समस्या: ग्राम पंचायत के मनमाने कारोबार से ग्रामीण पेयजल से वंचित,पाहार्णी में बुनियादी सुविधा का अभाव, जलापूर्ति, बिजली आपूर्ति प्रभावित

    नागभीड़. नागभीड़ से 8 किमी दूरी पर स्थित 2223 जनसंख्या वाले पाहार्णी ग्राम में ग्रामपंचायत के निष्क्रिय शासन के कारण पाहार्णी ग्राम की जनता को बुनियादी सुविधा के अभाव में जूझना पड़ रहा है. एक माह से जलापूर्ति का लाइट बिल नहीं भरे जाने से जलापूर्ति प्रभावित हो गई है. पेयजल संकट से जूझ रही ग्रामीण जनता ने ग्रामपंचायत सदस्यों के गांव में पहुंचने पर उनका घेराव कर उनके समक्ष पेयजल संकट की व्यथा रखी. महिलाओं का कहना था कि गत तीन से चार वर्षों में नलयोजना कभी बंद नहीं रही, परंतु ग्रामपंचायत शासक के कारण आज गांव में पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है.

    वर्ष 2016-17 में बंद पड़ी जलापूर्ति योजना सुचारू रूप से शुरू किए जाने से गांव में पेयजल की समस्या दूर होने से ग्रामीणों में आनंद का वातावरण निर्माण हुआ था, परंतु कुछ ही दिनों में ग्रामपंचायत चुनाव में सत्ता परिवर्तन के कारण गांव को अंधकार में रखने और जनता को पेयजल से वंचित रखने की नौबत आ गई है. इसके चलते ग्रामीण पानी के अभाव और विद्युत पथदीप बंद होने से त्रस्त हो गए हैं.

    पानी के लिए हैंडपंपों पर निर्भरता

    वर्तमान में कृषि और रोपाई का काम शुरू है. महिलाएं सुबह 7 बजे रोपाई के लिए घर से निकल जाती हैं. गांव में पेयजल आपूर्ति नलयोजना से बंद कर दिए जाने से महिलाओं को कोरोना संकट के बीच भीड़ में खड़े रहेकर हैन्डपंपों से पानी भरना पड़ता है. पेयजल के लिए भटकना पड़ता है.

    नलयोजना एवं पथदीप जानबूझकर बंद रखकर तत्कालीन सरपंच देवानंद बावनकर और उपसरपंच लव भाजीपाले को ग्रामपंचायत पाहार्णी के वर्तमान सत्ताधारियों द्वारा बदनाम किया जा रहा है. वास्तव में शासन ने 15 वित्त आयोग से जलापूर्ति का बिजली भरे यह शासन अध्यादेश 23 जून 2021 को निकाला है. जानबूझकर जुलाई महीना शुरू होने के बाद भी सत्तापक्ष बिजली बिल ना भरते हुए नलयोजना बंद रखकर तत्कालीन सरपंच और उपसरपंच को इसके लिए जिम्मेदार बता रहे हैं. ग्रामीणों को पेयजल से वंचित रखा जा रहा है.

    पथदीप बंद, जहरीलें जंतुओं का खतरा बढ़ा

    इसी तरह गत तीन माह से गांव में सार्वजनिक खंभों के पथदीप बंद हैं एवं बारिश का मौसम शुरू होने से सांप, बिच्छू जैसे जहरीले जंतुओं का खतरा बढ़ गया है. पाहार्णी ग्राम पंचायत के सत्तापक्ष द्वारा ऐसे कामकाज होता रहा तो गांव का विकासकार्य पूर्ण रूप से थम जाएगा. आगामी कुछ दिनों में गांव के विद्युत पथदीप एवं नलयोजना का पेयजल का लाइट बिल नहीं भरने के कारण ग्रापं के विरोध में मटका आंदोलन किया जाएगा. ऐसी चेतावनी पूर्व सरंपच एवं वर्तमान सदस्य देवानंद बावनकर, भाजपा शक्ति केन्द्र के प्रमुख सौरभ सूर्यवंशी, युवा नेता रिंकू घरडे, राकेश मारबते, अभिषेक रामटेके एवं ग्रामीणों ने दी है.

    इस संदर्भ में ग्राम पंचायत सदस्य माधुरी योगेश्वर बेदरे ने कहा कि 3-4 वर्ष पूर्व तत्कालीन सरपंच देवानंद बावनकर ने बंद पड़ी नलयोजना शुरू की है एवं पद पर इसी तरह सुचारू रूप से शुरू थी परंतु सत्ता परिवर्तन होने के कारण ग्राम पंचायत मनमाने कामकाज के कारण नलयोजना एवं पथदीप तीन माह से बंद हैं. इसके चलते जनता को परेशानी सहनी पड़ रही है.

    रोपाई का काम प्रभावित

    ग्राम पंचायत सदस्य मनीषा मनोहर भगत का कहना है कि जलापूर्ति एवं पथदीप गत तीन वर्षों में कभी बंद नहीं रहे, परंतु वर्तमान सत्तापक्ष के शासन काल में जनता को परेशानी उठानी पड़ रही है.

    पूर्व उपसरपंच लव भाजीपाले पेयजल पानी बंद होने के कारण गांव के महिला वर्ग को हैन्डपप पर भीड़ में कोरोना काल में भी पानी भरने के लिए खड़े रहना पड़ता है. इसके चलते समय काम नहीं होता है. रोपाई का काम प्रभावित हो रहा है.

    भाजपा के युवा नेता राकेश मारबते का कहना है कि गांव में विद्युत पथदीप बंद होने के कारण मानव और पालतू प्राणियों को वन्यप्राणियों का खतरा है. बारिश का पानी रोड पर जमा होने से आवाजाही में परेशानी हो रही है. जमा पानी के कारण मच्छर तैयार हो रहे है. इससे बीमारी फैल सकती है.