अस्पताल शुरू, लेकिन उपचार बंद

    •  उदासीनता : अस्पाताल में पशु वैद्यकीय अधिकारी नहीं, किसान परेशान

    चिमूर. तहसील के खड़संगी में पशु वैद्यकीय अधिकारी का अस्पताल है. वहां अस्पताल में स्थायी रूप से निवासित रहने के लिए शासन ने लाखों रुपए खर्च किए हैं. किंतु अधिकारी-कर्मचारी चिमूर से अस्पताल में आना-जाना करते हैं. यहां पशु वैद्यकीय अधिकारी के अभाव में उपचार के बिना ही पशुओं की मृत्यु हो रही है. जिसके कारण एक बार फिर मानसून मौसम किसानों पर आर्थिक संकट आ रहा है.

    डाक्टर गए हड़ताल पर

    रविवार को खड़संगी समीप नवेगांव पुनर्वास गांव निवासी किसान रामराव नेवारे की गाय का बछड़ा अचानक बीमार हो गया. बछड़े पर जल्द से जल्द उपचार शुरू करने के लिए किसान ने संबंधित पशु वैद्यकीय अधिकारी से संपर्क किया. पशु वैद्यकीय अधिकारी ने अस्पताल में होने की जानकारी देकर गाय के बछड़े को लेकर आने की जानकारी दी.

    तभी किसान बछड़े को जिप्सी में डालकर पशु वैद्यकीय अस्पताल ले आया. अस्पताल में जाने के बाद वहां मौजूद डाक्टर हड़ताल पर होने की जानकारी किसान को दी गई. किसान ने डाक्टर के पास बार-बार विनती करने के बाद भी उपचार नहीं हो पाया. किसान नाराज होकर वहां से लौट गया और कुछ ही घंटों में बछड़े की मौत हो गई.

    नहीं हो पा रहा उपचार

    किसानों ने कहा कि अभी खरीफ का मौसम शुरू है. इस दौरान मवेशियों की जरूरत होती है. ऐसे में यदि वे बीमार पड़ गए, तो तुरंत उपचार होना चाहिए. किंतु पशु वैद्यकीय अस्पताल जाने पर समय पर उचार नहीं हो रहा है. इससे कई मवेशी मारे जा रहे हैं. जिससे किसान संकट में फंस जाते हैं. इसलिए वरिष्ठ अधिकारियों से इस ओर ध्यान देकर समस्या हल करने की मांग किसानों ने की है.