ऐतिहासिक जूनोना तालाब परिसर में घुटता है दम

  • ताजी हवाओं के बजाय उठती दुर्गंध
  • इको प्रो की ओर से सफाई अभियान

चंद्रपुर. गोंडकालिन शासनकाल में भ्रमण और जलविहार करने के दृष्टि से निर्मित ऐतिहासिक जूनोना तालाब में एक समय पक्षियों का कलरव सुनने को मिलता था और यहां पर्यटकों की भीड़ नजर आती थी परंतु लगातार उपेक्षा के चलते यहां की ताजी हवाओं में फैले कचरे के कारण दुर्गंध फैली हुई है। जिससे यहां आनेवालों का दम घुटने लगता है। इको प्रो की टीम ने यहां सफाई अभियान चलाकर परिसर को पर्यटन लगाने का प्रयास किया।

जूनोना तालाब परिसर में पार्टियां करने, मासांहार का मजा लेनेवालों द्वारा यूज एन्ड थ्रो प्लेटे, प्लास्टिक गिलास, शराब की बोतले, खाद्य पदार्थ के प्लास्टिक, पानी के बोतलें फेंके जाने से पूरा परिसर कचरे से भरा हुआ था। यहां प्रवेश करनेवालों से शुल्क लिया जाता है परंतु साफ सफाई की ओर किसी का ध्यान नहीं है।

यहां के कूडे कचरे के ढेर को देख पक्षी सप्ताह के लिए जमा हुए इको प्रो के कार्यकर्ताओं ने जूनोना तालाब के पक्षी अधिवास परिसर में स्वच्छता अभियान चला बीसियों बोरी कचरा इकट्ठा कर परिसर की सफाई की। लिया. इस अभियान में धमेंद्र लुनावत, राजेश व्यास, अमोल उत्तलवार, सुधीर देव, राजू काहिलकर, आकाश घोडमारे, सुनील पाटिल, जयेश बैनलवार, सचिन धोतरे, सचिन भांदककर, देवनाथ गंडाटे, राममिलन सोनकर, सुभाष टिकेदार, मनीषा जैस्वाल, राजू हाडगे, गौरव वाघाउे, सौरभ शेटे, शंकर पोईनकर, सुनील लिपटे आदि सम्मिलित हुए।

पक्षी अधिवास को बचाना जरूर- बंडू धोतरे

इको प्रो के अध्यक्ष एवं मानद वन्यजीव रक्षक बंडू धोतरे का कहना है कि प्रकृति के गोद में स्थित जूनोना तालाब पार्टियां करने का स्थान नहीं है, बल्कि विभिन्न स्थानीय पक्षियों, स्थानांतरित पक्षियों का अधिवास है। जंगल के वन्यप्राणियों के लिए पानी का स्त्रोत है इसका सौंदर्य और महत्व कायम रखा जाना जरूरी है। परिसर में किसी भी तरह का प्रदूषण और अस्वच्छता तालाब के अस्तित्व के लिए घातक साबित होगी।