सीमेंट कीमतों में उछाल, बिल्डर चिंतित, 8-10 रुपए महंगी हुई सीमेंट

  • 394 रुपए तक पहुंचे सीमेंट दाम
  • 20% तक बढ़ी भवन निर्माण लागत

मुंबई. त्योहारी सीजन शुरू होने के साथ ही सीमेंट कंपनियों (Cement Companies) ने कीमतें फिर बढ़ानी शुरू कर दी है। करीब तीन महीने दाम लगभग स्थिर रखे जाने के बाद सीमेंट बनाने वाली सभी कंपनियों ने प्रति बैग 8 से 10 रुपए की वृद्धि की है। यह वृद्धि हमेशा की तरह पहले एसीसी, अंबुजा और अल्ट्राटेक जैसी बड़ी कंपनियों ने की। इनका अनुसरण करते हुए तत्काल ही अन्य छोटी-मझौली कंपनियों ने भी मूल्य वृद्धि कर दी है। 

स्टील कीमतें (Steel Prices) पहले ही उच्च स्तरों पर चल रही हैं। अब सीमेंट (Cement) और महंगा होने से बिल्डरों (Builders) और ठेकेदारों (Contractors) की चिंता भी बढ़ गयी है। क्योंकि इससे उनकी लागत भी बढ़ रही है। पिछले 6 महीनों में लागत 20% तक बढ़ चुकी है।

त्योहारों में हर साल की जाती है मूल्य वृद्धि

सीमेंट वितरकों का कहना है कि त्योहारी सीजन में मांग बढ़ती देख कंपनियां तकरीबन हर साल दाम बढ़ा देती हैं। इस साल भी यही नीति अपना रही है। एक सितंबर से नॉन ट्रेड में यानी बिल्डरों और ठेकेदारों को सीधे आपूर्ति की जाने वाली सीमेंट के दाम बढ़ाए गए और बीते शुक्रवार से ट्रेड यानी रिटेल में बेचे जाने वाली सीमेंट भी महंगी कर दी। इस मूल्य वृद्धि के बाद तीनों प्रमुख ब्रांडों की पीपीसी और ओपीसी ग्रेड सीमेंट के रिटेल दाम 389 से 394 रुपए प्रति बैग (28% GST सहित) हो गए हैं। जबकि नॉन ट्रेड में इनके दाम 358 से 363 रुपए हो गए हैं।

छोटे सीमेंट ब्रांड भी हुए महंगे

इंडिया सीमेंट, श्री सीमेंट, भारती, ओरियंट, वासवदत्ता, जेके लक्ष्मी, बिनानी जैसे छोटे सीमेंट ब्रांडों के रिटेल दाम 350 से 360 रुपए प्रति बैग (50 किलो) तक पहुंच गए हैं। नॉन ट्रेड में इन ब्रांडों के दाम 325 से 335 रुपए बोले जा रहे हैं। हालांकि कंपनियों ने मूल्य वृद्धि का कारण डीजल, कोल और पेटकोक महंगा होने से अपनी उत्पादन लागत बढ़ना बताया है।   

कीमतें और बढ़ने की संभावना

वितरकों का कहना है कि मानसून में मांग कमजोर रहती है। इसलिए कंपनियां दाम नहीं बढ़ाती है। और मानसून के बाद त्योहारी सीजन शुरू होते ही मांग निकलने लगती है। इस बार भी मांग कुल मिलाकर अच्छी है। सरकारी इंफ्रा परियोजनाओं के साथ रियल्टी सेक्टर की भी मांग बढ़ रही है। कीमतें और बढ़ने की संभावना है। मानसून और पितृपक्ष के बाद अक्टूबर में कंपनियां 10 से 15 रुपए और बढ़ा सकती है। तब दाम नई ऊंचाईयों पर पहुंच सकते हैं।

500 रुपए प्रति वर्गफुट बढ़ी लागत

नरेडको (NAREDCO) की महाराष्ट्र वरिष्ठ उपाध्यक्ष मंजू याज्ञनिक ने कहा कि भवन निर्माण सामग्री सीमेंट-स्टील कीमतों में लगातार वृद्धि और डीजल-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों ने निर्माण लागत में न्यूनतम 400-500 रुपए प्रति वर्गफुट की वृद्धि की है, जबकि डेवलपर्स अभी भी कोविड संकट से अभी तक पूरी तरह उबरे नहीं है। डेवलपर्स काफी समय से लागत को अवशोषित कर रहे हैं, लेकिन अब यह कठिन होता जा रहा है। केंद्र व राज्य सरकारों को इस मुद्दे पर तत्काल ध्यान देना चाहिए।

मनमानी पर अंकुश लगाए सरकार

क्रेडाई-एमसीएचआई (CREDAI-MCHI) के ठाणे अध्यक्ष जितेंद्र मेहता ने कहा कि सीमेंट की निर्माण लागत अवश्य बढ़ी है, लेकिन मूल्य वृद्धि उससे ज्यादा की जा रही है। केंद्र सरकार की चेतावनी को नजरअंदाज कर कंपनियां मूल्य वृद्धि कर भारी मुनाफा बटोर रही हैं। सीमेंट-स्टील महंगा होने से बिल्डरों के साथ जन इंफ्रा परियोजनाओं की लागत भी बढ़ रही है। विगत 6 महीनों में हमारी लागत 20% तक बढ़ गयी है। जिससे मार्जिन खत्म हो चला है। इसलिए हमारा प्रधानमंत्री से आग्रह है कि जल्द इस मामले में जल्द ठोस कदम उठाकर सीमेंट-स्टील कंपनियों की मनमानी पर अंकुश लगाया जाए।