वन दावे के अतिक्रमित खेती पर वनविभाग ने चलाई जेसीबी

  • किटाली ग्राम सभा की अवहेलना

चिमूर. तहसील के जंगल से सटे गांव के नागरिक वर्षो से अतिक्रमित जमीन पर खेती कर अपने परिवार का लालन पालन कर रहे है. वर्तमान में खरीफ का सीजन शुरु होने से किसानों ने खेतों में बुआई की. किंतु वनविभाग ने फसलों पर जेसीबी चलाकर फसल को नष्ट कर दिया. इससे किसानों में वनविभाग के प्रति भारी रोष है. 

किटाली ग्रामसभा के पदाधिकारियों ने वनविभाग की कार्रवाई को रोक दिया. किंतु पदाधिकारियों के गांव में लौटते ही वनविभाग ने पुन: जेसीबी से फसल को रौंद कर ग्रामसभा के आदेश की अवहेलना की.

अनु. जनजाति व अन्य पारंपारिक वन निवास अधिनियम के तहत सामूहिक वन अधिकार पत्र के अनुसार ग्राम किटाली की ग्रामसभा को कुल 173.55 हेक्टेयर क्षेत्र के संरक्षण पुर्नजीवन परीक्षण और व्यवस्थापन का अधिकार है. इस अधिनियम की धारा के अनुसार लगातार उपयोग करने वालों का जमीन पर अधिकार होता है. ऐसे में उस क्षेत्र में कार्रवाई करते समय ग्रामसभा को इससे अवगत कराना अनिवार्य होता है. यह भी कहा गया कि अतिक्रमित जगह जबरनजोत धारकों की न होकर ग्रामसभा की है. ग्रामसभा ने 21 जून 2019 को ग्रामसभा में प्रस्ताव लेकर सीमांकन के लिए वनविभाग को पत्र दिया था. किंतु आज तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई.

जिलाधीश ने स्थगन आदेश वन अधिकारियों को दिखाया किंतु आदेश की अनदेखी की गई. ग्रामसभा के कार्यक्षेत्र अंतर्गत सर्वे क्रं. 259 की जमीन पर अतिक्रमण धारकों की खेती पर बिना ग्रामसभा को पूर्व सूचना दिए जेसीबी और ट्रैक्टर चलाकर खडी फसल को रौंद डाला. वनविभाग अतिक्रमित किसानों के परिवारों को सडक पर लाने का प्रयास कर रहा है इससे लोगों में वनविभाग के खिलाफ रोष है. इसलिए कार्रवाई को रोकने की मांग ग्रामसभा के सदस्य प्रहार सेवक शेरखान पठान, मोहन दोडके, वनअधिकार समिति के अध्यक्ष मनोहर गुडध्ये, सचिव देवीदास सहारे, वामन बावने, नाजुक नागोसे, रघुनाथ मेश्राम, सरपंच वैशाली नागोसे, ईश्वर दडमल, किशोर येसांबरे आदि ने की है.