अंतत: कन्हालगांव अभयारण्य घोषित

  • जिले में ताड़ोबा, घोड़ाझरी के बाद तीसरा अभयारण्य
  • बाघों के संरक्षण में महत्वपूर्ण कदम

चंद्रपुर. गोंडिपपरी क्षेत्र अंतर्गत आनेवाले कन्हालगांव वनक्षेत्र को आखिरकार बाघ अभयारण्य घोषित कर दिया गया है. चंद्रपुर जिले में बाघों की बढती संख्या को देखते हुए ताड़ोबा के मिलाकर अब तीन अभयारण्य हो गये है. कन्हालगांव अभयारण्य को लेकर ग्रामीणों द्वारा रोष जताया जा रहा था. 269 चौ.कि में फैले इस अभयारण्य में बाघों की उपस्थिति के देखते हुए बाघ संरक्षण की दृष्टि से इसे अभयारण्य का दर्जा दिया गया है. जिले में सबसे पहले ताड़ोबा अंधारी बाघ परियोजना को बाघ संरक्षित अभयारण्य के रूप में घोषित किया गया था. इसके बाद नागभीड़ तहसील स्थित घोड़ाझरी क्षेत्र के अभयारण्य घोषित किया गया. इसके बाद अब गोंडपिपरी वनपरिक्षेत्र में आनेवाले कन्हालगांव को अभयारण्य घोषित किया गया है. बाघों के संरक्षण की दिशा में सरकार का यह एक महत्वपूर्ण कदम है.

कन्हालगांव अभयारण्य में 33 ग्रामों का समावेश है. यह गांव 18 ग्रामपंचायत, गट ग्रामपंचायत में समाविष्ट है. प्रस्तावित अभयारण्य में सर्वाधिक गोंडपिपरी तहसील के गांव समाविष्ट है. बल्लारपुर एवं पोंभूर्णा तहसील के कुछ गांवों का समावेश है.

महाराष्ट्र-तेलंगाना सीमा पर स्थित कन्हालगांव अभयारण्य में बाघ के अलावा कई तरह के वन्यजीवों का समावेश है. इसमें दुर्भल वन्यप्राणी भी शामिल है. इसे बाघों के कॉरीडोर के रूप में देखा जा रहा है. यहां की जैवविविधता को देखते हुए वनक्षेत्र को अभयारण्य घोषित करें ऐसी मांग काफी वर्षों से की जा रही थी. 31जनवरी 2018 को ली गई 13  वीं राज्य वन्यजीव मंडल की बैठक में यह मुद्दा रखा गया था. कन्हालगांव वन्यजीव अभयारण्य के संदर्भ में शासन की ओर से तत्वत: मान्यता युति सरकार में रहे वनमंत्री सुधीर मुनगंटीवार के प्रयासों से दी गई. थी. कन्हालगांव वन्यजीव अभयारण्य आगे की कार्यवाही होने से पूर्व कन्हालगांव वन्यजीव अभयारण्य परिसर के ग्रामीणों के विचार जानने का निर्णय राज्यस्तरीय वन्यजीव बैठक में लिया गया था.

अभयारण्य के बारे में ग्रामीणों के विचार जानने के लिए प्रत्येक ग्रामपंचायत में विशेष सभा बुलाकर कन्हालगांव वन्यजीव अभयारण्य के बारे में ग्रामीणों के विचार जाने गए. प्रत्येक ग्रामपंचायत में विशेष सभा ली गई. सरपंच ,जि.प. सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, विवादमुक्त समिति के अध्यक्ष, संयुक्त वन प्रबंधन अध्यक्ष, ग्रामसेवक, पुलिस पाटिल, गांव के प्रतिष्ठित नागरिक के उपस्थित में सभा में नागरिकों ने अपने विचार रखे थे. अधिकांश ग्रामीण अभयारण्य का दर्जा दिए जाने के खिलाफ थे.

10 बाघ और 23 तेदूएं का वास

कन्हालगांव अभयारण्य में 10 बाघ और 23 तेंदूएं होने का अनुमान है. महाराष्ट्र-तेलंगाना सीमा पर अभयारण्य होने से अभयारण्य में सफारी के लिए पर्यटकों की तादाद बढने कीसंभावना है. इससे रोजगार के अवसर भी निर्माण होगे. पोंभूर्णा तहसील के अनेक लोगों को इससे रोजगार मिलेगा.

3  महीने में मास्टर प्लॉन के निर्देश

झोनल मास्टर प्लॉन जिलाधिकारी ने तीन महीने तैयार कर वन, पर्यावरण, राजस्व, नगरविकास ऐसे संबंधित विभागों को सहयोग करने के निर्देश दिए है.