इक्वल वेट ETF देते हैं अधिक रिटर्न : अनिल घेलानी

  • विश्व स्तर पर ज्यादा प्रचलित हैं ETF
  • DSP म्युचुअल फंड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनिल घेलानी से की बातचीत

मुंबई : म्युचुअल फंड हाउस अर्थव्यवस्था (Economy) और बाजार (Stock Market) में बदलते ट्रेंड यानी हवा के रूख के अनुसार अपनी निवेश रणनीति (Investment Strategy) में भी कुछ परिवर्तन करते रहते हैं और अलग-अलग थीम (Theme) पर ध्यान केंद्रित करते हैं। अब कई म्युचुअल फंड पैसिव फंड यानी ईटीएफ फंडों ( Exchange Traded Fund) पर फोकस कर रहे हैं।

विकसित देशों में तो ईटीएफ फंड काफी प्रचलित हैं और इनका कोष 9.7 ट्रिलियन डॉलर है, जिसमें से इक्वल वेटेड स्ट्रैटेजी फंडों का 103 बिलियन डॉलर से अधिक का है। क्योंकि इनमें कम जोखिम (Low Risk) के साथ अधिक रिटर्न (Higher Returns) मिलने की संभावना रहती है। 1.11 लाख करोड़ रुपए से अधिक के प्रबंधन कोष (एयूएम) वाले देश के अग्रणी फंड हाउस डीएसपी म्युचुअल फंड (DSP Mutual Fund) ने भी ‘डीएसपी निफ्टी 50 इक्वल वेट ईटीएफ’ (DSP Nifty 50 Equal Weight ETF) पेश किया है, जो निफ्टी इक्वल वेटेड स्ट्रैटेजी वाला भारत का पहला एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) है।

ईटीएफ थीम, मार्केट आउटलुक और निवेश रणनीति से संबंधित मुद्दों पर DSP म्युचुअल फंड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनिल घेलानी से  वाणिज्य संपादक विष्णु भारद्वाज की बातचीत हुई। पेश हैं उसके मुख्य अंश:

डीएसपी के निफ्टी इक्वल वेट ईटीएफ की निवेश रणनीति क्या रहेगी ?

हमारे इस नए फंड का निवेश फार्मूला एकदम आसान है। ‘निफ्टी इक्वल वेट ईटीएफ’ काफी सरल थीम पर क्वालिटी स्टॉक का डाइवर्सिफाई पोर्टफोलियो तैयार करेगा। यह निफ्टी इंडेक्स (Nifty Index) में शामिल सभी 50 ब्ल्यूचिप स्टॉक्स में समान रूप से यानी इक्वल वेट (Equal Weight) देते हुए प्रत्येक स्टॉक में केवल 2% ही निवेश करेगा। जबकि निफ्टी इंडेक्स में फ्री फ्लोट मार्केट कैप के हिसाब से हर स्टॉक का अलग वेटेज यानी किसी का बहुत ज्यादा तो किसी का बहुत कम। जैसे रिलायंस (RIL) का 11% तो HDFC बैंक का 9% वेटेज है, लेकिन टाटा मोटर्स (Tata Motors) का 0.8% तो टाटा स्टील का 1.2% ही है। इससे हर सेक्टर की तेजी का समान रूप से फायदा नहीं मिलता है। अब चूंकि इकनॉमी और मार्केट में ब्रॉड बेस्ड रैली आ रही है तो लगभग हर सेक्टर ग्रोथ कर रहा है। इसलिए अब इक्वल वेट इन्वेस्टमेंट की रणनीति अधिक प्रभावी सिद्ध होगी।

शॉर्ट या लॉन्ग टर्म में इक्वल वेट नीति अपनाने पर निफ्टी का रिटर्न क्या रहा है ?

दोनों ही अवधि में निफ्टी 50 इक्वल वेट इंडेक्स का रिटर्न निफ्टी 50 इंडेक्स से अधिक रहा है। शॉर्ट टर्म में देखे तो पिछले एक साल में निफ्टी ने 57% का रिटर्न दिया है। जबकि इक्वल वेट ईटीएफ निफ्टी इक्वल वेट इंडेक्स का रिटर्न 20% ज्यादा यानी 77% रहा है। हालांकि कुछ ऐसे पीरियड भी रहे हैं, जब निफ्टी 50 इंडेक्स ने ऑउटपरफॉर्म भी किया है, परंतु जब भी हम लॉन्ग टर्म में भी यानी विगत 20 वर्षों में देखे तो निफ्टी 50 इक्वल वेट इंडेक्स का वार्षिक रिटर्न (CAGR) 2% ज्यादा ही रहा है। हालांकि जब बाजार में मंदी आती है तो इक्विटी में नुकसान का जोखिम भी रहता है। एक अहम फैक्टर यह भी है कि मंदी में इक्वल वेट स्ट्रैटेजी हमें कम नुकसान देती है। क्योंकि डिफेंसिव स्टॉक में गिरावट हमेशा कम आती है और इक्वल वेट ईटीएफ का डिफेंसिव स्टॉक में भी समान रूप से निवेश रहता है। इस तरह निफ्टी 50 इक्वल वेट इंडेक्स ईटीएफ में कम रिस्क के साथ अधिक रिटर्न मिलने की संभावना होती है। इसीलिए विश्व स्तर पर इक्वल वेट नीति ज्यादा प्रचलित हैं।

क्या इकनॉमी और मार्केट में चौतरफा तेजी आती दिख रही है?

ऐसा है कि कोविड का बड़ा संकट झेलने के बाद इंडियन इकनॉमी में तेज रिकवरी आ रही है और यह रिकवरी ग्रोथ में तब्दील होकर लगभग हर सेक्टर में आ रही है। इस साल जीडीपी ग्रोथ (GDP Growth) 9.5% और अगले साल 8 से 8.5% रहने का अनुमान है। इस तरह दो साल तो अच्छी ग्रोथ दिख रही है। हम देख भी रहे हैं कि अधिकांश सेक्टर्स यानी उद्योग क्षेत्रों की कंपनियों का कारोबार और मुनाफा दोनों बढ़ रहा है। जब हर सेक्टर में ग्रोथ है तो इकनॉमी और मार्केट में चौतरफा ही तेजी आएगी।

तेल और अन्य कमोडिटीज की बढ़ती कीमतें चिंता का विषय बन रही है। क्या इसका मार्केट सेंटीमेंट पर निगेटिव असर नहीं होगा ?

यह चिंता का विषय अवश्य है, लेकिन इसका पूरे मार्केट पर ज्यादा निगेटिव इम्पैक्ट नहीं होगा। उन कुछ सेक्टर के शेयरों पर पर हो सकता है। जिन सेक्टर की कंपनियों के प्रॉफिट पर बढ़ती कीमतों के कारण मार्जिन प्रेशर आ रहा है। क्योंकि अधिकांश क्षेत्रों की कंपनियों का कारोबार भी तो बढ़ रहा है। जिससे साथ ही साथ मुनाफा बढ़ रहा है। हालांकि महंगाई (Inflation) विश्व स्तर पर बढ़ रही है और इसके कारण जनवरी से अमेरिका (US) में ब्याज दरें (Interest Rates) बढ़ने की आशंका है, जो मार्केट के लिए निगेटिव फैक्टर है। तब एक हेल्दी करेक्शन (Healthy Correction) आ सकता है।

वर्तमान में आप कौनसे सेक्टर में पॉजिटिव हैं ?

वर्तमान में हमारी यह निफ्टी इक्वल वेट नीति में हम ऑटो (Auto), मेटल (Metals) और फार्मा (Pharma) में पॉजिटिव हैं और बैंकिंग (Banking) व आईटी (IT) में अंडरवेट हैं। जबकि अन्य सेक्टर्स में न्यूट्रल हैं।