लॉकडाउन के बाद से प्रिंटिंग व्यवसाय बर्बादी के कगार पर

  • सैंकड़ो प्रिंटिंग प्रेस संचालक एंव कामगार हताश
  • अब सिमट रहा बाजार, कारोबार

राजुरा. जिले में कोरोना के कारण किए गए लॉकडाउन के बाद से प्रिंटिंग व्यवसाय पूरी तरह से बर्बादी के कगार पर आ गया है. लॉकडाउन के बाद से स्कूल, कालेज, कान्वेंट बंद रहने वहां का प्रिंटिंग कार्य नहीं मिल पा रहा है. शादी, जन्मदिन, गृहप्रवेश, सामाजिक एंव राजनीतिक कार्यक्रमों पर उपस्थितों की संख्या पर अंकुश की वजह से एक तो ग्राहक प्रिंट करवाने से कतरा रहे है या मात्र सौ-दो सौ कॉपीज ही प्रिंट करावा रहे है.

लेकिन अधीनस्थ कामगारों को वेतन, दुकान भाडा और बिजली का बिल समय पर देना पड़ रहा है. दम तोड़ रहे व्यवसाय की वजह से कई प्रिंटिंग प्रेस व्यवसायी लॉकडाउन के बाद से बिजली बिल की अदायगी नहीं कर पाए है. काम की कमी की वजह से पत्रिकाएं, कागज, प्लेटें, केमिकल सभी खराब होने लगा है. 

खर्च उतना ही एंव आमदनी घटने से इस व्यवसाय के साथ जुड़े लोगों की कमर तोड़ कर रख दी है. बढते डिजिटलाइजेशन की वजह से व्यवसाय में पांरपरिक तकनीक के आधार पर प्रिंटिंग व्यवसाय करने वाले व्यवसायों, बाइण्डरों का बाजार में टिकना मुश्किल हो गया है. कई लोगों ने इन हालत को देखते हुए इससे अपना मुंह मोड़ लिया.

वहीं उन्होंने सरकार के डिजिटलाइजेशन और ऑनलाइन कार्यो को भी एक बड़ा कारण बताया. व्यवसाय से जुड़े व्यवसायिनों ने कहा कि ऑनलाइन काम होने के कारण व्यापार और कार्यालय में पैड और बिल की मांग कम हो गई है. लोग अब कम्प्यूंटर के सहारे अपना सारा काम कर ले रहे हैं. जिससे उनका काम प्रभावित हो रहा है. लोग अब इस व्यवसाय से मुंह मोड़ने लगे हैं.