पावर की बड़ी उत्पादक है. यह हमेशा लाभप्रद और लाभांश प्रदाता कंपनी रही है, हालांकि पिछली तिमाही में इसने घाटा दिखाया. लेकिन इस संबंध में कुछ निवेशकों का कहना है कि कंपनी ने डी-लिस्ट ऑफर लाने की योजना पहले ही बना ली थी. तभी भारी घाटा दिखाया. ताकि निवेशक निराश होकर अपने शेयर कंपनी को औने-पौने दाम पर बेच दें. परंतु अधिकांश निवेशक इस मूल्यवान कंपनी के शेयर कौड़ियों के भाव बेचने को तैयार नहीं हुए. सबसे कड़ा रूख एलआईसी ने अपनाया और इतने कम भाव पर अपने शेयर नहीं बेचने का निर्णय लिया. LIC के पास वेदांता के 24 करोड़ शेयर हैं. एलआईसी के कड़े रूख से अन्य सभी निवेशकों को भी हिम्मत आई और अधिकांश ने 130 रुपए से लेकर 320 रुपए मूल्य पर बोली लगाई. ऑफर में कुल 125.47 करोड़ शेयरों की बोली आई, जबकि डी-लिस्ट करने के लिए कंपनी को न्यूनतम 134.10 करोड़ शेयर खरीदने जरूरी थे. शुक्रवार को वेदांता का शेयर 120 रुपए पर बंद हुआ, जो 25 जनवरी 2018 को 345 रुपए पर था. 

LIC के विरोध से फेल हुआ ऑफर

“वेदांता के अपने निवेशकों से काफी कम भाव पर शेयर खरीदने की कोशिश यदि विफल हुई है तो उसका श्रेय देश की प्रमुख बीमा कंपनी एलआईसी को जाता है. वेदांता के सस्ते ऑफर का किसी संस्थागत निवेशक ने विरोध नहीं किया, लेकिन एलआईसी ने ही विरोध किया. छोटे निवेशकों के हित में आगे आते हुए शुक्रवार को एलआईसी ने यह एलान किया कि वह इतने कम भाव पर वेदांता के शेयर नहीं बेचेगी. वेदांता के शेयर की फेयर वैल्यू 320 रुपए है. इसलिए इससे कम भाव पर बेचने का कोई औचित्य नहीं है. इस मामले में सभी म्युचुअल फंडों के साथ ‘सेबी’ की चुप्पी आश्चर्यजनक है. यह चुप्पी क्यों?” –जी. राजारामन, शेयरधारक 

छोटे निवशकों की बड़ी जीत

“पहली बार अनिल अग्रवाल और वेदांता ग्रुप को बड़ा झटका लगा है. यह वही ग्रुप है, जिसने आज से तीन दशक पूर्व निवेशकों के शेयर जब्त कर लिए थे और उन्हें मुवाअजे के तौर पर चैक भेजे थे. जिस निवेशक ने उस चैक को भुना लिया था, उसके शेयर रद्द कर दिए गए थे. ऐसा निवेशक विरोधी कदम भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास में पहली और आखिरी बार किसी कंपनी ने उठाया था. इस बार वेदांता ग्रुप कंपनी की बुक वैल्यू से भी कम वैल्यू पर शेयर खरीदने की फिराक में था. और जब बुक वैल्यू पर विवाद हो गया तो बिजनेस में घाटे का तर्क देते हुए बुक वैल्यू ही घटा दी. इस पूरे प्रकरण में एलआईसी की भूमिका काबिले तारीफ रही. यह छोटे निवशकों की बड़ी जीत है.” -अरूण केजरीवाल, अध्यक्ष, केजरीवाल रिसर्च