अब तक 30 के बयान, नतीजा शून्य

चंद्रपुर. आनंदवन महारोगी सेवा समिति की मुख्य कार्यकारी अधिकारी डा. शीतल आमटे-करजगी मृत्यु मामले में पुलिस ने अब तक 30 लोगों के बयान लिए है परंतु अब भी दावे से यह नहीं कह पा रही है कि यह अवसाद में घिरे होने के कारण आत्महता का मामला है. पुलिस यह भूमिका मामले को और भी पेचीदा बनाते जा रही है. हालांकि पुलिस यह स्पष्ट रूप से कह रही है कि घटना के समय डा. शीतल अपने कमरे में अकेली थी और कमरा अंदर से बंद था.

डा. शीतल आमटे-करजगी मृत्यु मामले में पुलिस ने कुल 30 लोगों के बयान लिए है. इसमें नागपुर में जिन चिकित्सकों से डा. शीतल का उपचार चल रहा था उनके बयान में भी शामिल है. परंतु अब तक उनके मायका पक्ष के लोगों का पुलिस ने बयान नहीं लिया है.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार डा. शीतल पिछले डेढ वर्ष से अधिक समय से अवसादग्रस्त थी और उनका नागपुर के प्रसिध्द मानसिकरोग विशेषज्ञ के यहां उपचार शुरू था. पिछले आठ माह से उनका नागपुर के एक चिकित्सक के पास नियमित उपचार शुरू था. पुलिस ने आनंदवन के चिकित्सकों और अन्य विशेषज्ञों का बयान लिया है. पुलिस फिर से यही कहना है कि फॉरन्सिक रिपोर्ट मिलने के बाद ही घटना की वास्तविकता  सामने आ पाएंगी. पुलिस रिपोर्ट पाने के लिए पूरा प्रयास कर रही है.