कोरोना के चलते ऐतिहासिक वढा तीर्थयात्रा रद्द

  • वर्धा-पैनगंगा में डूबकी लगाने पहुंचते थे लोग

चंद्रपुर. कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर वर्धा और पैनगंगा के संगम घुग्घुस स्थित वढा की प्रसिध्द एवं ऐतिहासिक तीर्थयात्रा इस वर्ष कोरोना महामारी के कारण रद्द कर दी गई है. इस वर्ष लोग डूबकी लगाने जरूर पहुंचेगे परंतु किसी तरह के मेले का आयोजन नहीं होगा.

वढा ग्रामपंचायत ने एक आदेश जारी कर सूचित किया है कि सोमवार 30 नवंबर को भरनेवाली पवित्र यात्रा को कोरोना महामारी के चलते रद्द कर दिया गया है.

जिले में जारी है निषेधाज्ञा

ग्रामपंचायत प्रशासन का कहना है कि कोरोना संक्रमण रोकने के लिए प्रतिबंधात्मक उपाययोजना के लिए जिलाधिकारी ने निषेधाज्ञा जारी की है जिसके चलते वढा में यात्रा का आयोजन रद्द किया जा रहा है. यहां कोई भी दुकानें नहीं लगाई जाएगी और ना ही लोगों को भीड़ जुटाने का मौका दिया जाएगा. अन्यथा संबंधितों पर कार्रवाई की जाएगी.

सभी सार्वजनिक आयोजनों पर है रोक

कोरोना के चलते पिछले मार्च महीने से लेकर अब तक तकरीबन सभी धर्मों के सार्वजनिक रूप से मनाये जानेवाले उत्सवों एवं आयोजनों को पूरी तरह से रोक लगा दी गई है. राज्य सरकार द्वारा हाल ही में प्रार्थना स्थलों को शुरू करने की रजामंदी दिए जाने से यह कयास लगाये जा रहे थे कि कार्तिक पूर्णिमा को आयोजित होनेवाली तीर्थयात्रा का भी आयोजन होगा. परंतु जिस तरह से कोरोना की दूसरी लहर अपना असर दिखा रही है. उसे देखते हुए सरकार ने ना केवल लॉकडाऊन को 31 दिसंबर तक बढा दिया है बल्कि सभी तरह के सार्वजनिक धार्मिक आयोजनों पर रोक लगा दी है.

लाखों की संख्या में आते है श्रध्दालु

उल्लेखनीय है कि कार्तिक पूर्णिमा पर वर्धा-पैनगंगा के संगम घुग्घुस के वढा तीर्थ क्षेत्र में प्रतिवर्ष मेले का आयोजन होता है यहां लाखों की संख्या में श्रध्दालु आकर वढा स्थित विठ्ठल रूक्मिनी के दर्शन कर पूजा पाठ करते है और पवित्र स्नान करते है.यह सिलसिला सदियों से चला आ रहा है. यहां उत्तरवाहिनी वर्धा, पैनगंगा और निरगुडा इन तीन नदियों का संगम होने से यह स्थान काफी महत्वपूर्ण माना गया है. संगम के उस पार यवतमाल जिले के वणी तहसील में जुगाद ग्राम में स्थित हेमाडपंथी शिवमंदिर है जहां भी इस तरह ही मेले का स्वरूप प्राप्त होता है.

वढा यात्रा को लेकर किवंदती

हर तीर्थयात्रा के पीछे एक कहानी अथवा किवंदती निहित होती है, यहां वढा यात्रा को लेकर भी वर्षों से बुजुर्गों से सुना जा रहा है कि शिवपुराण, गणेश पुराण और स्थानीय लोक कथाओं के अनुसार श्री गणेश और कुमार कार्तिक  को पृथ्वी प्रदशिणा करने को कहा गया तो कुमार कार्तिक तो वायुगति से पृथ्वी प्रदक्षिणा के लिए निकल पड़े जबकि श्री गणेश ने अपने माता-पिता भगवान शिव और पार्वती को ही अपना जग, पृथ्वी मानकर उनकी प्रदक्षिणा की थी. कुमार कार्तिक ने पृथ्वी प्रदक्षिणा करते समय जुगाद के पवित्र संगम पर स्नान कर शिव के दर्शन किए थे. इसलिए भगवान शिव ने कार्तिक पोर्णिम को जो भी कार्तिक के दर्शन लेगा उसकी सभी बाधाएं दूर होने का आशीर्वाद दिया था.