चंद्रपुर में सितंबर से हटेगी शराबबंदी, पालकमंत्री की घोषणा

  • पालकमंत्री की घोषणा से शराब व्यवसायियों की बांछे खिली

चंद्रपुर/ चिमूर. पिछले पांच वर्ष पूर्व जिले में लगाई गई शराबबंदी आनेवाले सितंबर माह से जिले से हटा लिए जाने की घोषणा राज्य के मंत्री एवं जिले पालकमंत्री विजय वडेट्टीवार ने आज चिमूर में की. पालकमंत्री वडेट्टीवार द्वारा की गई शराबबंदी हटाने की घोषणा से यहां जिले के शराब व्यवसायियों में सुगबुगाहट शुरू हो गई है. 

पालकमंत्री विजय वडेट्टीवार ने यहां चिमूर में आज शनिवार को कहा कि शराबबंदी के कारण जिले पर काफी दुष्परिणाम हुआ है, जहरीली शराब ने कईयों की जान ले ली है, सरकार का राजस्व भी डूब रहा है, शराबबंदी हटाने का नर्णिय शीघ्र लिया जाना था परंतु कोविड 19 महामारी फैलने और इसके बचाव के लिए लॉकडाऊन लागू होने से इसमें विलंब हुआ है, परंतु आनेवाले सितंबर माह से जिले से शराबबंदी पूरी तरह से हटा ली जाएगी.

उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष सत्ता में आने के बाद महाविकास आघाडी के सहयोगी दल कांग्रेस के कोटे से जिले के पालकमंत्री बने विजय वडेट्टीवार ने पहले स्पष्ट कर दिया था कि जिले से शराबबंदी हटा ली जाएगी. इसके लिए उन्होने जिलाधिकारी को नर्दिेश देकर एक समिति का भी गठन किया था जिसके माध्यम से लॉकडाऊन लगने से पूर्व जिले भर के लोगों की शराबबंदी हटाने के संदर्भ में रायशुमारी कराई गई. लोगों की प्रतक्रियिाओं के आधार पर स्पष्ट हो चुका था कि आनेवाले समय में शराबबंदी के नर्णिय पर सरकार को पुनर्विचार करना ही होगा. इस बीच लॉकडाऊन लगने से यह मुद्दा ठंडे बस्ते में चला गया था परंतु आज शनिवार को पालकमंत्री ने एक बार फिर शराबबंदी हटाने की घोषणा कर इस मुद्दे को गरमा दिया है.

वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव प्रचार में भाजपा के सुधीर मुनगंटीवार ने जनता से वादा किया था उनके सत्ता में आने के बाद वें सबसे पहले शराबबंदी का नर्णिय लेंगे. उस समय शराबबंदी की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता एड. पारोमिता गोस्वामी के नेतृत्व में जिले की महिलाओं ने आंदोलन छेड़ रखा था. सत्ता में आने के बाद मुनगंटीवार ने अपना वादा निभाया और जिले में तुरंत प्रभाव से शराबबंदी लागू कर दी. वर्ष 2015 से लेकर अब तक शराबबंदी के दौरान जिले में इसके सकारात्मक और नकरात्मक परिणाम देखने को मिले. शराब व्यवसाय से जुड़ी लॉबी कई बार इस नर्णिय को वापस लेने के लिए दबाव बनाती रही परंतु भाजपा की राज्य में सत्ता रहते हुए उनका यह प्रयास नष्फिल ही साबित होता रहा. 2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को अधिक सीटें मिलने के बाद भी उसे सत्ता हासिल नहीं होने से और शिवसेना, कांग्रेस, राकांपा द्वारा मिलकर महाविकास आघाडी के बैनर के तले सत्ता स्थापित करने से शराब व्यवसाय से जुडी लॉबी की उम्मीद जागी और उन्होने पूरी ताकत से इस नर्णिय को वापस लेने के लिए सरकार पर दबाव बढाया जिसके नतीजन अब शराबबंदी का नर्णिय वापस लिए जाने के पूरी संभावना है.

5 वर्ष में पकड़ी 100 करोड़ की अवैध शराब
पुलिस सूत्रों की ओर से मिली जानकारी के अनुसार बीते 5 वर्ष में सर्फि अवैध शराब ही 100 करोड़ से अधिक की कीमत की थी. इसमें पुलिस द्वारा जब्त किए गए वाहनों की कीमत शामिल नहीं है. अवैध शराब और जब्त किए गए वाहनों की कुल कीमत 235 करोड़ से अधिक है.

पकड़ी गई शराब जिले में दाखिल हुई कुल शराब के महज 10 प्रतिशत होने का अनुमान है, मतलब बीते 5 वर्ष में जिले में कमसे कम 1000 करोड़ से अधिक की शराब दाखिल होने का अनुमान है. जिले में 2015 में शराबबंदी लागू की गई और उसी वर्ष में जिले में 8.99 करोड़ की सर्फि अवैध शराब ही जब्त की गई थी.उसके बाद जिले में जब्त की जाने वाली अवैध शराब का आंकड़ा प्रतिवर्ष बढ़ता ही गया. वर्ष 2016 में 14.46 करोड़, 2017 में 24.53 करोड़, 2018 में 23.20 करोड़ तथा 2019 में 22.50 करोड़ की सर्फि और सर्फि अवैध शराब ही जब्त हुई. 2020 के अकेले मई माह में जिले में सर्फि अवैध शराब ही 7.15 करोड़ की पकड़ी गई.

43 हजार आरोपी गिरफ्तार
जिले में पिछले 5 वर्ष में अवैध शराब के व्यवसाय में लप्ति कुल 43593 आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. अवैध शराब का व्यवसाय करनेवाले या तस्करी तथा परिवहन करनेवाले वर्ष 2015 में 6878 आरोपी गिरफ्तार हुए थे उसके बाद प्रतिवर्ष ऐसे गिरफ्तार व्यवसायियों का आंकड़ा भी निरंतर बढ़ता ही गया. वर्ष 2016 में 7731, 2017 में 7860, 2018 में 9440, 2018 में 8086 आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आये. वर्ष 2020 के अकेले मई माह में ही पुलिस ने अवैध शराब का व्यवसाय करनेवाले कुल 1590 आरोपियों को धर दबोचा है.पिछले 5 वर्ष में अवैध शराब के कारोबार में इस्तेमाल किये गए तथा कार्रवाई के बाद जब्त किए गए वाहनों की संख्या ही 8606 है जिनमे 2011 चार पहिया तो 6595 दुपहिया वाहन है. जिले में अवैध रूप से आनेवाली शराब को रोकने के लिए पुलिस को अपनी जान जोखिम में डालकर कार्रवाई करनी पड़ी है. इसके चलते एक सब इन्स्पेक्टर समेत एक पुलिस को अपनी जान गंवानी पड़ी. हाल ही में कच्ची शराब बनाने वाले आरोपियों द्वारा एक बाघिन और उसके शावकों को जहर देकर मारने का मामला भी सुर्खियों में है.