इन दमदार किरदारों के वजह से अमरीश पुरी बने सबसे बड़े खलनायक

मुंबई, हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की कोई भी फिल्म बिना विलेन की अधूरी लगती है. बॉलीवुड में हीरो के साथ साथ खलनायक के किरदार को भी काफी पसंद किया जाता है. आज ऐसे हे एक खलनायक की पुण्यतिथि है,

मुंबई, हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की कोई भी फिल्म बिना विलेन की अधूरी लगती है. बॉलीवुड में हीरो के साथ साथ खलनायक के किरदार को भी काफी पसंद किया जाता है. आज ऐसे हे एक खलनायक की  पुण्यतिथि  है, जिनका नाम है अमरीश पूरी. अमरीश पुरीबॉलीवुड के सबसे खतरनाक खलनायक में से एक थे. उन्होंने अपने फ़िल्मी करियर में एक से बढ़कर एक खलनायक के किरदार निभाए. उनके किरादर के साथ उनके डायलॉग भी आज तक लोगो को याद है. अमरीश पुरी का जन्म 22 जून 1932 को हुआ था और 12 जनवरी 2005 को उन्होंने ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया. आज अमरीश पुरी के पुण्यतिथि के अवसर पर जानते है उनके कुछ दमदार लुक्स के बारे में

मेरी जंग (1985)
1985 में सुभाष घई के निर्देशन में बनी फिल्म ‘मेरी जंग’ में अमरीश पुरी एडवोकेट जी.डी. ठकराल के किरदार में नजर आए. इस फिल्म में अमरीश पुरी के साथ-साथ अनिल कपूर, मीनाक्षी शेषाद्री, नूतन, जावेद जाफरी और परीक्षित साहनी मुख्य भूमिका में थे. इस फिल्म में अमरीश पुरी ने अनिल कपूर के साथ खूब कानूनी दांवपेंच लड़ाए.इस दमदार किरदार के लिए अमरीश पुरीको फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का खिताब दिया गया.

नगीना (1986 )
साल 1986 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म नगीना में अमरीश पुरी ने बाबा भैरवनाथ का किरदार निभाया था.एक सपेरे के किरदार को अमरीश ने बखूबी निभाया था.न सिर्फ एक्टिंग बल्कि लुक्स से भी अमरीश ने जमकर सुर्खियां बंटोरी थीं.इस फिल्म में अमरीश पुरीके अलावा ऋषि कपूर, श्रीदेवी,प्रेम चोपड़ा नजर आए थे.इस फिल्म का निर्माण और निर्देशन हरमेश मल्होत्रा ने किया. 

मिस्टर इंडिया (1987)
1987 में रिलीज हुई ‘मिस्टर इंडिया’ में अमरीश पुरी का किरदार अमर माना जाता है.आज भी डायलॉग ‘मोगैंबो खुश हुआ’लोगों की जुबां पर चढ़ा रहता है।मोगैम्बो चरित्र को बॉलीवुड के इतिहास में सबसे अच्छे खलनायकों में से एक माना जाता है. सलीम-जावेद द्वारा लिखी गई और शेखर कपूर द्वारा निर्देशित इस फिल्म में प्रमुख भूमिकाओं को अनिल कपूर और श्री देवी द्वारा निभाया गया है.अमरीश पुरी, अशोक कुमार, सतीश कौशिक, अजीत वाच्छानी और शरत सक्सेना को सहायक भूमिका निभाने वालों में शामिल किया गया है.

त्रिदेव (1989)
साल 1989 में आयी फिल्म ‘त्रिदेव’ में एक बार फिर अमरीश पुरीदमदार किरदार में नजर आए. इस फिल्म में सनी देओल, माधुरी दीक्षित, जैकी श्राफ, नसीरूद्दीन शाह, संगीता बिजलानी और अनुपन खेर नजर आए थे. राजीव राय के निर्देशन में बनी फिल्म त्रिदेव में सारे किरदारों से अलग भैरो सिंह का किरदार अपना अंदाज था.इस फिल्म ने तीन फिल्मफेयर अवॉर्ड अपन नाम किए.अमरीश पुरी को उनके शानदार अभिनय के लिए फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के लिए नामित किया गया .

सौदागर (1991)
साल 1991 में सुभाष घई के निर्देशन में बानी सौदागर में अमरीश पुरी के लिए बड़ी चुनौती थी. अमरीश पुरी को उस वक्त के बेहतरीन  दो सबसे बड़े अदाकारों दिलीप कुमार और राजकुमार के सामने एक प्रभावशाली विलेन बनना था. अमरीश पुरी ने सारी चुनौतियों को पार करते हुए चुनिया चंद उर्फ चुनिया मामा के किरदार को बेहतरीन तरीके से निभाया. इस फिल्म में दमदार विलेन का किरदार निभाने के लिए अमरीश पुरी को फिल्मफेयर बेस्ट विलेन के लिए नामित किया गया.इसी फिल्म से सुभाष घई को बेस्ट निर्देशक के तौर पर उनका एकमात्र फिल्मफेयर पुरस्कार मिला. 

तहलका (1992)
1968 की हॉलीवुड फिल्म व्हेयर ईगल्स डेयर पर आधारित फिल्म तहलका में अमरीश पुरी एक खूंखार विलेन जरनल डांग के रूप में नजर आए.अनिल शर्मा के निर्देशन में बनी इस फिल्म में अमरीश पुरी के साथ-साथ धर्मेंद्र, मुकेश खन्ना, आदित्य पंचोली, जावेद जाफरी और शिखा स्वरूप जैसे कई कलाकार मुख्य भूमिका में थे.इस फिल्म में अमरीश पुरी का डायलॉग- ‘डांग कभी रॉन्ग नहीं होता’ प्रचलित हुआ और यह आज भी लोगों की पसंद बना हुआ है.

करन अर्जुन (1995)

साल 1995 में राकेश रोशन के निर्देशन में बनी फिल्म ‘करन अर्जुन’ में अमरीश पुरी ने दमदार विलेन का किरदार निभाया. इस फिल्म में हिंदी सिनेमा के दो खान शाहरुख खान और सलमान खान एक साथ नजर आए.  ठाकुर दुर्जन सिंह के किरदार में अमरीश पुरी का एक बार फिर वही दमदार आवाज और रोबीला व्यक्तित्व पर्दे पर छा गया. इस फिल्म ने दो फिल्मफेयर पुरस्कार जीते और अमरीश पुरी को एक बार फिर से फिल्मफेयर बेस्ट विलन के पुरस्कार के लिए नामित किया गया.

दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे(1995)
साल 1995 में रिलीज हुई फिल्म  दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे में अमरीश पुरी ने एक सख्त और जिम्मेदार पिता चौधरी बलदेव सिंह उर्फ बाबूजी की भूमिका निभाई.इस फिल्म का निर्देशन प्रसिद्ध फिल्म निर्माता और निर्देशक यश चोपड़ा के पुत्र आदित्य चोपड़ा ने किया.शाहरुख खान, काजोल और अमरीश पुरी इसके प्रमुख कलाकारों में थेफिल्म में अमरीश पुरी द्वारा बोला गया डायलॉग, ‘जा सिमरन जा, जा… जी ले अपनी जिंदगी’ आज भी लोगों की जुबां पर छाए रहता है.यह फिल्म सुपरहिट रही और इस फिल्म ने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार सहित 10 फिल्मफेयर पुरस्कार अपनी झोली में डाले.बेहतरीन अभिनय के लिए एक बार फिर से अमरीश पुरी को फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के तौर पर नामित किया गया. 

कोयला (1997)

1997 में एक बार फिर अमरीश पुरी ने राकेश रोशन के निर्देशन में काम किया.इस फिल्म में अमरीश पुरी के आलावा शाहरुख खान, माधुरी दीक्षित और जॉनी लीवर मुख्य किरदार निभा रहे थे.इस फिल्म में अमरीश पुरी ने एक बार फिर खलनायक राजा साब का किरदार निभाया.इस किरदार में अमरीश पुरी को खूब पसंद किया गया और उम्दा अभिनय के लिए उन्हें एक बार फिर से फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के खिताब के लिए नामित किया गया.

गदर एक प्रेम कथा (2001)
साल 2001 में अनिल शर्मा के निर्देशन में बनी फिल्म  ‘गदर एक प्रेम कथा’  में अमरीश पुरी एक पाकिस्तानी राजनेता अशरफ अली के किरदार में नजर आए. इस फिल्म में सनी देओल और अमीषा पटेल मुख्य भूमिका में नजर आए थे.  फिल्म में अमरीश पुरी समेत सभी कलाकारों ने कमाल का अभिनय किया जिसके लिए इस फिल्म ने दो फिल्मफेयर अवार्ड जीते.आठ अन्य फिल्मफेयर पुरस्कारों की कैटेगरी में इस फिल्म को नामित किया गया.

नायक (2001)
साल 2001 में आई फिल्म ‘नायक’ में अमरीश पुरीका बलराज चौहान वाला किरदार आखिरी सुपरहिट किरदार था.फिल्म में वह एक मुख्यमंत्री के रोल में थे.इस फिल्म को भी लोगों ने खूब सराहा था।इस फिल्म में अमरीश पुरी के अलावा अनिल कपूर,रानी मुखर्जी, परेश रावल, पूजा बत्रा,  जॉनी लीवर नजर आए थे.
पूजा बत्रा,