रिलायंस इंडस्ट्रीज बनी शेयर बाजार की बैरोमीटर

  • सेंसेक्स-निफ्टी की तेजी में सर्वाधिक योगदान
  • 10% हिस्सेदारी शेयर बाजार के कुल मार्केट कैप में
  • 56% तेजी आई सेंसेक्स-निफ्टी में
  • 173% तेजी आई रिलायंस के शेयर में

मुंबई. कोरोना महामारी के घोर संकट के बावजूद शेयर बाजारों में जोरदार तेजी आ रही है. इस तेजी से सभी निवेशक आश्चर्यचकित हैं और मंदी की आशंकाओं के विपरीत यह तेजी पिछले 6 महिनों से लगातार जारी है. इस दौरान सबसे ज्यादा तेजी फार्मास्युटिकल्स, फार्मा केमिकल, आईटी और एफएमसीजी कंपनियों के शेयरों में आई है. क्योंकि कोविड महामारी से ये ही क्षेत्र अप्रभावित रहे हैं और फायदा भी इन्हें ही सबसे ज्यादा हुआ है. पिछले 6 महिनों में सेंसेक्स और निफ्टी में 56% की तेजी आ चुकी है. और इस 56% की तेजी में सर्वाधिक एक-तिहाई योगदान दिया है रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने. इस तरह रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर एक तरह से भारतीय शेयर बाजार का बैरोमीटर बन गया है.

सेंसेक्स में रिलांयस का सर्वाधिक 17.80% वेटेज

कोरोना महामारी में भी भारत के सबसे धनी उद्योगपति मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज अपने टेलिकॉम और रिटेल कारोबार में एक के बाद एक बड़ा विदेशी निवेश हासिल करती जा रही है, उससे रिलायंस का शेयर तेजी से दौड़ रहा है और नित नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है. मार्च में 867 रुपए तक गिरने के बाद रिलायंस में जो तेजी का क्रम शुरू हुआ, वह लगातार जारी है और आगे भी जारी रहने के आसार हैं. 2368 रुपए की ऊंचाई छूने के बाद अब इसका शेयर 2257 रुपए पर है. मार्च से लेकर अब तक रिलायंस के शेयर में 173% की जोरदार तेजी आ चुकी है. और अब सेंसेक्स  में रिलांयस का वेटेज बढ़ते हुए सबसे अधिक 17.80% हो गया है.  इस तरह सेंसेक्स और निफ्टी में 56% की कुल तेजी में सर्वाधिक योगदान रिलायंस का ही रहा है. यदि रिलायंस में तेजी नहीं आई होती तो शायद सेंसेक्स अब 35,000 अंक से भी नीचे होता, जो 40,010 अंक का स्तर छूने के बाद अब 39,878 अंक पर है. 

15 लाख करोड़ से अधिक हुआ मार्केट कैप

अब रिलायंस इंडस्ट्रीज देश की सबसे मूल्यवान कंपनी बन गई है. इसका कुल मार्केट कैप 15.26 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जो जनवरी 2020 में 9.56 लाख करोड़ रुपए था. और मार्च 2011 में तो सिर्फ 3.40 लाख करोड़ रुपए था. यहीं नहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज का कुल मार्केट कैप शेयर बाजार में लिस्टेड सभी कंपनियों के 10% के बराबर हो गया है.   

‘संकट को अवसर में बदलने’ का बेहतरीन उदाहरण

सदी के सबसे भीषण संकट में भी जिस तरह मुकेश अंबानी ने अपने कारोबारी विजन से दुनिया के बड़े संस्थागत निवेशकों को आकर्षित किया, वह नि:संदेह सभी के लिए ‘संकट को अवसर में बदलने’ का बेहतरीन उदाहरण है. अपनी आक्रामक व्यावसायिक शैली के लिए विख्यात मुकेश अंबानी ने पहले अपने टेलिकॉम कारोबार ‘जियो प्लेटफार्म’ में दुनिया के 13 बड़े निवेशकों और कंपनियों को 33% हिस्सेदारी बेचकर 1.52 लाख करोड़ रुपए की रिकार्ड रकम जुटायी और अब रिटेल कारोबार ‘रिलायंस रिटेल’ में 8 ग्लोबल निवेशकों को 8.5% हिस्सेदारी बेचकर 37,700 करोड़ रुपए का भारी निवेश हासिल कर लिया है. रिलायंस रिटेल में आगे और निवेश आने की उम्मीद है.     

शेयर बाजार अब अर्थव्यवस्था का बैरोमीटर नहीं?

शेयर बाजार को हमेशा देश की अर्थव्यवस्था का बैरोमीटर माना जाता रहा है, लेकिन यह बात कोविड महामारी के घोर संकट में लागू नही हुई. दुनिया भर में इतना बड़ा संकट आया, लेकिन शेयर बाजारों की चाल इसके विपरीत रही. हालांकि महामारी और लॉकडाउन की शुरूआत में मार्च में अवश्य बाजार औंधे मुंह गिरे. दुनिया के अन्य बाजारों के साथ सेंसेक्स और निफ्टी में भी 39% तक की बड़ी गिरावट आई. ये दोनों मुख्य इंडेक्स 4 साल के निचले स्तर पर आ गए. तब सभी को लगा कि अब और भयानक मंदी आएगी. क्योंकि कोरोना तो बहुत बड़ा आर्थिक संकट का कारण बनेगा. और भीषण आर्थिक मंदी आई भी. दुनिया के अन्य बड़े देशों के साथ पहली तिमाही में भारत की जीडीपी दर में 23.9% की रिकार्ड गिरावट दर्ज हुई.  परंतु इसका शेयर बाजार पर कोई असर दिखाई नहीं दिया और सभी आशंकाओं के विपरीत अप्रैल से शेयर बाजारों में फिर तेजी शुरू हो गई. वैसे यह तेजी भारत के शेयर बाजारों में ही नहीं दुनिया के सभी शेयर बाजारों में आती रही. यह तेजी अमेरिका की अगुवाई में आई. अमेरिका के बाद अन्य सभी बड़े देशों ने अर्थव्यवस्थाओं को संकट से उबारने बड़े-बड़े मौद्रिक राहत पैकेज दिए. जिससे बाजारों में नकदी खूब बढ़ती गई और साथ ही भारी सट्टेबाजी से तेजी को बल मिलता गया. वैश्विक तेजी का यह क्रम अमेरिकी चुनावों तक जारी रह सकता है.