After 5 years, Bodhwasi was deprived of the 'household' of dreams

मनुष्य जीवन में रोटी, कपडा और मकान अति आवश्यक जरुरत है।

  • जनप्रतिनिधियों के अनदेखी का आरोप

ब्रम्हपुरी. मनुष्य जीवन में रोटी, कपडा और मकान अति आवश्यक जरुरत है। किंतु शासन की अनदेखी और राजनीतिज्ञों की उपेक्षा से बोडधा ग्रामवासी 5 वर्ष बाद अपने सपनों के घरों से वंचित है। ग्रामीणों ने दिल्ली तक निवेदन भेजे किंतु तहसील मुख्यालय से 35 किमी दूर स्थित ग्रामीणों का सपना आज भी अधूरा है।

लगभग हजार जनसंख्या की स्वतंत्र बोडधा ग्रापं

तहसील मुख्यालय से कुछ किमी की दूरी पर स्थित बोडधा गांववासी अक्सर समस्याओं से घिरे रहते। क्योंकि गांव के एक दिशा में जंगल होने से हिंसक जानवरों का खतरा बना रहता है। दूसरी ओर वैनगंगा नदी में आने वाले बाढ की वजह से यह गांव वर्षाकाल में सदा समस्यायों से घिरा रहता है। वर्षाकाल के दिनों में तो ग्रामवासी घरों में खाना बना खाकर मचानों पर चढकर सो जाते है। क्योकि वैनगंगा नदी के बाढ का पानी कब उन्हे आगोश में ले ले यह ज्ञात नहीं होता है। इसकी वजह से चार महीनों का जीवन काफी परेशानियों से भरा रहता है। इसके बावजूद चुनावी मौसम में बडे बडे आश्वासनों की खैरात बांटने वालों के पास फिलहाल तो समय नहीं है। लगभग हजार जनसंख्या वाला बोडधा गांव में स्वतंत्र ग्राम पंचायत है। 

आनलाईन न होने से रेंग रहा काम

5 वर्ष पूर्व गांव के घरकुल की ‘ब’ सूची मंजूर हुई थी। सूची जारी होने के बाद ग्रामवासियों को उम्मीद थी कि संभावत अब उनके सपनों का घर साकार हो जाएगा। किंतु बोडधा गांव आनलाईन न होने से एक भी ग्रामवासी का सपना पूरा नहीं हो सका। सरपंच शरद ठाकरे और ग्रापं सदस्य दीपक ठाकरे ने अनेकों बार इस ओर जनप्रतिनिधि और नेताओं का ध्यानाकर्षण किया। किंतु उनके प्रयास निर्रथक साबित हुये। इसके तीन वर्षो बाद  ‘ड’ सूची प्रकाशित की गई। सूची के आधार पर अपडेट का काम बाकी है। इस बीच आनलाईन में गांव न होने के कारण आगे की सूची का काम रेंग रहा है।

तहसील के सभी जनप्रतिनिधि बोडधा वासियों की इस गंभीर समस्या से अवगत है। कुछ जनप्रतिनिधियों ने गली से दिल्ली तक इसकी सूचना दी। किंतु महज आश्वासन के कुछ नहीं मिला और बोडधा वासी आज भी अपने सपनों के  ‘घरकुल’ के इंतजार में है।

कोई तो बने पालनहार

एक ओर तो सरकार डिजिटल इंडिया के सपने दिखाकर इसका लाभ दिलाने प्रयासरत है किंतु इसी डिजिटल काम की वजह से आज भी बोडधा ग्रामवासी घरकुल से वंचित है। ग्रामीणों की इस समस्या का निवारण कौन और कब करेगा यह सवाल उठा रहे है।  5 वर्षो से संकट इंतजार करने वाले ग्रामीणों का कोई तो पालनहार बने ?