social-media

    चंद्रपुर. आधुनिक तकनीकी के उपयोग से आधुनिक युग में युवक, युवतियां, नागरिक त्यौहार, उत्सव, जन्मदिन, महापुरूषों की पुण्यतिथि, जयंती, अभिनंदन व आभार, निमंत्रण, विवाह पत्रिका जैसे विभिन्न प्रकार के निमंत्रण समेत नववर्ष की शुभकामनाएं सोशल मीडिया के माध्यम से फेसबुक, वाट्सएप, ट‍्विटर, इन्स्टाग्राम, शेअर के माध्यम से दिए जा रहे हैं. जिससे लोगों में प्रत्यक्ष रूप से भेंट कर अथवा बोलकर शुभकामनाएं देने की संस्कृति दिनोंदिन विलुप्त हो रही है. 

    21वीं सदी में आधुनिक तकनीक का अधिक इस्तेमाल करने से मोबाइल पर सुंदर दिखने वाले विभिन्न प्रकार के इमेज तैयार कर सोशल मीडिया के माध्यम से त्योहार-उत्सव, जन्मदिन, महापुरूषों की जयंती, पुण्यतिथि, अभिनंदन विविध कार्यक्रम की शुभकामनाएं दी जा रही हैं. त्योहारों के दिनों में अगले दिन से ही शुभकामनाओं के मैसेज देना शुरू हो जाता है. 

    ऐसे में युवक, युवतियों से वाट्सएप के माध्यम से विभिन्न प्रकार के नए चित्र तैयार कर एक-दूसरे को शुभकामनाएं देने से प्रत्यक्ष मिलकर अभिनंदन करने तथा शुभकामनाएं देने की परम्परा विलुप्त हो रही है. 

    सोशल मीडिया को अधिक महत्व 

    व्यस्त जीवन में सोशल मीडिया को अधिक महत्व दिया जा रहा है. इससे वह अधिक घातक साबित होता जा रहा है. सोशल मीडिया का केवल लाभ देखा जा रहा हैं, परंतु इससे होने वाले दुष्परिणामों की चिंता कोई नहीं कर रहा है. सोशल मीडिया के बढ़ रहे उपयोग पर स्वयं को विचार करना होगा. 

    रिश्तेदारों में बढ़ रही दूरियां 

    सोशल मीडिया के युग में गांव में थोड़ी बहुत संस्कृति को संजोया जा रहा है, परंतु शहरों में रिश्तेदारों से संपर्क कर शुभकामनाएं देना लुप्त होता जा रहा है. शहर में त्यौहार व उत्सव नाम के लिए मनाए जा रहे हैं. सोशल मीडिया के अति उपयोग से रिश्तेदारों में दूरियां निर्माण हो रही हैं. 

    आपसी संबंधों में कमी  

    15-20 वर्ष पहले मित्र रिश्तेदार मिलने के बाद ही शुभकामनाएं देते थे, परंतु अब प्रत्यक्ष में भेंट लिए बिना सोशल मीडिया के माध्यम से शुभकामनाओं की बौछार की जा रही है. जिससे आपसी संबंध व आत्मीयता कम होती जा रही है.