Farmers' Diwali will be dull

गत माह गोसीखुर्द का पानी छोडे जाने और लौटते मानसून की बरसात की वजह से किसानों की खेती संकट में है।

  • पास में पैसा नहीं खेतों की फसल बर्बाद

ब्रम्हपुरी. गत माह गोसीखुर्द का पानी छोडे जाने और लौटते मानसून की बरसात की वजह से किसानों की खेती संकट में है। पिछले तीन चार वर्षो से लगातार मौसम इसी प्रकार धोखा दे रहा है। इसकी वजह से हाथों में आने वाली फसल बर्बाद होने से किसानों की दीपावली फीकी रहेगी।

ब्रम्हपुरी तहसील की मुख्य फसल धान है किसानों ने हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी धान की रोपाई की। किंतु लौटते मानसून में हुई बरसात की वजह से धान की फसल जमीन पर सो गई। किसानों ने किसी प्रकार बैंक, साहूकार और परिचितों से कर्ज लेकर खेती की थी। फसल बिक्री के बाद सभी का कर्ज अदा करने की उम्मीद थी किंतु अब किसानों के सामने संकट आ गया है।   

65 गांव की 11 हजार हेक्टेयर की फसल प्रभावित

पिछले तीन से चार वर्षो से किसानों को लगातार मौसम की मार झेलनी पड़ रही है। किंतु गत माह आई बाढ से धान और अरहर को बडे पैमाने पर नुकसान हुआ। तहसील के कुल 65 गांव के 11,843 हेक्टेयर की फसल बाढ से प्रभावित हुई थी। जिसमें धान, अरहर समेत विविध प्रकार के 33 प्र.श. से अधिक फसलों का नुकसान हुआ है। अब फसल कटाई के समय पर जंगली जानवरों की दहशत मची है। गत सप्ताह बाघ के हमले में एक चरवाहे की मृत्यु और 2 के घायल होने से खेतों में जाने वाले किसानों में बाघ की हदशत बनी है। इससे बची खुची फसल भी संकट में दिखाई दे रही है।

दिवाली पूर्व आर्थिक सहायता की उम्मीद

किसानों के खेतों से फसल निकलते ही कृषि उपज के दाम गिर जाते है जिससे किसानों को उचित दाम नहीं मिलता है यह किसानों का प्रतिवर्ष का अनुभव है। गत माह गोसीखुर्द के सभी 33 दरवाजे बिना पूर्व सूचना के खोलने से वैनगंगा नदी में आई बाढ से तहसील के धान की फसल पानी में डूबी थी। संबंधित विभाग ने नुकसानग्रस्त खेती का सर्वे किया और किसानों को दिवाली पूर्व नुकसान भरपाई  की उम्मीद थी। किंतु किसानों की उम्मीद धूमिल पडती जा रही है ऐसे में पास में पैसा नहीं, खेत में फसल नहीं ऐसे में किसानों की दिवाली फीकी ही रहने की उम्मीद है। 

किसानों में छाई है भारी चिंता

मार्च महीने से कोरोना संकट की वजह से किसानों के सामने भारी संकट आ गया। इसके बावजूद किसानों ने किसी प्रकार किसानी की और खरीफ की फसल भी अच्छी आई किंतु मौसम की बेरुखी और गोसीखुर्द से आई बाढ से फसल चौपट हो गई। इससे किसानों की आंखों में पानी आ रहा है अब परिवार के भविष्य को लेकर वे काफी चिंतीत है।