बारिश नहीं होने से धान उत्पादक परेशान, रोपाई में आ रही दिक्कतें

    मूल. पिछले कुछ दिनों से बरसात नहीं होने की वजह से किसानों को धान रोपाई में दिक्कतें आ रही हैं. यदि आगामी कुछ दिनों में बरसात नहीं हुई, तो किसानों की नर्सरी खेत में ही पड़ी रहेगी और किसानों के धान को विलंब हो सकता है. इसकी वजह से किसान चिंतित है. मूल सावली तहसील में उच्च श्रेणी के धान की पैदावार की जाती है.

    इस परिसर की मुख्य फसल भी धान ही है. किंतु आगामी 2 दिनों में पानी नहीं आया, तो पहले ही आर्थिक संकट में फंसे किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है. इसलिए मूल, सावली तहसील के धान उत्पादक किसानों के लिए आसोलामेंढा जलाशय का पानी छोड़ने की मांग किसानों व कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने की है.

    जून के बाद झमाझम का इंतजार

    मूल व सावली तहसील के भवराला, राजगड़, चांदापुर, खेड़ी, जूनासुर्ला, नवेगांव (भुजाला), बेंबाल, नांदवगांव, बोनडला, गडीसुर्ला, फिस्कुटी, बिरई आदि के साथ अनेक गांव की सैकड़ों हेक्टेयर खेती आसोलामेंढा तालाब के पानी पर निर्भर है. शुरुआत के जून महीने में औसत से 13 प्रश अधिक बरसात दर्ज की गई थी.

    इसलिए परिसर के अधिकांश किसानों ने धान के बीजों को खेतों में छिड़क दिया. अब धान की नर्सरी तैयार हो चुकी है. किंतु पखवाड़े भर से तहसील में बरसात में नहीं होने की वजह से खेतों में पानी नहीं भरा है. जिससे धान की रोपाई नहीं हो सकती है. यदि जल्द झमाझम बारिश नहीं हुई, तो किसानों पर दुबारा बुआई का संकट आ सकता है.

    आसोलमेंढा तालाब से पानी छोड़ें

    कोरोना महामारी से आर्थिक संकट में फंसे किसानों ने किसी प्रकार कर्ज लेकर बीज, खाद की खरीदी की है. किंतु धान की फसल को जिस औसत में बरसात चाहिए उतनी नहीं हुई है. इसलिए धान को बचाने के लिए आसोलमेंढा तालाब का पानी छोड़ने की मांग सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता को सौंपा है.

    ज्ञापन सौंपने वालों में कांग्रेस के तहसील अध्यक्ष घनश्याम येनुरकर, कृषि उपज बाजार समिति के उपसभापति संदीप करमवार, शांताराम कामड़े, पूर्व उपसरपंच गौरव पुपरेड्डीवार, प्रदीप कामड़े, अनिल निकेसर, गणेश खोब्रागड़े, तयुब खान पठान, तुलसीराम मोहुर्ल, रूमदेव गोहणे, लोकनाथ नरमलवारके आदि उपस्थित थे.