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    वरोरा. तहसील के सालोरी जंगल में कुछ दिनों पूर्व गले में लाल फंदा फंसी बाघिन रविवार को कैमरे में कैद हुई है. किंतु यह लापता हुई वही बाघिन है अथवा अन्य कोई इस बात को लेकर तर्क वितर्क लगाए जा रहे है. विशेषज्ञ बाघिन के पट्टों को मैच करने वाले है. जिससे उसकी सही शिनाख्त हो सकेगी.

    वरोरा तहसील के सालोरी वनविभाग के कक्ष क्रं. 11 अंतर्गत आने वाले जंगल में 23 मई को लगभग 10 वर्ष आयु की बाघिन के गले में लाल पट्टा फंसा कैमरे मे दिखाई दिया था. इसके बाद वनविभाग ने बाघिन की तलाश शुरु कर दी थी. क्योंकि फंदा बाघिन के गले में टाईट हो गया तो उसकी जान जाने की संभावना थी. इसलिए वनविभाग की टीम लगातार उसकी तलाश कर रही थी. उसकी हरकतों को कैमरे में कैद करने के लिए 62 कैमरे लगाए गए और बडी संख्या में कर्मचारी तैनात किए.

    बाघिन को पकडने जंगल में पिंजारा लगाकर बकरी बांधी गई. किंतु बाघिन पिंजरे में नहीं आई. परिसर में एक भी शिकार न होने से बाघिन को लेकर अनेक प्रकार के तर्क लगाए जा रहे है. किंतु रविवार की सुबह इसी जंगल परिसर में एक बाघिन कैमरे में कैद हुई. किंतु इस बाघिन के गले में लाल फंदा नहीं था.

    इसकी वजह से फंदा अपने आप निकल गया ऐसी संभावना वनविभाग व्यक्त कर रहा है. जंगल में वन कर्मचारी लगातार गश्त कर रहे है. पगमार्क भी मिले है किंतु बाघिन कैमरे में नहीं आ रही थी. रविवार को कैमरे में आई बाघिन के गले में लाल फंदा न दिखाई देने से फंदा अपने आप निकल गया होगा ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है.

    वन अधिकारी के अनुसार बाघिन के शरीर के पट्टे और पूर्व में दिखाई दी बाघिन के शरीर के पट्टे मेल खाते है अथवा नहीं इसकी जांच की जा रही है. यदि दोनों के पट्टे मेल खा गए तो यह वहीं बाघिन है ऐसा माना जाएगा.