ताड़ोबा में गौण खनिज का उत्खनन, वनाधिकारियों पर गंभीर आरोप

    चंद्रपुर. वनविभाग के अंतर्गत पेड़ों, वन्यजीवों और यहां की खनिज संपदा का संरक्षण करने की जिम्मेदारी वनविभाग पर होते हुए भी ताड़ोबा अंधारी व्याघ्र प्रकल्प के खंडसंगी रेंज में राऊंड आफिसर द्वारा रेत और मुरूम की चोरी कर सरेआम बेचे जाने का आरोप प्रकृति फाऊंडेशन के दीपक दीक्षित ने लगाया है. इस संदर्भ मे उन्होने ताड़ोबा व्याघ्र प्रकल्प के वनसंरक्षक से की है.दीक्षित के आरोपों के कारण वनविभाग में खलबली मच गई है. वनसंरक्षक क्या कार्रवाई करेंगे इस ओर नागरिकों का ध्यान केन्द्रित है.

    ग्रामीण क्षेत्र में रास्तों, महामार्ग के काम में बड़े पैमाने पर नियमबाहय तरीके से मुरूम और रेत का उत्खनन कर उपयोग किया जा रहा है. पिछले कुछ दिनों से जिले में इस संबंध में चर्चाएं व्याप्त है. इस दौरान खडसंगी क्षेत्र के राऊंड आफिसर मनीष बोरकर द्वारा कम्पार्टमेंट क्र.44 में रेत साथ ही कम्पार्टमेट नंबर 52,53,54 और 55 मुरूम का अवैध रूप से उत्खनन कर परिसर के गांव में बेचे जाने का आरोपों में कहा गया है कि 27 मई को वनाधिकारी मनीष बोरकर ने अवैध रूप से दस ट्रैक्टर रेत निकालकर झरी गांव में बेचा है.

    सज्ञथ ही मुरूम को परस्पर रूप से गायब किया गया है. इसके चलते जंगल के पेड़, पौधों और वन्यप्राणियों को खतरा निर्माण हुआ है. इस संदर्भ में उित जांच कर हो रही चोरी को रोका जाए साथ ही वनाधिकारी पर महाराष्ट्र नागरी (अनुशासन एवं अपील) नियम 1979 के उपनियमावली के कानून का उल्लंघन किए जाने पर निलंबित कर दंडात्मक कार्रवाई करे ऐसी मांग प्रकृति फाऊंडेशन ने की है.

    ताड़ोबा में अवैध रूप से हुआ उत्खनन: दीक्षित

    इस संदर्भ में जानकारी देते हुए प्रकृति फाऊंडेशन के दीपक दीक्षित ने कहा कि खडसंगी क्षेत्र के राऊंड आफिसर मनीष बोरकर द्वारा कम्पार्टमेंट क्र.44 में रेत साथ ही कम्पार्टमेट नंबर 52 से लेकर 55 में मुरूम का अवैध रूप से उत्खनन कर  परिसर के गांव में बेचे जाने का मामला सामने आया है. इसकी ताड़ोबा व्याघ्र प्रकल्प के वनसंरक्षक से शिकायत की है.