बाघ देखने गई टीम पर मधुमक्खियों का हमला

  • वनकर्मियों समेत 20 ग्रामीण घायल
  • गोंडपिपरी तहसील में घटी घटना

चंद्रपुर. इन दिनों चंद्रपुर जिले में ब्रम्हपुरी और गोंडपिपरी इन दो तहसीलों में बाघ और मानव संघर्ष की घटनाएं काफी बढ गई है. गोंडपिपरी तहसील के कुछ ग्रामों में बाघों ने तो उपद्वव मचा रखा है. ग्रामीणों के पालतू जानवरों के शिकार की घटनाएं काफी बढ गई है.  यहां आज रविवार को एक स्थान पर बाघ नजर आने पर बाघ को जंगल की ओर खदेडने के नीयत से वन विभाग के कर्मचारी और ग्रामीणों की एक टीम जब जंगल में पहुंची तो उन पर मधुमख्खियों ने हमला कर दिया. हमला इतना तेज था कि टीम के लोगों को भागते नहीं सूझा और उनमें कई पत्थरों पर गिरने से और कुछ नदी में गिरने से घायल हो गए. मधुमख्खियों के हमले में वनकर्मियों समेत 20 ग्रामीण घायल हुए है. यह घटना गोंडपिपरी तहसील के शिवणी परिसर में आज रविवार की दोपहर को घटी.

गोंडपिपरी तहसील में आनेवाला शिवणी ग्राम नदियों के संगम के पास एक टापू की तरह है इस टापू पर शिवणी ग्राम के ग्रामीणों का मुख्य व्यसाय खेती है. यहां किसानों को बाघ दिखाई देने पर ग्रामीणों ने तुरंत इसकी जानकारी वनविभाग को दी.

बाघ ग्राम में प्रवेश कर किसी को नुकसान ना पहुंचाये इसलिए ग्रामीणों को साथ लेकर वनविभाग की टीम बाघ को जंगल के भीतर खदेड़ने के लिए जंगल की दिशा में रवाना हुई. ग्रामीणों को जिस स्थान बाघ नजर आया था उसी दिशा में वनकर्मी और ग्रामीण आगे बढ रहे थे. इस बीच उनपर उस समय आफत बरपा हो गई जब मधुमख्खियों ने उन पर हमला कर दिया. अचानक हुए हमले से ग्रामीणों को कुछ नहीं सुझा वें अपन जान बचाने के लिए इधर उधर दौडने लगे. कुछ पत्थरों पर गिरने से बुरी तरह से घायल हो गए तो कुछ ने नदी में ही छलांग लगा दी. इस भागमभाग में और मधुमख्खियों के हमले में 20 लोग बुरी तरह से घायल हो गए. जैसे तैसे जानबचाकर वें जंगल से बाहर रोड तक निकले और इस बीच किसी ने फोन कर गांव में उनके साथ हुए हादसे की सूचना दी. घायलों की मदद के लिए अन्य ग्रामीण और वन विभाग के कर्मी एम्बूलैस लेकर पहुंचे और घायलों को गोंडपिपरी के ग्रामीण अस्पताल में उन्हें भरती किया गया. 

बाघ तो नहीं दिखा जान आफत में पड़ी

जिस क्षेत्र में बाघ नजर आया वह क्षेत्र वैनगंगा-वर्धा नदी का संगम क्षेत्र है. यहां से ही चपराला अभयारण्य भी लगा हुआ है. संभवत अभयारण्य से बाघ यहां आया हो ऐसा वनविभाग का अंदाज है. मात्र काफी खोजने के बाद ना तो बाघ नजर आया और ना ही उसके पगमार्क नजर आये. बल्कि वनकर्मियों और ग्रामीणों की जान आफत में पड़ गई.

इस संदर्भ में जानकारी देते हुए वनरक्षक संजय पेंदोर ने कहा कि ग्रामीणों की ओर से बाघ के नजर आने की शिकायतें मिल रही थी. बाघ यहां गांव में प्रवेश कर किसी को नुकसान ना पहुंचाये इसलिए उसे जंगल में खदेड़ने के उद्देश्य से आज रविवार की सुबह 9.30 बजे  वें और एक और वनरक्षक, वनमजदूर और ग्रामीण ऐसे 20 लोग जंगल में गए थे. बाघ तो नजर नहीं आया. उन पर मधुमख्खियों ने हमला कर दिया.

कन्हालगांव अभयरण्य क्षेत्र

महाराष्ट्र सरकार द्वारा हाल ही में घोषित कन्हालगांव अभयारण्य से सटा यह क्षेत्र है, तेलंगाना मे स्थित अभयारण्य की ओर आवागमन करने के लिए बाघ कोरीडोर के रूप में इस परिसर को जाना जाता है. यहां लगातार बाघों की संख्या बढ रही है.