पदमापुर खदान हादसे की उच्चस्तरीय जांच शुरू

दुर्गापुर. वेकोलि चंद्रपुर क्षेत्र अंतर्गत पदमापुर ओपन कास्ट कोयला खदान में बुधवार को भूस्खलन के कारण करोड़ों रुपयों की ड्रील मशीनें मलबे में दब गई। उस समय वहां मौजूद 6 लोग बाल बाल बच गए। बुधवार रहने के कारण खदान में अन्य दिनों के मुकाबले मैनपावर कम था। साथ ही ओवरबर्डन का गिरना धीरे धीरे होने से वाहनों पर कार्यरत तीनों आपरेटर और आसपास कार्यरत सभी कोयला कर्मी भागने में सफल हो गए।

लगभग 900 कामगार संख्यावाली पदमापुर कोयला खदान को मिट्टी धंसने के कारण बंद किया गया है। बड़ी घटना होने के कारण वेकोलि मुख्यालय से टेक्निकल डायरेक्टर खदान का मुआयना करने यहां पहुंचे है। डी.जी.एम.एस. के अधिकारी भी यहां डेरा जमाये हुए है। इस घटना के संबंध में सभी कोई अधिकारी कुछ भी बताने को तैयार नहीं है। परंतु यहां कार्यरत सभी कर्मियों को यह पता है कि मिट्टी को धंसी है। कामगारों का कहना है कि इस घटना के बाद नागपुर, दिल्ली, कोलकत्ता से आकर अधिकारी जांच करें तो नतीजा एक ही निकलने वाला है कि मिट्टी धंसने का मुख्य कारण मोठा नाले का पानी का रिसाव है।

पदमापुर खदान के विस्तार के सभी रास्ते बंद है. जबरदस्ती कोयला निकालने की प्रक्रिया शुरू है। जब तक मोठा नाला स्थानांतरित नहीं हो जाता तब तक इसके आसपास का कोयला निकालना खतरे से खाली नहीं है। खदान के दूसरी ओर भी कोयला है लेकिन वह जगह वर्तमान में वनविभाग की है। वनविभाग से अनापत्ति प्रमाण लेना वेकोलि के लिए टेढी खीर साबित हो रहा है। वनविभाग की जमीन हस्तांतरण और मोठा नाला स्थानांतरण दोनों काम हो जाए तो यहां अगले 10 से 12 वर्षों तक कोयला निकाला जा सकता है। इसके लिए सरपंच, विधायक, सांसद, पालकमंत्री सभी के प्रयास जरूरी है। राजनीतिक इच्छाशक्ति पर ही पदमापुर का विस्तार संभव है। अन्यथा यहां के 900 कामगारों को कही और स्थानांतरित करना होगा।

सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार वेकोलि प्रबंधन ने कोयला निकालने के लिए पिछले 15 दिन से डबल रॉड ड्रिलिंग कर ब्लास्टिक करवा रहा था ताकि अधिकतम कोयला निकाला जा सके परंतु मोठा नाला समीपस्थ रहने के कारण डबल रॉड ड्रिलिंग कर ब्लास्टिक करना उचित नहीं था। डबल रॉड ड्रिलिंग ब्लास्टिक किए जाने से आसपास के क्षेत्र में ज्यादा दूर तक कंपन होता है जिसकी वजह से मिट्टी धंसने का एक कारण यह भी बताया जा रहा है।