जिप अध्यक्षा की तत्परता से बची 11 महिलाओं की जान

  • जान मुठ्ठी में लिए मचान पर बैठी रही महिलाएं

मूल. मूल तहसील के करवन कोटा गावं की निवासी 11 महिलाएं सुबह के समय गांव से सटे जंगल में लकडीयां इकठ्ठा करने गई. परंतु वहां जंगल में एक वन्यप्राणी दहाड सुनकर उससे बचने हेतु सभी महिलाए वनविभाग के मचान पर चढ गई. वन्यप्राणी से बचने के लिए 2 घंटे तक मचान पर जान मुठ्ठी में लेकर बैठी रही. महिलाओं ने जिप अध्यक्षा संध्या गुरनूले से संपर्क कर सहायता मांगी. गुरनूले ने बिना किसी समय गवाए वनविभाग की सहायता से संबंधित 11 महिलाओं की जान बचाई. 

ग्रामीण महिलाए लकडीयों को इकठ्ठा कराने हेतु सुबह जंगल की ओर निकल पडते है. सुबह जंगल में लकडीयां चुनते समय अचानक महिलाओं को बाघ की वन्यप्राणी की दहाड सुनाई दी. उससे बचने के लिए मचान पर चढ गई. इस समय महीलाओं का पसीना छुट रहा था. उनमे से एक महीला के पास जिला परिषद अध्यक्षा संध्या गुरनूले का नंबर था.

उन्होने तत्काल गूरनूले को फोन कर समस्या से अवगत कराया. उन्होने ने बिना समय गवाए मूल उपविभागीय अधिकारी खेडेकर से संपर्क कर घटनास्थल पहुची व तत्काल बचाव दल को सहायता के लिए भेजने की सूचना की. बचाव दल ने घटनास्थल पहुचकर महीलाओं को बचाने में सफलता हासिल की. तत्पश्चात जिप अध्यक्षा गुरनूले ने महिलाओं से मिलकर हाल जाना. जिप अध्यक्षा ने तत्काल बाघ के बंदोबस्त की मांग की. 

जिप अध्यक्षा गुरनूले के साथ मूल नपा उपाध्यक्ष नंदु रणदिवे, पार्षद प्रशांत समर्थ, करवन सरपंच, पुलिस पाटील मोहन कन्नाके, वनरक्षक बंडु परचाके समेत वनविभाग के अधिकारी, कर्मचारी व ग्रामीण उपस्थित थे.    

यह घटना करवान टोला कक्ष क्रमांक 763 की है. बार_बार गांववासीयों को सूचना देने के बावजूद गांववासी 2 किलोमीटर तक भीतर जंगल में लकडीयां चुनने जाते है. परिसर में बाघ मौजुद होने की पूर्व सूचना ग्रामवासीयों को दी गई है. – बी.के. परचाके, वनरक्षक