ऑनलाइन कंपनियों का कड़ा विरोध

  • व्यापारियों का 40 दिवसीय देशव्यापी आंदोलन
  • 7% से बढ़कर 24% हुआ ई-कॉमर्स कारोबार

मुंबई. देश के खुदरा व्यापार में तेजी से पैर पसार कर भारतीय ‍व्यापारियों के लिए खतरा बनती विदेशी ऑनलाइन यानी ई-कॉमर्स कंपनियों (E-commerce companies) के खिलाफ व्यापारी (trader) लामबंद हो रहे हैं. थोक और खुदरा व्यापारियों के शीर्ष संगठन ‘कैट’ ने बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ 40 दिवसीय देशव्यापी आंदोलन (protest) ‘निर्णायक युद्ध’ नाम से शुरू किया है. यह कड़ा विरोध 31 दिसंबर तक जारी रहेगा.

कन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) का आरोप है कि ई-कॉमर्स कंपनियां अपनी मनमानी करने के साथ ही भारत की एफडीआई पॉलिसी (FDI policy) का खुलेआम उल्लंघन कर रही हैं. इसलिए देशभर में 40 दिन तक अमेजन समेत सभी ई-कॉमर्स पोर्टल का विरोध होगा. मुंबई सहित पूरे महाराष्ट्र के व्यापारी भी सोमवार से ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ असहयोग करने के साथ धरना-प्रदर्शन करेंगे और हर जिले में डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर को प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा जाएंगा.

सरकारी नीतियों की उड़ा रही धज्जियां

‘कैट’ के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि कोरोना से पहले कुल ऑनलाइन व्यापार केवल 7% था, वो अब बढ़कर 24% हो गया है. यदि जल्द ही इन ई-कॉमर्स कंपनियों को नहीं रोका गया तो ये भारतीय ‍व्यापारियों का व्यापार तबाह कर देंगी. इस आंदोलन का उद्देश्य उन ई-कॉमर्स कंपनियों को बेनकाब करना है, जो सरकार की नीतियों की धज्जियां उड़ा रही हैं और देश के रिटेल व्यापार पर कब्जा करने के मंसूबे पाले हुए हैं. आंदोलन के दौरान हम सरकार पर भी दबाव बनाएंगे. क्योंकि हमारे बार-बार आग्रह के बावजूद रिटेल व्यापार के लिए अलग नियामक का गठन नहीं किया जा रहा है. इसलिए ई-कॉमर्स कंपनियों की मनमानी बढ़ती जा रही है. हम सरकार के समक्ष कई मांगें रखेंगे.

लीक हो रहे हैं लोगो के डेटा

संगठन का आरोप है कि अनेक बैंक भी इनके पोर्टल पर खरीद करने पर कई तरह के कैश बैक और डिस्काउंट देकर इन कंपनियों के साथ अनैतिक गठबंधन में शरीक हैं. यही नहीं बड़ी मात्रा में देश का डेटा इन कंपनियों को एक योजनाबद्ध तरीके से लीक किया जा रहा है. जैसे कि यदि किसी सरकारी योजना के तहत कोई चीज बुक कराई जाती है तो तुरंत उस व्यक्ति के पास इन कंपनियों का मैसेज पहुंच जाता है. जिससे साफ है कि भारत के रिटेल बाजार को कब्जा करने का एक सोचा-समझा षड्यंत्र चल रहा है.

…तो बेरोजगारी और फैलेगी

खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष शंकर ठक्कर ने कहा कि विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों ने लागत से भी कम मूल्य पर माल बेचना, भारी डिस्काउंट देना, सामान की इन्वेंट्री पर अपना नियंत्रण रखना, बड़े ब्रांड वाली कंपनियों से साठ-गांठ कर उनके प्रोडक्ट केवल अपने पोर्टलों पर ही बेचने जैसी व्यापारिक तिकड़म से छोटे व्यापारियों का व्यापार बुरी तरह तबाह कर दिया है. देश के 7 करोड़ छोटे-बड़े व्यापार से 40 करोड़ लोगों रोजगार मिलता है, यदि भारतीय थोक-खुदरा व्यापारियों की दुकानें बंद हुई तो बेरोजगारी और तेजी से फैलेगी. इसलिए हम ई-कॉमर्स कंपनियों की खिलाफत के लिए मजबूर हैं.

व्यापारियों की प्रमुख मांगें

  • केंद्र सरकार ई-कॉमर्स पॉलिसी की तुरंत घोषणा हो.
  • ई-कॉमर्स रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन किया जाए.
  • एफडीआई पॉलिसी के प्रेस नोट 2 की खामियों को दूर कर नया प्रेस नोट जारी करे.
  •  केंद्र और राज्य सरकारें इन कंपनियों को अपने राज्य में माल बेचे जाने से रोकें.