कोरोना के चलते कोर्ट बंद, अधिवक्ताओं की दिवाली अंधेरे में

  • 80 प्रश काम बंद

चंद्रपुर. कोरोना संक्रमण के चलते सभी ओर लॉकडाऊन होने से कोर्ट को भी बंद रखा गया परंतु अनलॉक के बाद भी अदालत के महत्वपूर्ण कामकाज को छोडकर अन्य सभी कामकाज बंद होने से अधिवक्ताओं को आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड रहा है. न्यायालय में प्रतिवादी के प्रवेश पर रोक लगाने से अधिवक्ताओं की आवक कम हो गई. परिणामत: इस बार न्यायालय के सभी अधिवक्ताओं की दिवाली अंधेरे में जाने का भय अधिवक्ताओं को सता रहा है.  

सुरक्षित उपाययोजना कर शुरू करे कोर्ट – एड.सालवे 

जिला न्यायालय के अधिवक्ता एड. जयंत सालवे के मुताबिक, कोरोना के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायालय में प्रतिवादी के प्रवेश पर रोक लगाए थे. महत्वपूर्ण कामकाज छोड सभी कार्यवाहियां बंद है. जिस तरह सरकार धीरे_धीरे एक_एक व्यवसाय पूर्ववत कर रही है. उसी प्रकार पूर्ण सुरक्षा के उपाययोजना के साथ न्यायालयीन कामकाज शुरू करने की मांग अधिवक्ताओं से उच्च न्यायालय के न्यायाधीश समक्ष की जा रही है.

न्यायालय का 80 प्रश कामकाज बंद – एड. मंचलवार 

एड. हरीश मंचलवार के मुताबिक, कोरोना के चलते पिछले 7_8 महिनों से कोर्ट बंद है. जूनियर अधिवक्ताओं पर बेरोजगारी छायी है. प्रतिवादी नहीं होने से जूनियर अधिवक्ताओं को फीस से वंचित रहना पड रहा है. शहर के बाहर के कई जूनियर को बार असो. द्वारा आर्थिक सहायता की जा रही है. परंतु कोरोना स्थिति निपटने के पश्चात यह राशि लौटाने की चिंता लगी है. आर्गुमेंट, जजमेंट, जेल मैटर छोडकर 80 प्रश कामकाज बंद है. हाथ में पैसे नही होने से परिवार के सदस्यों पर निराशा है. 

महामारी का न्याय व्यवस्था पर नकारात्मक परिणाम – एड. मुंधडा  

संक्रमण का न्याय व्यवस्था पर काफी नकारात्मक परिणाम हुआ है. पिछले अनेक महीनों से न्यायिक कामकाज धीमी गति से चल रहा है. कोरोना के कारण बार रूम बंद है. जूनियर्स को बैठने हेतु बार रूम में जगह भी उपलब्ध नहीं है. पक्षकारों को अपने वकीलों को ढूंढने में भी कठिनाइयां आती हैं. कई अधिवक्ता एवं उनके परिवार गण कोरोना से पीड़ित होने से अधिवक्ताओं की आय पर असर हो रहा है. 

सरकारी योजना के लाभ से वंचित – एड. पाचभाई  

एड. देवा पाचभाई ने बताया, महामारी का अधिवक्ताओं का गहरा झटका लगा है. मार्च महीने से कोर्ट कामकाज बंद होने से प्रतिवादी कोर्ट नहीं पहुच रहे. जिससे फीस से वंचित रहना पड रहा है. अधिवक्ताओं को सरकारी योजना तथा पेंशन नही मिलती जिससे आर्थिक संकटों का सामना करना पड रहा है. कई अधिवक्ता बैंक से लिए हुए कर्ज का भुगतान करने में असमर्थ है. ऐसे स्थिति में यह लोन का भुगतान कैसे करे यह चिंता है. आगे दिवाली त्यौंहार है. हाथ में पैसे नही होने से अधिवक्ताओं की इस बार काली दिवाली रहेगी. 

कोरोना ने किया दिवाली का उत्साह किरकिरा – एड. भोयर 

एड. अजय भोयर के मुताबिक, आमदनी नहीं होने से इसबार कोरेाना ने दिवाली का उत्साह किरकिरा कर दिया है. दिवाली में परिवार के सदस्यों की इच्छाए पूर्ण नहीं कर पा रहे इसका बेहद अफसोस है. जिस तरह अन्य व्यवसाय धीरे_धीरे शुरू किए जा रहे है उसी तरह न्यायालय की कामकाज प्रक्रिया धीरे_धीरे शुरू करने की अनुमति दे. ताकि अधिवक्ताओं के घर में दिवाली में अंधेरे की बजाय उजाला आए. 

चरणबध्द शुरू करे कोर्ट का कामकाज – एड. नागापुरे 

एड. संदीप नागपुरे के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर फिलहाल कोर्ट के महत्वपूर्ण कामकाज सुबह 11 से दोपहर 2 बजे चल रहे है. जिसमें क्रिमिनल केसेस, आर्गुमेंट, जजमेंट कार्य किए जा रहे है. सिविल कार्य पूरी तरह से बंद होने से अधिवक्ताओं पर आर्थिक संकट आ पहुचा है. बार रूम बंद होने से काम करना मुश्किल हो गया है. न्यायालय सरकार के नहीं बल्कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों पर चलता है. 3 घंटे में कोर्ट की कार्यवाही असंभव है. इसहेतु धीरे_धीर चरणबध्द तरीके से कोर्ट का कामकाज शुरू करे अन्यथा इस बार अधिवक्ताओं की दिवाली अंधेरे में जायेगी.