Online education system failed in Tehsil

    चंद्रपुर. कोरेाना संक्रमण के चलते केंद्र सरकार ने सभी स्कूल को बंद कर विद्यार्थियों के आनलाईन क्लासेस शुरू कर दिए. उसके पहले मार्च 2020 के शैक्षणिक वर्ष के बच्चों को प्रमोट कर उन्हे पास कर दिया. बिना मोबाईल के आनलाईन पढाई करना असंभव था. मध्यम वर्गीय परिवार के पास 1 ही स्मार्टफोन अथवा एन्ड्राईड फोन रहता था परंतु बच्चों की पढाई आनलाईन शुरू होने से परिवार के अन्य बच्चों के लिए मोबाइल तथा नेट रिचार्ज अनिवार्य हो गया. जिसके कारण पहले ही बढ रही महंगाई में मध्यमवर्गीय व गरीब परिवार को प्रति महीना नेट का रिचार्ज मारना मुश्किल हो रहा है. सही माने तो आनलाईन शिक्षा गरिब व मध्यमवर्गीय परिवार के लिए एक सिरदर्द बन गयी है. 

    आम नागरीक जोड_तोड कर पैसे जमा कर 10 से 12 हजार रूपए का मोबाईल बच्चो के लिए खरिदा गया. मोबाईल खरीदने के बाद उसमें प्रति माह 200 से 250 रूपए तक का रिचार्ज करना मुश्किल होता जा रहा है. आम परिवारों पर यह अतिरिक्त बोझ बढ गया है. आनलाईन पढाई के चलते विद्यार्थियों में पढाई में कम व मोबाईल के प्रति अधिक लगाव होता दिखाई दे रहा है.

    अब बच्चे 15 मिनट भी मोबाईल के बिना चैन से नही काट पा रहे है. आनलाईन पढाई के बहाने मोबाईल ने बच्चों को पूरी तरह से जकड लिया है. कई बच्चों में मोबाईल के कारण आंखो की बिमारी बढ रही है. मोबाईल ने इन बच्चों को अन्य काम तथा मैदानी खेल तक को भूला दिया है. 

    बच्चे मोबाईल की वजह से अपने माता पिता से उल्टी सीधी बात करने की आदते लग रही है. कई विद्यार्थियों ने पालक वर्ग से मोबाईल नही दिलाने पर आत्महत्या तक की है. आनलाईन पढाई को देखते हुए मध्यमवर्गीय व गरीब पालक वर्ग का बच्चों को मजबुरी में मोबाईल खरीदकर देना पडा. आनलाईन पढाई के नाम मोबाईल की लत से बच्चे मातापिता से दूर होते दिखाई दे रहे है. पहले हर माता पिता मोबाईल को बच्चों से दूर रखा करते थे.

    परंतु आनलाईन के लिए मोबाईल आवश्यक करने पर पालकवर्ग को मोबाईल खरिदकर देना पडा. आगे चलकर यदी बच्चों का भविष्य सवारना है तो पढाई जरूरी है. पढाई करनी है तो मोबाईल के सिवाय कोई चारा नही है. ऐसे में बच्चों के मातापिता को ना चाहते हुए भी बच्चों को मोबाईल खरीदकर देना पड रहा है. परंतु मोबाईल की वजह से आज बच्चों का बचपन उनके हाथ निकलता हुआ नजर आ रहा है.